सीमा पर युद्ध के हालात के बीच रक्षाकर्मियों के वजूद की जद्दोजहद

आंदोलन , , मंगलवार , 04-07-2017


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प्रदीप सिंह

नई दिल्ली। सरहदों की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात सेना के जवानों की जितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, उतनी ही उल्लेखनीय भूमिका सेना के आयुध फैक्ट्रियों में बनने वाले साजो-सामान और उसे बनाने वाले कर्मचारियों की होती है। भारतीय सेना के लिए हथियाऱ, वाहन, ट्रक, गोला-बारूद और जूते-कपड़े का निर्माण करने वाले रक्षा प्रतिष्ठान के सिविलियन कर्मचारी आंदोलन की राह पर हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर वे दो दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वे आयुध कारखानों के निजीकरण और रक्षा सामानों के आउटसोर्सिंग का विरोध कर रहे हैं। लेकिन रक्षा कर्मचारियों की मांग और उनके भूख हड़ताल की अनुगूंज अभी सत्ता प्रतिष्ठान तक नहीं पहुंची है।

14 अगस्त तक अनशन

3 जुलाई को जंतर-मंतर पर पुणे के खड़की स्थित आयुध फैक्ट्री के 93 कर्मचारी भूख हड़ताल पर बैठे। आज जबलपुर आयुध निर्माण फैक्ट्री के कर्मचारी भूख हड़ताल पर बैंठे हैं। आल इंडिया डिफेंस इंप्लाईज फेडरेशन के अध्यक्ष एसएन पाठक कहते हैं कि यदि हमारी मांग पूरी नहीं की गई तो हम 14 अगस्त तक भूख हड़ताल करेंगे। पूरे देश के सिविलियन रक्षा कर्मचारी एनडीए सरकार की नीतियों से क्षुब्ध हैं। केंद्र सरकार रक्षा क्षेत्र में निजीकरण और आउटसोर्सिंग के फैसले को वापस ले।

यह सब तक हो रहा है जब सिक्किम में भारत-चीन सीमा पर भारी तनाव है। दोनों देशों से जारी बयानबाजी ने मामले को अत्यधिक संवेदनशील बना दिया है। ऐसे समय में हमारे देश के युद्ध के साजो-समान बनाने वाले कर्मचारियों को भूख हड़ताल पर बैठना पड़ा है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे आयुध फेक्ट्रियों के कर्मचारी । फोटो : प्रदीप सिंह

भूख हड़ताल की वजह

आल इंडिया डिफेंस इंप्लाईज फेडरेशन के महासचिव सी श्रीकुमार कहते हैं कि देश भर में  स्थित 41 आयुध फैक्ट्रियों में 88000 कर्मचारी सेना से संबंधित लगभग 200 प्रोडक्ट बनाते हैं। जिसमें लड़ाई के सामान से लेकर सेना के जवानों के लिए वर्दियों से लेकर जूता तक शामिल है। एनडीए सरकार ने करीब 152 समानों को निजी कंपनियों से लेने का फैसला किया है। जिससे लगभग एक लाख कर्मचारियों का भविष्य दांव पर लग गया है।’

पुणे स्थित आयुध फैक्ट्री में काम करने वाले मोहन होला कहते हैं कि "यह सरकार सेना और सीमा की सबसे ज्यादा बात करती है। सैनिकों और रक्षा प्रतिष्ठान के कर्मचारियों को हर सुख सुविधा मुहैया कराने की बात करती है। लेकिन रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश, निजीकरण और आउटसोर्सिंग का एजेंडा लेकर आई है।"

रवीन्द्र रेड्डी कहते हैं कि "जब देश के रक्षा मंत्रालय की फैक्ट्रियों में बनने वाले समानों को लेना बंद कर निजी कंपनियों से सामन लिया जायेगा तो धीरे-धीरे एक-एक कर आयुध कारखानों को बंद कर दिया जाएगा। इससे लाखों कर्मचारियों का परिवार भुखमरी का शिकार होगा। सरकार की मंशा ठीक नहीं है। इसलिए हम लोग भूख हड़ताल पर बैठे हैं।"

आल इंडिया डिफेंस इंप्लाईज फेडरेशन के उपाध्यक्ष हरभजन सिंह संधू कहते हैं कि "सरकार लंबे समय से कर्मचारियों का भत्ता, न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी नहीं की है। इसके साथ ही पेंशन योजना को बंद कर दिया है। हम चाहते हैं कि आयुध फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ाने के साथ ही कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की जाए।"

जेडीयू का समर्थन

जेडीयू नेता और वरिष्ठ सांसद शरद यादव ने धरना स्थल पर पहुंच कर कर्मचारियों की मांग के प्रति समर्थन व्यक्त किया।  रक्षा क्षेत्र में निजीकरण और आउटसोर्सिंग का विरोध करते हुए कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने की मांग की। यादव ने कर्मचारियों के भत्ता वृद्धि न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने और उत्पादन बढ़ाने की मांग के प्रति सहमति जताई।

सीमा पर बढ़ता तनाव

भारत और चीन में सिक्किम से लगी सीमा पर लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। दोनों देशों के बीच हो रही बयानबाजी और तनातनी के बीच कूटनीतिक जंग तेज हो गई है। रक्षा मंत्री अरुण जेटली के बयान पर चीन ने कहा कि वह भी 1962 का चीन नहीं है। इतना ही नहीं चीन ने सिक्किम सीमा से भारतीय सैनिकों को हटाने की मांग की है। चीन के इन तल्ख बयानों के बावजूद भारत ने सिक्किम सीमा पर तैनात अपने सैनिकों को पीछे हटाने का फिलहाल कोई संकेत नहीं दिया है। लेकिन इस बीच हिंद महासागर में चीन के युद्धपोत देखे गए। चीनी विदेश मंत्रालय ने इस जवाबी बयान के जरिये भारत के मुकाबले अपनी बड़ी सामरिक और आर्थिक ताकत होने का संदेश देने की कोशिश की है।चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि डोकलाम क्षेत्र में भारतीय सैनिकों की तैनाती ब्रिटिश काल में 1890 में हुई संधि का उल्लंघन है। बीजिंग के मुताबिक यह इलाका चीन का है और भारतीय सैनिक यहां घुस आए हैं। 

चीन के मुताबिक सिक्किम क्षेत्र में सीमा निर्धारण पूरी तरह स्पष्ट है और भारत की सभी पूर्व की सरकारों ने इस संधि का पालन किया है। चीन ने डोकलाम क्षेत्र में अपने सैनिकों की तैनाती के लिए भूटान की आड़ लेने का भी आरोप लगाया। चीनी विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए वह जरूरी कदम उठाएगा। इन हालातों में रक्षा क्षेत्र के प्रति सरकार सौतेला रवैया किसी अचरज से कम नहीं है।






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