जीएसटी पर दिल्ली के एक नागरिक का मनीष सिसोदिया के नाम खुला पत्र

विशेष , , शनिवार , 10-06-2017


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रविंद्र पटवाल

(दिल्ली के जागरूक नागरिक रविंद्र पटवाल ने एक आम नागरिक की हैसियत से दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और वित्तमंत्री मनीष सिसोदिया को एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने आम आदमी पार्टी के कामकाज, उसके तरीके और उनके जीएसटी को लेकर रुख पर कुछ ज़रूरी सवाल उठाए हैं। 'जनचौक' यह पूरा पत्र आपके सामने रख रहा है:- मॉडरेटर )

प्रिय मनीष सिसोदिया जी,

नमस्कार

आपने GST पर फ़ेसबुक live किया। GST की 2 राउंड मीटिंग वित्त मंत्री जेटली जी संग की। आपकी संतुष्टि के लिए GST में आपको बहस करने का भरपूर मौक़ा मिला। मनीष जी आप इससे कितने खुश हैं, ये आपके वक्तव्य से बार-बार छलक रहा है।

हम आम आदमी इसे देख बहुत ख़ुश हैं कि आपको एकाएक GST और मोदी सरकार के प्लान में काफ़ी अच्छाइयाँ नज़र आने लगी हैं। 

आशा है अब आपके केजरीवाल और AAP पार्टी को दिल्ली में सरकार चलाने में दिक़्क़तें काफ़ी कम हो जाएँगी। हँसी ख़ुशी खाइए और खिलाइये के सिद्धांत पर जिस शीला सरकार ने वाजपेयी राज से लेकर 15 साल शासन किया, उसपर आपका ध्यान 2 साल बाद गया, बस इसी का दुःख है।

पर एक सवाल मन को कचोट रहा है। रहा नहीं जा रहा सो पूछ लेता हूँ।

जब यही सब करना था तो ये 2 साल बेमिसाल, केजरीवाल करने की क्या ज़रूरत थी? यह फ़ीलर तो मोदी सरकार पहले दिन से आप सबको दे रही थी? आपने भी यही फ़ीलर 2015 विधानसभा चुनाव में दिया था 'ऊपर मोदी, नीचे केजरी " का। उनका स्पष्ट मत था कि दिल्ली पा गए हो, मज़े करो। उँगली मत करना। पर आप थे कि व्यवस्था परिवर्तन से नीचे एक इंच तैयार नहीं थे अभी हाल तक। अब दो साल बाद पिट-पिटा कर और image का कचरा कर जो सिला आप अपने घोषित उद्देश्यों का करने जा रहे हैं, ये क्या इस बात का इशारा है कि कपिल मिश्रा और कुमार विश्वास की बजाय पूरी पार्टी कल भाजपा में समाहित होने वाली है?

भाजपा द्वारा कपिल मिश्रा के ज़रिए सत्ता पलट का जो लगभग सफल (अधूरा) प्रयोग जो एकदम लास्ट मिनट में किसी तरह मैनेज हो गया उसे देख आप सबके लगता है होश फ़ाख्ता हैं। इसी बीच सहारनपुर हो गया, उसकी धमक जंतर मंतर सहित पूरे देश ने महसूस की, पर आपकी साँस की आवाज नहीं आई कि चल रही है या नहीं।

महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में किसान पिछले 9 दिन से जान दे रहा है। जिन्हें आप मरा विपक्ष कहते थे, वो तक जाग गये, देश ही नहीं पूरे विश्व में भारत सरकार की थू-थू हो रही है, आप चादर तान सो गए। गुजरात में आपको चुनाव लड़ना था, वहाँ दलित, मुस्लिम, आदिवासी और पटेल सब ख़ुद एक मंच पर आ गए, पर आपकी सारी तैयारी जैसे ग़ुब्बारे से हवा निकल जाती है, वो साबित हुई। कारण पंजाब, गोवा और एमसीडी चुनाव से भी ज़्यादा दिल्ली में आपके तख़्ता पलट के डर ने यह स्थिति कर दी।

आज आप "मिले सुर मेरा तुम्हारा" की मार्मिक अपील कर रहे हैं।

केजरीवाल जी मुँह में फ़ेविकोल चिपका लिए हैं, और आपके ज़रिए डील (मांडवाली) करा रहे हैं।

प्रिय सिसोदिया जी, माना कि आपने शिक्षा के क्षेत्र में देश में मिसाल क़ायम की है। आपकी गोवा में शिक्षा पर बहस की तक़रीर क्या शानदार जानदार थी, जिसे सभी को देखना समझना चाहिये। पर आप पल में रत्ती पल में कुम्भकर्ण बनने वाली इस अदा से क्या हासिल करेंगे?

लोगों ने आज अन्ना हज़ारे को इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया है। महाराष्ट्र के किसानों ने उनके बीच बचाव के पैंतरों को तत्काल दुलत्ती मार दी।

आप भी इतिहास बनाये थे, पर इतिहास बनते देर नहीं लगती।

मनीष सिसोदिया का आज,10 जून को अख़बारों में छपा विज्ञापन।

दिल्ली की जनता ने mandate (जनादेश) दिया था आपको जनलोकपाल, पूर्ण राज्य और मोहल्ला सभा के ज़रिए स्वराज में हर दिल्ली वासी की सहभागिता के लिये। हर दिल्ली वासी को भ्रष्टाचार से लड़ने वाले योद्धा के रूप में आगे आने के लिए.

आपने GST के बहाने जो सुर में सुर मिलाया है, वो दिल्ली नहीं देश की जनता के सपनों के साथ बहुत बड़ा धोखा है।

एक बात बताइये, बड़ी बात नहीं पूछता आपसे-

जब सारे देश में मान लीजिये साबुन का उत्पादन होगा, सब प्रदेश एक दर मान लीजिए 20% की दर से GST लगाएँगे तो हमारे गोदरेज, Hindustan Unilever वाले जो मुंबई में बैठते हैं जो देश की finance capital (आर्थिक राजधानी) है वो भला उत्तराखंड, हिमाचल, झारखण्ड या उड़ीसा जैसे 22 पिछड़े राज्यों में फ़ैक्टरी क्यों लगाएँगे? वे नहीं लगाते तो छोटे या Msme उद्योगपति लगाएँगे तो वे Lux, हमाम, Pears से जो विज्ञापन ब्राण्ड और price war खेल इन राज्यों के उद्योग को ख़त्म कर देंगे, उन राज्यों के छोटे उद्योग धंधों, कामगारों और ख़ुद राज्य का उत्थान कैसे होगा? क्या ये सब बर्बाद होकर दसियों करोड़ मुंबई, चेन्नई, बंगलोर, हैदराबाद और दिल्ली में धारावी से भी कई गुना बड़े ज़िंदा नर्क में रहने को मजबूर नहीं कर देंगे आप?

जिस तरह अमीर और अमीर हो रहा है उसी तरह ये GST भी अमीर शहर को और अमीर बनाने का साधन मात्र नहीं है?

ग़ुस्सा तो GST पर कांग्रेस के समय से है, पर अचानक आपकी नई भक्ति देख फट पड़ा है। आपका ये छोटा क़दम हम आम जन के लिए वामन के तीन क़दम के समान जान पड़ता है, जो भारत की जनता के आशाओं-आकांक्षाओं पर पहला पहला कठोर आघात के समान है। पुरानी मिसल है "आए थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास"

You too Brutus (ब्रूटस तुम भी)????? 

दिल्ली का एक आम नागरिक

 

(एक लेखक के निजी विचार हैं। 'जनचौक' का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।)






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