मेहसाणा बना दलित और किसान मुक्ति यात्रा के संगम का गवाह

आंदोलन , अहमदाबाद/मेहसाणा, बृहस्पतिवार , 13-07-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। बुधवार को गुजरात का मेहसाणा जिला दो-दो यात्राओं का संगम बन गया। एक तरफ मध्य प्रदेश से शुरू हुई किसान यात्रा महाराष्ट्र के रास्ते यहां पहुंची। दूसरी तरफ ऊना कांड की बरसी पर दलितों की आजादी कूच यात्रा थी जो इसी स्थान से निकली। हालांकि इस यात्रा को प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। बावजूद इसके नेताओं ने हार नहीं मानी। और गिरफ्तारी समेत तमाम तरह के दबावों के बाद भी यात्रा जारी है। 

आजादी कूच यात्रा में गिरफ्तार कार्यकर्ता और नेता।

तमाम बाधाओं के बाद भी जारी है यात्रा

आजादी कूच यात्रा मेहसाणा से शुरू होकर 18 जुलाई को बनासकांठा पहुंचनी है। यात्रा में शामिल आइसा नेता फरहान के मुताबिक बुधवार को प्रशासन ने ऊना आंदोलन के नेता जिग्नेश मेवानी, जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, पाटीदार नेता रेशमा पटेल और आइसा-आरवाईए नेताओं समेत सबको हिरासत में ले लिया था। हालांकि बाद में इन लोगों को जमानत पर छोड़ दिया गया। जमानत से छूटने के बाद कन्हैया दिल्ली के लिए रवाना हो गए। बाकी यात्रा जिग्नेश के नेतृत्व में जारी है। कल रात को ही मेहसाणा के पास तीन गावों में सभाएं हुईं। 

इन सभाओं में अच्छी-खासी भीड़ जुट रही है। यात्रा के रूप में थोड़ी तब्दीली की गयी है। पैदल चलने वाली इस यात्रा को अब बसों और सवारियों के जरिये आगे बढ़ाया जा रहा है। लेकिन उसमें भी नेताओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल प्रशासन हर तरीके से यात्रा में बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि रास्ते में बस और गाड़ियां भी यात्रियों की मदद करने से इंकार कर दे रहे हैं। तमाम पेरशानियों के बाद भी नेताओं ने हिम्मत नहीं हारी है।

‘जंग छिड़ चुकी है, जनता भिड़ चुकी है’

ये बात ऊना आंदोलन के नेता जिग्नेश मेवानी की फेसबुक पोस्ट में भी दिखती है। जिसमें उन्होंने कहा है कि “गुजरात की दलित विरोधी सरकार हर कीमत पर आज़ादी कूच को रोकना चाहती है, हम भी हर कीमत पे आगे बढ़ना चाहते हैं...जंग छिड़ चुकी है, जनता भिड़ चुकी है.... 18 तारीख को यह आज़ादी कूच धानेरा पहुंच कर रहेगी...”

इसी तरह की एक और पोस्ट में उन्होंने बताया है कि “पहले ही दिन आज़ादी कूच पे संघियों के हमलों के बावजूद उमड़ पड़े हैं दलित। उत्तर गुजरात के मेहसाना जिले के उनज़ा गांव में, रात के 12 बजे भी तबीयत से हो रही है मीटिंग”। 

किसान मुक्ति यात्रा की एकसभा में जुटे किसान।

जब मेहसाणा बना यात्राओं का संगम

उधर, बुधवार को किसान मुक्ति यात्रा का आज सातवां दिन था। यात्रा की शुरुआत गुजरात के खेड़ा से हुई और फिर मेहसाणा होते हुए राजस्थान के पावापुर पहुंची। खेड़ा के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए यहां जनसभा का आयोजन किया गया। सन 1918 में गुजरात जिले की पूरे साल की फसल मारी गई। स्थिति को देखते हुए लगान की माफी होनी चाहिए थी, पर सरकारी अधिकारी किसानों की इस बात को सुनने को तैयार न थे। किसानों की जब सारी प्रार्थनाएं नाकाम हो गईं तब महात्मा गांधी ने उन्हें सत्याग्रह करने की सलाह दी। गांधी जी की अपील पर वल्लभभाई पटेल अपनी खासी चलती हुई वकालत छोड़ कर सामने आए। खेड़ा का सत्याग्रह किसानों का अंग्रेंज सरकार की कर-वसूली के विरुद्ध एक सत्याग्रह (आन्दोलन) था। इस सत्याग्रह के बाद गुजरात के जनजीवन में एक नया तेज और उत्साह उत्पन्न हुआ और आत्मविश्वास जागा।

अहमदाबाद में हुई प्रेस कांफ्रेंस

किसान मुक्ति यात्रा के किसान नेताओं ने अहमदाबाद में बुधवार को प्रेस को सम्बोधित किया। इस प्रेसवार्ता में गुजरात के नेता अशोक श्रीमाली (सचिव खान,खनिज और मानव), अशोक चौधरी (सचिव, आदिवासी एकता परिषद), सागर राबारी (सचिव गुजरात खेड़ुत समाज), भरत सिंह झाला (क्रांति सेना) और नीता महादेव (गुजरात लोकहित समिति) भी शामिल हुए।

