झारखंड: नक्सल के नाम पर निर्दोषों की हत्याओं के खिलाफ लोग हुए गोलबंद

आंदोलन , , मंगलवार , 27-06-2017


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विशद कुमार

गिरिडीह। झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की कलई धीरे-धीरे खुल रही है। ढोलकट्टा में जिस आदिवासी युवक को पुलिस फर्जी मुठभेड़ में मारा और उसे बड़ा नक्सली नेता बताया, उसकी सच्चाई एक-एक करके बाहर आ रही है। झारखंड की जनता अब रघुबर सरकार से फर्जी पुलिस मुठभेड़ों के नाम पर भोले-भाले आदिवासियों के हत्या की जांच करने की मांग कर रही है। पिछले 21 जून को दमन विरोधी मोर्चा ने नक्सल मुठभेड़ के नाम पर पुलिस गोली के शिकार मोतीलाल बास्के की मौत के विरोध में गिरिडीह के अंबेडकर चैक पर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर से बास्के की मौत की किसी स्वतंत्र एजेंसी से न्यायिक जांच कराने की मांग सहित दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने और मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की।

मोती लाल की हत्या के खिलाफ प्रदर्शन।

नक्सल के नाम पर हो रही हत्याओं से जनता आक्रोशित

प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार को यह संदेश भी दिया कि झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के नाम पर निर्दोष लोगों की पुलिस द्वारा की जा रही हत्याओं पर झारखंड की जनता चुप नहीं बैठ सकती है। जनता का प्रतिरोध तब तक जारी रहेगा जब तक शासन तंत्र व पुलिस नक्सल के नाम पर बेगुनाह लोगों की हत्या करना बंद नहीं करता है।

दमन विरोधी मोर्चा का गठन

पुलिस-प्रशासन के उत्पीड़न और सरकार की चुप्पी को देखते हुए अब राज्य में ‘दमन विरोधी मोर्चा’ सक्रिय हुआ है। मोतीलाल की हत्या से इलाके की जनता में जितना खौफ है उतना ही आक्रोश भी है। मोतीलाल बास्के की पुलिस गोली से हुई मौत को लेकर बने संयुक्त मोर्चा में - मजदूर संगठन समिति, मरांग बुरू सांवता सुसार बैसी, जेवीएम, जेएमएम, भाकपा माले, विस्थापन विरोध जन विकास आंदोलन एवं पीयूसीएल शामिल हैं। इसके पूर्व मोर्चा की पहल पर 17 जून को पूरा मधुबन बंद रहा।

विपक्षी नेता भी हुए सक्रिय

मोतीलाल के परिवार को न्याय दिलाने के लिए विपक्ष भी सक्रिय हो गया है। जिस दिन आम जनता गिरिडीह में विरोध-प्रदर्शन कर रही थी, उसी दिन झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन भी ढोलकट्टा पहुंच कर इस घटना को लोकसभा में उठाने का वायदा किया। जबकि एक दिन पहले झारखंड के पूर्व मंत्री मथुरा महतो मृतक के गांव ढोलकट्टा पहुंचे और लड़ाई में साथ देने का भरोसा दिलाया।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले की सीबीआई जांच की मांग सहित मृतक के परिवार को 15 लाख रुपये और सरकारी नौकरी की मांग की है। वहीं राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मारंडी ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। तो आजसू पार्टी के सुप्रीमो एवं पूर्व मंत्री सुदेश महतो कहते हैं कि जब सरकार व पुलिस पर आरोप है तो मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराया जाना चाहिए।

मोतीलाल के घर झामुमो नेता शिबू सोरेन।

‘मजदूर संगठन समिति’ के महासचिव बच्चा सिंह कहते हैं कि, मृतक मोतीलाल बास्के के नक्सली होने का कोई प्रमाण नहीं है। वह ‘मजदूर संगठन समिति’ का सदस्य होने के साथ-साथ आदिवासियों का सामाजिक संगठन ‘मरांड बुरू सांवता सुसार बैसी’ का भी सदस्य था। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद से अब तक 500 से अधिक नक्सलियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज हुई है जिसमें मोतीलाल बास्के का कहीं भी जिक्र नहीं है, इससे साफ जाहिर होता है कि वह किसी भी सूरत में नक्सली मूवमेंट का हिस्सा नहीं था। वे कहते हैं कि वास्तव में नक्सल के नाम पर रघुवर सरकार आदिवासियों को इसलिए निशाने पर ले रही है ताकि वे डर कर पलायन कर जाएं और अपनी जमीन से बेदखल हो जाएं ताकि कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाया जा सके। 

 मोतीलाल कि हत्या के बाद की घटनाएं

11 जून को ही मजदूर संगठन समिति व मरांङ बुरु सांवता संसार बैसी ने मधुबन के हटिया मैदान में बैठक कर ये घोषित किया था कि मोतीलाल बास्के के फर्जी मुठभेड़ मे हत्या के विरोध में प्रदर्शन किया जाएगा। 

12 जून को भाकपा-माले की एक टीम ने मृतक के परिवार से मुलाकात की थी और 15 जून को पूरे जिला में प्रतिवाद दिवस मनाने की घोषणा भी की थी, साथ ही मोतीलाल बास्के के परिवार को 5 हजार की आर्थिक मदद भी भाकपा-माले की टीम ने दिया था।

13 जून को झामुमो की एक टीम ने मृतक के गांव ढोलकट्टा का दौरा किया और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मृतक की पत्नी की बात कराया, साथ ही इस लड़ाई में साथ देने का भी भरोसा दिलाया।

14 जून को पहापंचायत हुई जिसमें लगभग 5 हजार लोगों ने भाग लिया।

मोतीलाल का शव।

15 जून को झामुमो नेताओं ने मृतक की पत्नी व बच्चों को रांची ले जाकर पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलाया।

16 जून को फर्जी मुठभेड़ के खिलाफ न्याय के लिए ‘‘दमन विरोधी मोर्चा’’ का गठन मजदूर संगठन समिति, मरांङ बुरु सावंता सुसार बैसी, झामुमो, झाविमो, विस्थापन विरोध जन विकास आंदोलन, भाकपा-माले व पीयूसीएल ने मिलकर किया।

16 जून को ही पुलिस मुख्यालय ने इस घटना का सीआईडी जांच का आदेश दिया।

17 जून को दमन विरोधी मोर्चा के नेतृत्व में ऐतिहासिक रूप से मधुबन बंद रहा।

20 जून को झारखंड के पूर्व मंत्री मथुरा महतो मृतक के गांव ढोलकट्टा पहुंचे और लड़ाई में साथ देने का भरोसा दिलाया।

21 जून को पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन भी ढोलकट्टा पहुंचे और इस घटना को लोकसभा में उठाने का वायदा किया।

21 जून को ही गिरिडीह के अंबेडकर चौक पर दमन विरोधी मोर्चा ने धरना दिया और मांगों से संबंधित ज्ञापन डीसी को सौंपा।

मोतीलाल बास्के मूल रूप से झारखंड के धनबाद जिले के तोपचांची प्रखंड के चिरूवाबेड़ा गांव के रहनेवाले था, लेकिन कुछ दिनों से वह अपने ससुराल गिरिडीह जिला के पीरटांड़ प्रखंड के ढोलकट्टा में रह रहा था।






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