क्या आपको ख़बर है? राजस्थान के नवलगढ़ में 2835 दिनों से धरने पर हैं किसान

आंदोलन , झुंझुनू, शनिवार , 07-10-2017


kisan-andolan-jhunjhunu-navalgadh-rajasthan

जितेंद्र चाहर

झुंझुनू (राजस्थान)। देश में सरकारें और कॉरपोरेटस किस तरह मिलकर किसानों की जमीनें हड़प रहे हैं और किस तरह न्यायपालिका और मीडिया भी इसमें भागीदार हो जाते हैं, इसका एक उदाहरण राजस्थान के झुंझुनू जिले में सामने आया है।

 

  • अदालत के जरिये भी गुमराह करने की कोशिश
  • 6 अक्टूबर को अख़बार में छपा आदेश
  • 8 सितंबर को किसान अदालत में हों पेश

 

6 अक्टूबर, 2017 को जिला एवं सेशन न्यायालय झुंझुनू की ओर से राजस्थान पत्रिका के झुंझुनू एडिशन में नवलगढ़ तहसील के गोडड़ा गाँव के 180 किसानों को 8 सितम्बर, 2017 को सेशन न्यायालय झुंझुनू में उपस्थित होने का आदेश छपा है। 8 सितम्बर, 2017 की तारीख पढ़ कर चौंकिए मत! यह तारीख पिछले महीने गुजर गई है लेकिन न्यायालय में हाजिर होने के लिए आदेश 6 अक्टूबर को अख़बार में छपा है।

अखबार में छपा समन।

जिला एवं सेशन न्यायालय झुंझुनू ने अपनी विज्ञप्ति में 180 किसानों की सूची प्रकाशित की है जिन पर 2014 में भूमि अवाप्ति अधिकारी ने 31 मुकदमें दर्ज करवाएं हैं। इन किसानों की 1278 बीघा जमीन श्री सीमेंट के प्लांट के लिए अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है।

10 साल से संघर्ष, 7 साल से धरना

नवलगढ़ तहसील में किसान पिछले दस सालों से अपने क्षेत्र में लगने वाली तीन सीमेंट फैक्ट्रियों के विरुद्ध संघर्षरत हैं। गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने सीमेंट फैक्ट्रियों के लिए जमीन अधिग्रहण करने के लिए इस क्षेत्र की उपजाऊ जमीन को बंजर घोषित कर जमीन सीमेंट फैक्ट्रियों को देकर किसानों के लिए जबरन मुआवजा घोषित कर दिया। किसानों ने मुआवजे के चेक नहीं लिए तो प्रशासन ने मुआवजे के चेक कोर्ट में जमा करवा दिए तथा किसानों की जमीन कम्पनी के नाम दर्ज कर दी है। इस क्षेत्र के किसान किसी भी कीमत पर अपनी जमीन छोड़ना नहीं चाहते और वह पिछले सात सालों से नवलगढ़ किसान संघर्ष समिति के तहत संगठित होकर इस जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ नवलगढ़ तहसील के सामने धरने पर बैठे हैं। 

नवलगढ़ में किसानों का आंदोलन जारी है।

किसानों पर कार्रवाई की कोशिश

नवलगढ़ किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष दीप सिंह शेखावत कहते हैं कि इस तरह का एक आदेश पिछले साल भी आया था जिसपर किसानों ने न्यायालय में हाज़िर हो कर एक स्वर में जमीन देने से मना कर दिया था। कल फिर से अख़बार में बैक डेट में न्यायालय द्वारा विज्ञप्ति देने का एक ही कारण दिखता है- किसानों पर एकतरफ़ा कार्रवाई करना।  

उन्होंने कहा कि हमें न कोई नोटिस मिला है, न समय पर अख़बार में दिया है। सरकार शुरू से ही एकतरफ़ा कार्रवाई कर रही है। जबकि इस जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हमारा 2835 दिनों से धरना जारी है। रविवार, 8 अक्टूबर को संघर्ष समिति की कार्यकारणी की बैठक है जिसमें आगे की रणनीति तय की जायेगी।

45 हज़ार की आबादी प्रभावित

ज्ञात रहे कि श्री सीमेंट और अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट और खनन के लिए नवलगढ़ में लगभग 72,000 बीघे भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है। इस 72 हज़ार बीघे में 18 गांव हैं जिनमें 45 हज़ार से भी ज्यादा लोग पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। यह जमीनें न सिर्फ उनकी जीविका का साधन हैं, बल्कि उनके अस्तित्व की पहचान हैं। प्रस्तावित भूमि बहुफसलीय भूमि है जिसको प्रशासन द्वारा बंजर दिखाने का भी प्रयास किया गया। बहुफसलीय जमीनों के साथ शमशान घाट, आम रास्ते, तीर्थ स्थल, गोचर भूमि भी श्री सीमेंट कंपनी के लिए रिको के नाम की जा चुकी है। इनके अलावा पर्यटन स्थल, पर्यावरण, जोहड़, खेजड़ी, मोर इत्यादि को हानि पहुंचेगी। इस भूमि अधिग्रहण में 45,000 लोगों के विस्थापन से इस पूरी आबादी का अस्तित्व संकट में आ जाएगा। अधिग्रहण में जा रही इस जमीन का लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा कृषि भूमि का है और यहां के निवासी मुख्यतः किसान हैं जिनका उगाया अन्न इस देश की जनता का पेट भरता है।

नवलगढ़ में किसानों का आंदोलन जारी है।

संविधान का उल्लंघन

इस अधिग्रहण के प्रस्ताव के समय से ही किसान अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं जिसके बावजूद प्रशासन बिना किसानों की सहमति और मुआवजा उठाए ही उनकी जमीनें राजस्थान इंडस्ट्रियल इन्वेसटमेंट कॉरपोरेशन (रिको) के नाम कर चुका है जो कि संविधान का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। प्रशासन द्वारा लगातार इलाके में समाचार-पत्रों के माध्यम से यह खबर फैलाकर कि बहुत जल्द इस क्षेत्र को जबरन खाली करा दिया जाएगा, किसानों को डराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन लगातार इस कोशिश में है कि किसान डर कर अपना आंदोलन छोड़ दें जबकि किसान इस बात के लिए दृढ़ संकल्प हैं कि वह जान दे देंगे किंतु अपनी जमीनें नहीं छोड़ेंगे।

सात साल से अपना आंदोलन शांतिपूर्वक लड़ रहे यह किसान अपने देश के संविधान में पूरी तरह से भरोसा करते हैं और संविधान के तहत दिए गए अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत ही अपने विरोध को दर्ज करवा रहे हैं। किंतु प्रशासन सभी संवैधानिक प्रावधानों को दर किनार कर चंद उद्योगपतियों के मुनाफे के लिए हजारों परिवारों के जीवन की बलि चढ़ाने पर तुला हुआ है।

(लेखक जितेंद्र चाहर सामाजिक कार्यकर्ता हैं और जन संघर्षों पर रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट www.sangharshsamvad.org के मॉडरेटर हैं। आप झुंझुनू, राजस्थान के निवासी हैं और फिलहाल दिल्ली में रहते हैं।)






Leave your comment











???? ????? :: - 11-17-2017
क्या इस संघर्ष समिति वालो का मोबाइल नम्बर मिल सकता है हम इस मुद्दे को उठाना चाहते हैं 9873431000 पर मेसिज कर दीजिए