फिलस्तीन पर इजराइली कब्जे के खिलाफ प्रदर्शन

आंदोलन , , रविवार , 25-06-2017


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। यरूशलम सिर्फ़ फ़िलस्तीनियों का नहीं, यह इस्लाम का घर है। यहाँ इस्लाम की तीसरी सबसे पवित्र जगह मस्जिद अलअक़्सा है और हर मुसलमान का ही नहीं, हर मानवतावादी का फ़र्ज़ है कि वह यरूशलम और मस्जिद अलअक़्सा पर फ़िलस्तीनियों की भावनाओं की क़द्र करते हुए इज़राइल को इस बात के लिए मजबूर करे कि वह यरूशलम से अपनी अवैध बस्तियों को हटाए। यह बात भारत में सूफ़ी उलेमा के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा ए इस्लाम के संस्थापक अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कही। वह दिल्ली के शास्त्री पार्क में क़ादरी मस्जिद में शुक्रवार की नमाज़ के बाद ‘अन्तरराष्ट्रीय क़ुद्स दिवस’ पर हज़ारों लोगों की रैली को संबोधित कर रहे थे। तंज़ीम उलामा ए इस्लाम ने भारत में इस मुद्दे पर कई बार बहुत बड़ी रैलियों का आयोजन किया है।

इजराइली कब्जे के खिलाफ प्रदर्शन।

‘बेईमान भ्रष्ट वहाबियों की कारस्तानी’

मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि अमेरिका, नाटो और अरब के भ्रष्ट वहाबी चरित्रहीन तानाशाहों के बल पर इज़राइल फ़िलस्तीन पर ज़ुल्म कर रहा है जिसे भारत के मुसलमान ने ना कभी बर्दाश्त किया था और ना ही कभी करेगा। क़ादरी ने कहाकि यरूशलम पर क़ब्ज़ा करके इज़राइल यह सपना देख रहा है कि वह मस्जिद अलअक़्सा को मिटा देगा लेकिन सिर्फ़ मुसलमान ही नहीं दुनिया का हर दर्दमंद दिल यह समझ रहा है कि साल 1948 से फ़िलस्तीन पर अवैध क़ब्ज़ा करने वाली ज़ियोनवादी इज़राइली बिरादरी ने आम फ़िलस्तीनियों को बहुत सताया है। मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि सऊदी अरब के बेईमान भ्रष्ट वहाबी अलसऊद तानाशाह परिवार और इज़राइल की साँठगाँठ से फ़िलस्तीन को बहुत नुक़सान पहुँचा है और आतंकवाद के प्रसार में दोनों देशों का षड़यंत्र खुल चुका है।

11 हजार बेगुनाहों की रिहाई की मांग 

दरबारे अहले सुन्नत संगठन के पीरसय्यद जावेद अली नक्शबंदी  ने बताया कि इज़राइल यरूशलम पर अपने अनैतिक क़ब्ज़े के क्रम में मस्जिद अलअक़्सा को बर्बाद करने पर तुला हुआ है और यह फ़िलस्तीन ही नहीं बल्कि वैश्विक इस्लामी समाज के इतिहास के लिए तीसरा सबसे महत्वपूर्ण स्थल है। आला हजरत यूथ ब्रिगेड संगठन के मौलाना इफ्तिखार रजवी ने कहाकि ज़ियोनवादी भ्रष्ट इज़राइल ने अपनी जेलों में 11 हज़ार बेगुनाह लोगों को जेलों में बन्द कर रखा है जिसकी फ़ौरन रिहाई होनी चाहिए। उन्होंने कहाकि इन क़ैदियों में 14 साल से छोटे बच्चे, महिलाएँ और बेशुमार वृद्ध फ़िलस्तीनी हैं जिन पर कोई गुनाह साबित नहीं होता। 

इजराइली कब्जे के खिलाफ प्रदर्शन।

भारत हमेशा फिलस्तीनियों के साथ रहा है

दिल्ली वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन चौधरी मतीन ने कहा कि भारत हमेशा से आम फ़िलस्तीनियों के दर्द को आवाज़ देता रहा है और हमारा राजनीतिक स्टैंड यही रहा है कि हमने कभी फ़िलस्तीन की क़ीमत पर इज़राइल को दोस्त नहीं माना। चौधरी ने कहा कि ख़बरें आ रही हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जुलाई में इज़राइल का दौरा कर रहे हैं और इज़राइल के क़रीब आने की चेष्टा कर रहे हैं 

भारत के सबसे बड़े छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन ऑफ़ इंडिया के महासचिव इंजीनियर शुजात अली क़ादरी ने कहाकि ‘अन्तरराष्ट्रीय क़ुद्स दिवस’ की परम्परा ईरान से चली है और हर रमज़ान के अंतिम शुक्रवार को दुनिया भर में इसका आयोजन किया जाता है। अरबी में क़ुद्स शहर यरूशलम का नाम है। क़ुद्स की स्वतंत्रता के रूप में फ़िलस्तीन पर इज़राइली क़ब्ज़े के विरोध का प्रतीक है। क़ुद्स दिवस हमें याद दिलाता है कि हमें आम फ़िलस्तीनियों के दर्द को भूलना नहीं चाहिए। 

देश के दस शहरों में प्रदर्शन

दिल्ली में ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा ए इस्लाम के तत्वावधान में ऐतिहासिक प्रदर्शन के अलावा ख़बर है कि मुम्बई में रज़ा एकेडमी के तत्वावधान में अकेडमी के प्रमुख सईद नूरी की अध्यक्षता में प्रदर्शन हुआ जिसमें कई हज़ार लोगों ने भाग लिया। इसी प्रकार हैदराबाद में ही ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा ए इस्लाम के हुए प्रदर्शन में  हज़ार लोग शरीक़ हुए। जयपुर में तंजीमऔरअंजुमन फैजाने गरीब नवाज़ के तत्वावधान में सैयद मुहम्मद क़ादरी की अध्यक्षता में सांगानेर में ज़ोरदार प्रदर्शन हुआ जिसमें दो हज़ार लोगों ने भाग लिया। कोलकाता में मौलानाहसन रजवी की अध्यक्षता में  में प्रदर्शन हुआ जिसमें ख़बर है कि एक हज़ार लोग शरीक़ हुए। इसी तरह राजस्थान के उदयपुर में हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया। उत्तर प्रदेश के शहर संभल, राजस्थान के डीडवाना मेंभी ‘अन्तरराष्ट्रीय क़ुद्स दिवस’ पर प्रदर्शन किए जाने के समाचार हैं।






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