27 अगस्त को "नफ़रत के ख़िलाफ़ दिल्ली की आवाज़"

आंदोलन , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 24-08-2017


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मुकुल सरल

‘Not In My Name’ (मेरे/हमारे नाम पर नहीं) कैंपेन के बाद फिल्मकार सबा दीवान, राहुल रॉय और संजय काक समेत इस अभियान से जुड़े अन्य लोगों ने इस अभियान को और प्रखर बनाने के लिए "नफ़रत के ख़िलाफ़ दिल्ली की आवाज़" अभियान शुरू किया है जो रविवार 27 अगस्त को एक साथ 100 जगह आयोजित करने की योजना है।

नफ़रत के खिलाफ़ अभियान।

इस अभियान से जुड़े संस्कृतिकर्मी संजय जोशी ने बताया कि आइडिया यह है कि लोग अपने-अपने इलाके में शाम के समय 2 से 3 घंटे का कार्यक्रम करें जिसमे गीत, संगीत, कविता, नाटक वगैरह शामिल हो और इस तरह इस अभियान से आम लोगों को जोड़ा जाए और इस मुद्दे पर सबका ध्यान केन्द्रित किया जा सके। 

नफ़रत के खिलाफ़ अभियान।

सफल रहा 'नॉट इन माइ नेम'

नॉट इन माइ नेम हैश टैग से चलाए गए पहले अभियान को भी देशभर में काफी समर्थन मिला था। आयोजकों के मुताबिक ‘Not In My Name’ अभियान देश के छब्बीस शहर-कस्बों तक पहुँच गया है। ख़ामोशी का माहौल टूट चुका है। देश के अनेक नागरिकों ने एकजुट होकर धर्म और जाति के नाम पर फ़ैलाई जा रही नफ़रत और हिंसा को नकारा है, मगर अफ़सोस कि मुसलमानों, दलितों, आदिवासियों और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमले अभी तक भी जारी हैं। प्रधानमंत्री जी बोले लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली। पिछले दिनों में दिल्ली शहर में दो हमले मुसलमानों को लक्ष्य बनाते हुए किए गये।

नफ़रत के खिलाफ़ अभियान।

'नफ़रत और हिंसा हमें मंज़ूर नहीं'

आयोजकों ने कहा कि हम सब जो  ‘Not In My Name’ अभियान से जुड़े हैं अब और भी दृढ़संकल्प हैं कि अब हम ख़ामोश नहीं रह सकते। हम संविधान की रक्षा करेंगे जिसमे सभी भारतीय नागरिकों के अधिकार को सुरक्षित किया गया है और वही दस्तावेज़ अब ख़तरे में है। यह अभियान सभी नागरिकों से आग्रह करता है कि हम एकजुट होकर खड़े रहें जब तक कि हर नागरिक को अमन और सुरक्षा का आश्वासन नहीं हो जाता। इसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए हमारा यह प्रस्ताव है कि 27 अगस्त 2017 के दिन हम एक आवाज़ में कहें के हमें नफ़रत और हिंसा मंज़ूर नहीं! इस आशा के साथ कि देशभर से नागरिक हमारे साथ जुड़ेंगेहमने तय किया है कि दिल्ली में 27 अगस्त के अभियान के अंतर्गत हम 100+ प्रदर्शन, जलसे और अन्य कार्यक्रम आयोजित करेंगे। यह कार्यक्रम दिल्ली के रिहायशी इलाक़ों, सड़कों, मेट्रो स्टेशन और शहर के चौराहों पर आयोजित होगा, हर उस जगह जहाँ लोग हमारे साथ यह बोलने के लिए तैयार हों कि - अब और नहीं! नफ़रत के ख़िलाफ़, दिल्ली की आवाज़!!

नफ़रत के खिलाफ़ अभियान।

आम लोगों का आह्वान

आयोजकों ने कहा कि यह आम नागरिकों का अभियान है, नफ़रत और हिंसा के ख़िलाफ़। इस में सभी आमंत्रित हैं, लेकिन पहले की तरह, बिना दल या संगठन के झंडे या चिह्न के।

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