किसान आंदोलन की तीसरी पीढ़ी और दलित आंदोलन की दूसरी पीढ़ी का बुधवार को मेहसाणा में संगम हुआ। किसान आंदोलन का दलित आंदोलन के संघर्ष में साथ एक ऐतिहासिक अवसर था। किसान मुक्ति यात्रा के पहुंचने पर कन्हैया कुमार ने कहा कि किसान क्या चाहे-आज़ादी, दलित भी चाहे आज़ादी, हम सब चाहें आज़ादी के नारे लगाए। ऊना से मंदसौर की लड़ाई एक है के नारे लगातार गूंजते रहे।

विभाजन दमन को न्योता 

सभा को सम्बोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति के संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि जब तक हम अलग-अलग लड़ते रहेंगे तब तक सरकारें हमारा दमन करती रहेंगी। लेकिन संगठित संघर्ष से सरकारों को अपनी दमनकारी नीति बदलनी पड़ेगी। सांसद राजू शेट्टी ने कहा कि महाराष्ट्र का किसान आंदोलन साहू जी महाराज, महात्मा फुले और बाबा साहेब की प्रेरणा से आगे बढ़ा है। 

इसीलिए हम आज़ादी कूच को समर्थन देने मेहसाणा पहुँचे हैं। प्रतिभा शिंदे ने कहा कि व्यारा में हजारों आदिवासियों ने किसान मुक्ति यात्रा के साथ जुड़कर आदिवासी खेड़ुत एकता का शंखनाद किया। डॉक्टर सुनीलम ने कहा कि ऊना मार्च ने देश के दलितों में एक नई ऊर्जा का संचार किया था और अब किसान मुक्ति यात्रा और आज़ादी कूच की एकजुटता से देश पर थोपे जा रहे मोदानी मॉडल के ख़िलाफ़ संघर्ष करने वालों की नई एकता देश के स्तर पर दिखलाई पड़ेगी।

सभा को संबोधित करते योगेंद्र यादव। साभार-स्वराज अभियान फेसबुक

सपना हुआ साकार: योगेंद्र यादव 

मेहसाणा की सभा में बोलते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि यह व्यक्तिगत रूप से मेरे अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण क्षण है जबकि दलित और किसान एक साथ एक मंच पर हैं। मेरे वैचारिक व राजनितिक गुरू किशन पटनायक का एक सपना था कि इस देश की जो दो बड़ी ऊर्जा है क्या इन्हें कभी एक नहीं किया जा सकता है ? आज उनका सपना साकार होता दिखाई दे रहा है। आज हमें कर्नाटक को याद करना चाहिए जब प्रोफेसर नंजुद्दास्वामी, डी आर नागराज, देवानूर महादेव ने इन दोनों धाराओं को जोड़ने का प्रयास किया और आज वह समय है जबकि उन्हें याद किया जाना चाहिए। संगठन के रूप में भी कर्नाटक में दलित संघर्ष समिति और कर्णाटक राज्य रैयत संघ भी एक साथ आये थे। शरद जोशी व अम्बेडकर भी एक साथ आये थे।

मेहसाणा की जनसभा किसान और दलित को एक मंच पर लाने का सांगठनिक प्रयास था और आज के संघर्ष में एक दूसरे के साथ खड़े होने का ये शायद पहला महत्वपूर्ण मौका है।

आप को बता दें कि किसान मुक्ति यात्रा में हर दिन एक किसान नेता को समर्पित किया जाएगा। जहां कल का दिन महान किसान नेता बिरसा मुंडा और सरदार पटेल को समर्पित किया गया था वहीं आज का दिन किशन पटनायक को समर्पित किया गया है। किशन जी एक ऐसे नेता थे जिन्होंने हमेशा समाज के कमजोर वर्ग दलित, वंचित और किसानों के हित के लिए आवाज उठाई। उन्होंने देश भर के किसान आंदोलनों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया।

किसान मुक्ति यात्रा के किसान नेता रामपाल जाट, अविक साहा, के चंद्रशेखर, कविता कुरुगंती, गोरा सिंह, रुलदू सिंह, लिंगराज और विमलनाथन सहित 15 राज्यों के 150 यात्री शामिल रहे।

एक ही दिन समाप्त होंगी दोनों यात्राएं

यह किसान मुक्ति यात्रा मध्यप्रदेश के मंदसौर से शुरू होकर 6 राज्यों से होती हुई 18 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचेगी। इस यात्रा के साथ हज़ारों की संख्या में किसान जंतर-मंतर पहुंचेंगे। यह महज संयोग नहीं है कि दोनों यात्राएं एक ही दिन समाप्त हो रही हैं। गौरतलब है कि आजादी कूच भी 18 जुलाई को ही बनासकांठा में खत्म हो रही है।

 






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