तोगड़िया ने कहा- आईबी कर रही है मेरी जासूसी

आंदोलन , , शुक्रवार , 30-06-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया ने केंद्र और गुजरात की राज्य सरकार पर अपनी और अपने संगठन की जासूसी करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने आईबी के निदेशक को पत्र लिखकर इसकी शिकायत की है। इस बीच विपक्षी और पाटीदार आंदोलन के नेताओं ने भी पीएम के दौरे के दौरान विरोधी नेताओं को हिरासत में लिए जाने की निंदा की है। 

निदेशक को लिखे गए अपने दो पन्ने के पत्र में तोगड़िया ने खुफिया एजेंसियों की कथित हरकत पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि आईबी के लोग उनके कार्यकर्ताओं से पूछताछ कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि उनके संगठन हिंदू हेल्पलाइन और अन्य सामाजिक संगठनों की भी जांच की जा रही है। तोगड़िया ने सरकार से माफ़ी मांगने तथा पूरे मामले की जांच की मांग की है।

पाटीदार नेता रेशमा पटेल।

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के अपने गृह सूबे के दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री या जब भी कोई बीजेपी का बड़ा नेता राज्य में आता है तो एहतियातन विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया जाता है। इस बार फिर वही कहानी दोहरायी गई। और राजकोट में पाटीदार आंदोलन से लेकर दूसरे विपक्षी संगठनों के लोगों को या तो हिरासत में ले लिया गया या फिर उन्हें उनके घर में ही नजरबंद कर दिया गया।  

पाटीदार नेता वरुण पटेल ने जनचौक को बताया कि मोदी जी जब भी गुजरात के दौरे पर आते हैं उनके कार्यक्रम वाले जिले में पाटीदाल आंदोलन से जुड़े सभी नेताओं को डिटेन कर लिया जाता है। इस बार मोदीजी सौराष्ट्र के दौरे पर आये हैं और वहां से तकरीबन 150 पाटीदार नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। वरुण ने कटाक्ष करते हुए कहा कि “केवल पाटीदारों को डिटेन किया जाता है क्योंकि हमारे बाप-दादा भाजपा को वोट दिया करते थे जिसका हक मोदी जी उनके बेटे-पोतों को गिरफ्तार करवा कर अदा कर रहे हैं”। 

पाटीदार नेता रेशमा पटेल ने बताया कि “गुजरात पुलिस मोबाइल के जरिये हमारे लोगों का लोकेशन ट्रेस कर उनको हिरासत में ले लेती है। जिस भी शहर में मोदी या फिर अमित शाह होते हैं वहां के सारे पाटीदार नेताओं को डिटेन कर लिया जाता है। 

नोटबंदी से देश की जनता पहले से ही बहुत परेशान थी अब जीएसटी लागू होने के बाद उसकी कमर टूट जाएगी। जिसका फिर से उठना शायद ही मुमकिन हो पाए। ऐसे में जब उनके हक और हुकूक के लिए लोग लड़ रहे हैं तो सरकार दमन के जरिये उनका भी मुंह बंद कर देना चाहती है।

दरअसल दिसंबर 2017 में गुजरात विधानसभा का चुनाव है। 22 साल के शासन के बाद सूबे में सत्ता विरोधी रुझान बेहद मजबूत हो गयी है। पाटीदार से लेकर दलित तक हर तबका सड़क पर है। ऐसे में पार्टी के लिए फिर से सत्ता में आना किसी आग के दरिया को पार करने से कम नहीं होगा। उसी को ध्यान में रखते हुए पीएम ने भी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

उन्हें पता है कि अबकी बार उनका चेहरा नहीं चलेगा। लिहाजा उन्होंने सामाजिक समुदायों पर अपने जोर को बढ़ा दिया है। नाराज पाटीदारों को मनाने के मकसद से उन्होंने पार्टी के साथ उनके जुड़ाव का कुछ इस तरीके से हवाला दिया “पाटीदार भाजपा का वोट बैंक हैं। 54 सीटों पर इस समाज का असर है, राज्य के 40 विधायक पाटीदार समाज से हैं और भाजपा के छ सांसद पटेल हैं”।

मोहन भागवत

दूसरी तरफ आरएसएस दलितों को मनाने की जुगत में जुट गया है। उसने दलितों को बीजेपी के पक्ष में लाने का ज़िम्मा अपने ही एक संगठन दलित बौद्ध संघ को दिया है। उसके नेताओं का कहना है कि दलित बौद्ध संघ चुनाव से पहले पूरे राज्य में दलित रथ यात्रा निकालेगा। संगठन इसी तरह के कई दूसरे कार्यक्रम भी आयोजित करेगा। गौरक्षकों के खिलाफ प्रधानमंत्री के बयान को भी इसी कड़ी के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि मोदी जी इसके जरिये दलितों के गुस्से को कुछ कम करना चाहते हैं। 

गौरतलब है कि उनके सत्ता में आने के बाद से गाय के नाम पर अब तक 23 मुसलमानों और 5 हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। 15 साल के जुनैद की हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। उसके बाद नॉट इन माई नेम के नाम से देश में चले अभियान ने प्रधानमंत्री को भी दबाव में लाकर खड़ा कर दिया। जिसका नतीजा उनके साबरमती आश्रम के बयान के तौर पर सामने है। 

 






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