महाराष्ट्र के किसानों का गुजरात कूच, मोदी से अपील “खून ले लो, जान मत लो”

आंदोलन , , बृहस्पतिवार , 20-04-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद/वडनगर। तमिलनाडु के किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली में एक महीने से भी ज़्यादा समय से डेरा डाले हुए हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही, अब महाराष्ट्र के किसान प्रधानमंत्री के गृहनगर गुजरात के वडनगर के लिए कूच कर रहे हैं, कि शायद यहां से प्रधानमंत्री को उनकी बदहाली नज़र आ जाए।

देश की राजधानी दिल्ली में तमिलनाडु के किसान तरह-तरह से अपनी समस्याओं की ओर ध्यान खींचने के लिए कोशिश कर रहे हैं, वे कभी पीएमओ के सामने नग्न प्रदर्शन करते हैं, कभी इंसानी खोपड़ी को लेकर धरना देते हैं, कभी सड़क पर रखकर दाल-चावल खाते हैं लेकिन सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा, अब इससे आगे जाकर महाराष्ट्र के किसान खून दान करने जा रहे हैं। उनका नारा है कि मोदी जी, “खून लेलो जान मत लो, किसान जीना चाहते हैं”। अब देखना है कि इस मार्मिक अपील का भी मोदी सरकार पर कुछ असर पड़ता है या नहीं।  

महाराष्ट्र के किसानों का गुजरात कूच

सीएम होम टाउन से पीएम होम टाउन तक

यह किसान अमरावती से तीन बार से निर्दलीय विधायक और प्रहार संस्था के अध्यक्ष बच्चू कदू अचलपुर के नेतृत्व में यह आंदोलन कर रहे हैं। अमरावती महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस का गृहनगर है, लेकिन किसान यहां भी बदहाल हैं इसलिए उन्होंने सीएम होम टाउन से पीएम होम टाउन तक यात्रा निकालकर आंदोलन करने का फैसला लिया।  

अमरावती से वड नगर तक

‘जनचौक’ से बातचीत में प्रहार संस्था के सचिव गणेश पुरोहित ने बताया कि संस्था के अध्यक्ष बच्चू कदू के साथ अमरावती के किसानों की यह यात्रा सूरत से 120 किलोमीटर नवगाम से वडनगर के लिए प्रारम्भ हो गई है। इस यात्रा में संस्था के पदाधिकारियों के अलावा महाराष्ट्र के करीब 1000 किसान शामिल हैं। उनके मुताबिक किसानों की ये संख्या अहमदाबाद पहुंचते-पहुंचते 3000 के लगभग हो जाएगी। 

पुरोहित अपनी मांगों को बताते हुए कहते हैं कि किसानों के देश में साढ़े तीन लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं। किसानों की समस्याओं को लेकर किसी भी सरकार ने कभी भी कोई ठोस क़दम नहीं उठाया, चाहे वो कांग्रेस की सरकार हो या आज की मोदी सरकार। सरकार ने स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को अब तक लागू नहीं किया। अन्नदाता को उसकी फसल के सही दाम नहीं मिल रहे हैं, पानी और खाद की पूर्ण व्यवस्था नहीं है जिस कारण किसानों को आत्महत्या करनी पड़ रही है। 

"स्वामीनाथन समिति की सिफारिश लागू करो"

आंदोलनकारी किसानों की मांग है कि स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को सरकार तुरंत लागू करे, फसल की सही कीमत मिले, कर्ज़ माफ़ी हो और आत्महत्या रोकने के लिया सरकार ठोस कदम उठाए। 

किसान खून दान करेंगे

आज 20 अप्रैल की सुबह चला किसानों का ये दस्ता रात में नरेंद्र मोदी के गाँव वड नगर पहुंचेगा। 21 अप्रैल को बच्चू कदू समेत लगभग 1000 किसान खून दान करेंगे और मोदी जी से कहेंगे कि “खून लेलो जान मत लो’’, “हम किसान जीना जीना चाहते हैं।”  

पुरोहित का कहना है यदि केंद्र सरकार किसानों के हित में ठोस क़दम नहीं उठाती है तो ये आन्दोलन बड़ा रूप लेगा। 

गुजरात के किसान भी साथ

गुजरात के किसान और अन्य संगठन के नेता भी इस यात्रा के साथ जुड़ रहे हैं। किसान नेता सागर रबारी ने बताया कि वह और खेडूत समाज के कई साथी बारडोली से यात्रा में शामिल हुए हैं, जो समस्या महाराष्ट्र के किसानों की है वही गुजरात के किसानों की भी है हम लोग इस यात्रा को हर संभव सहयोग कर रहे हैं।






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