हजारों तनी मुट्ठियों ने एक सुर में कहा- अब किसान मजबूर नहीं

आंदोलन , नई दिल्ली, मंगलवार , 18-07-2017


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। मंगलवार को जंतर-मंतर किसानों के ऐतिहासिक आंदोलन का गवाह बना। मध्यप्रदेश के मंदसौर से चली किसान मुक्ति यात्रा देश के छह राज्यों से होते हुए 13 दिनों बाद आज देश की राजधानी दिल्ली पहुंची। इस अवसर पर किसानों ने सत्ता और सरकार से आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया। तनी मुट्ठियों के साथ उन्होंने बता दिया कि किसान अब मजबूर नहीं है। इसके साथ ही यात्रा का दूसरा चरण शुरू हो गया है जिसमें 150 से अधिक किसान संगठनों ने अपना समर्थन दिया।

इस अवसर पर पहुंचे हजारों किसानों ने एक सुर में सरकार की किसान विरोधी नीतियों का विरोध किया। किसानों ने संसद के सामने दो मुख्य मांगे रखी: फसल का पूरा दाम मिले और किसानों को पूर्णरूप से कर्जमुक्त किया जाए।

आत्महत्या करने वाले किसानों के बच्चे।


तमिलनाडु के किसान नेता अय्याकन्नू के नेतृत्व में तमिलनाडु के किसानों ने किसान मुक्ति संसद को अपना समर्थन दिया। इस मौके पर महाराष्ट्र के आत्महत्या करने वाले किसानों के बच्चे लोगों के मुख्य आकर्षण के केंद्र रहे। उन्होंने अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये किसानों की दुर्दशा को पेश किया। जंतर-मंतर पर उपस्थित इन बच्चों में से एक अशोक पाटिल ने कहा कि "मुझे दुख है क्योंकि मेरे पिता ने आत्महत्या की है लेकिन मैं इस देश के सभी किसानों को बताना चाहता हूँ कि आत्महत्या के विकल्प को छोड़कर हमें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष का रास्ता अपनाना होगा।"

किसानों को संबोधित करते सीताराम येचुरी।


सत्तापक्ष और विपक्ष के भी कई सांसद पहुंचे जंतर-मंतर
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के नेताओं के आह्वान पर सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों ने किसान मुक्ति संसद में हिस्सा लेकर किसानों की मांगों का भरपूर समर्थन मिला। राजू शेट्टी(स्वाभिमानी शेतकारी संगठन), डॉ. धर्मवीर गांधी (आम आदमी पार्टी), तपन कुमार सेन (सीपीएम), शरद यादव (जेडीयू), अली अनवर (जेडीयू), मोहम्मद सलीम(सीपीएम),जितेंद्र चौधरी, सीताराम येचुरी,अरविंद सावंत(शिवसेना),बीआर पाटिल(कांग्रेस),शैलेन्द्र कुमार(जेडीयू),मो. मदरुद्ददुजा,शंकर दत्ता,श्रीमोती और अन्य सांसदों ने किसानों की माँगों का समर्थन करते हुए किसान मुक्ति संसद में शामिल हुए।

किसान मुक्ति संसद में बोलते हुए, एमपी राजू शेट्टी ने सांसदों का आह्वान करते हुए कहा कि सभी सांसद, संसद जाने से पहले जंतर-मंतर आएं और किसानों की मांगों का समर्थन करें। मेधा पाटेकर ने कहा कि सरकार की किसान और आदिवासी विरोधी नीतियों से पूरा देश परेशान है और अब हम आर-पार की लड़ाई करने के लिए तैयार हैं।

सांसद और सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने भी किसान मुक्ति संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज की। जंतर-मंतर पर बोलते हुए सीताराम येचुरी ने कहा कि "आप सभी के साथ मैंने भी किसान अधिकारों के लिए लड़ने का संकल्प लिया है और आपसे यह भी वादा करता हूं कि मैं इस लड़ाई को संसद में ले जाऊंगा।"

किसान मुक्ति संसद में शामिल हुए शरद यादव ने कहा कि "यह सिर्फ किसानों की लड़ाई नहीं है, यह पूरे देश की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि जब आप संसद के बाहर यह लड़ाई लड़ रहे हैं, उसी समय मैं संसद में किसानों की माँगों को समर्थन दूंगा। उन्होंने यह भी वादा किया कि किसानों की लड़ाई के समर्थन में हम पूरे विपक्ष की ओर से एक रैली का आयोजन करेंगे।

मंच पर मौूजद किसानों के नेता।

जंतर-मंतर की जनसभा को सम्बोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक वीएम सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सरकार किसानों का हक़ नहीं देने वाली है। हमें अपना हक छीन कर लेना होगा। उन्होंने मंदसौर से आये किसानों का मंच पर बुलाकर स्वागत भी किया।

सभा का संचालन डॉ. सुनीलम ने किया। किसान संसद को संबोधित करते हुए सुनीलम ने मांग किया कि किसानों पर गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो और ऋणमुक्ति और पूरे दाम की मांग को सरकार जल्दी से जल्दी स्वीकार करे।

सभा को सम्बोधित करते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि किसानी का दो तिहाई काम करने वाली महिलाओं ने इस किसान मुक्ति संसद को ऐतिहासिक बना दिया है। वहीं प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार बड़े पूंजीपतियों और कम्पनियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों को कुचलने पर उतारू है।

आपको बता दें कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा आयोजित किसान मुक्ति यात्रा आज जंतर मंतर पहुँच गयी है। 6  जून को मन्दसौर के किसानों पर गोलीबारी हुई थी। उसके एक माह बाद 6 जुलाई से 18 जुलाई तक देश के 6 राज्यों से होते हुए किसान मुक्ति यात्रा निकाली गयी। यह यात्रा 6 जुलाई को मध्यप्रदेश के मन्दसौर से शुरू होकर महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश होते हुए आज दिल्ली पहुंची है। किसानों की दोनों मांगों (कर्जमुक्ति और ड्योढ़े दाम) के समर्थन में आज 18 जुलाई से जंतर-मंतर पर धरने की शुरुआत हुई।

 






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