मंदसौर में नहीं हुई किसानों की सभा, योगेंद्र, मेधा समेत कई किसान नेता गिरफ्तार

आंदोलन , , बृहस्पतिवार , 06-07-2017


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जनचौक स्टाफ

नई दिल्ली। मंदसौर के किसानों की हत्या के एक महीने पूरे होने पर उन्हें श्रद्धांजलि देने जा रहे किसान नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार होने वालों में प्रमुख स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव और एनएपीएम की नेता मेधा पाटेकर शामिल हैं। इसके अलावा सीपीएम पोलित ब्यूरो सदस्य और पूर्व सासंद सुभाषनी अली, किसान सभा के महामंत्री और पूर्व सांसद हन्नान मौल्ला, समन्वय समिति के संयोजक और पूर्व विधायक बीएम सिंह, माले नेता पुरषोत्तम शर्मा और प्रेम सिंह अहवालत को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गौरतलब है कि इस मौके पर एक किसान मुक्ति यात्रा भी निकलनी थी।

इन नेताओं को मंदसौर के रास्ते में ही आज सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। ये लोग एक सभा करना चाहते थे लेकिन प्रशासन ने कानून और व्यवस्था का मामला बताकर उसकी इजाजत नहीं दी। बताया जा रहा है कि सड़कों को जाम कर दिया गया है और गाड़ियों को जिले में नहीं घुसने दिया जा रहा है।

पिपलिया मंडी में शहीद किसान स्मृति पंचायत होनी थी लेकिन सरकार उसकी अनुमति नहीं दी। आपको बता दें कि पिपलिया वही जगह है जहां पुलिस ने फायरिंग की थी और उसमें पांच किसानों की मौत हो गयी थी। ये सभा अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बुलावे पर हो रही थी जिसमें पूरे देश के 100 से ज्यादा संगठन शामिल हैं। स्वराज अभियान का जय किसान आंदोलन, राजू शेट्टी का स्वाभिमान शेतकारी संगठन समेत कई संगठन इसके हिस्से हैं। 

इसके पहले मध्यप्रदेश सरकार ने किसान नेता और पूर्व विधायक और किसान संघर्ष समिति के सदस्य डॉ. सुनीलम को भी गिरफ्तार कर लिया था। मंदसौर में इस मौके पर पूरे देश से किसान नेता और कार्यकर्ता पहुंचे थे। डॉ.सुनीलम की गिरफ्तारी को योगेंद्र यादव ने तानाशाही करार दिया है। यहां से निकलने वाली किसान मुक्ति यात्रा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश होते हुए 18 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के मौके पर दिल्ली में समाप्त होगी।

स्वराज अभियान की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा है कि भाजपा की राज्य सरकारें और केन्द्र की मोदी सरकार जनविरोधी तो है ही अब यह तानाशाही की ओर बढ़ रही है जिसका राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक की मोदी सरकार की नीतियां कारपोरेट घरानों के मुनाफे के लिए ही रही हैं। इन नीतियों ने हमारे देश के अनौपचारिक क्षेत्र को बर्बाद कर दिया है। इससे हमारी खेती किसानी चौपट हो गयी और चौतरफा महंगाई व बेरोजगारी बढ़ी है। अब इसके खिलाफ जब जनता का संगठित प्रतिकार होना शुरू हो गया है तो सरकार दमन पर उतर आयी है। 


 






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