राजस्थान : किसानों की ज़िंदगी दांव पर, खुद को गर्दन तक मिट्टी में दबाया

आंदोलन , नींदड़/जयपुर, मंगलवार , 10-10-2017


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जितेंद्र चाहर

नींदड़ (जयपुर)। राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित विधानसभा से कोई बीस किलोमीटर दूर नींदड़ गाँव के किसान पिछले 9 दिनों से जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। ज़मीन समाधि सत्याग्रह कर रहे किसानों ने अपने शरीर को गर्दन तक मिट्टी से दबा लिया है। तीन दिन से क्रमिक अनशन कर रहे किसानों ने इस तपती धूप में जमीन को बचाने के लिए अपनी जिंदगी को दांव पर लगा रखा है, लेकिन सरकार ने अभी तक किसानों की कोई सुध नहीं ली है।

जयपुर के नजदीक नींदड़ में किसानों की ज़मीन समाधि सत्याग्रह जारी है।

2 अक्टूबर से चल रहा है ज़मीन समाधि सत्याग्रह

जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) द्वारा नींदड़ आवासीय योजना के लिए किसानों की उपजाऊ जमीन पर जबरन कब्जा किया जा रहा था जिसके विरोध में किसानों ने 2 अक्टूबर से भूमि समाधि सत्याग्रह शुरू कर दिया। 5 अक्टूबर को जेडीए कमिश्नर वैभव गालरिया के साथ काश्तकारों की चौथे दौर की वार्ता में पांच बिन्दुओं सर्वे के लिए समन्वय समिति गठित हो। समिति में जेडीए अफसर, जनप्रतिनिधि व संघर्ष समिति में प्रतिनिधि शामिल हों। एक ढाणी व कॉलोनी का दुबारा सर्वे हो। परिवार की न्यूनतम आवश्यकता रिपोर्ट बनाई जाए। मकान की स्थिति व नुकसान की रिपोर्ट तैयार हो। योजना से प्रभावितों की आर्थिक स्थिति का आकलन तथा अवाप्ति से उनके जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन हो पर सहमति बन गई।

6 अक्टूबर को जेडीए कमिश्नर वैभव गालरिया जयपुर से बाहर चले गये उनकी अनुपस्थिति में काम संभाल रहे जेडीए के जोन डिप्टी कमिश्नर राजकुमार सिंह ने किसानों को जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में वार्ता के लिए फिर से आमंत्रित किया तो किसानों ने यह कहते हुए मना कर दिया की जब दुबारा से सर्वे पर सहमति बन गई है तो दुबारा वार्ता का क्या मतलब है? 7 और 8 अक्टूबर को शनिवार-रविवार की छुट्टी मना रहे प्रशासन को किसानों की याद नहीं आयी।

वार्ता के नाम पर मज़ाक!

सोमवार, 9 अक्टूबर को जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में फिर से वार्ता हुई जिसमे जेडीए ने किसानों की दुबारा सर्वे की मांग को तो माना परंतु एक शर्त जोड़ दी कि सर्वे के साथ जेडीए को नींदड़ आवासीय योजना में मंदिरमाफ़ी और सार्वजनिक जमीन पर कब्ज़ा कर लेने दिया जाए। नींदड़ बचाओ युवा किसान संघर्ष समिति ने जेडीए की इस शर्त को मानने से इंकार कर दिया है। किसानों का कहना है कि जेडीए जमीन पर किसी भी बहाने से काबिज होना चाहता है इसीलिए वार्ता के नाम पर किसानों के साथ हर दिन मज़ाक किया जा रहा है।

किसानों ने समाधि सत्याग्रह में ही मनाया करवाचौथ।

समाधि सत्याग्रह में ही मनाया करवाचौथ

समाधि सत्याग्रह कर रहे किसानों का हौसला कहीं से कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सत्याग्रह में क्रमिक अनशन रहे किसानों की पत्नियों ने धरना स्थल पर ही 8 अक्टूबर को चांद को देखा और करवाचौथ का उपवास तोड़ा। अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व विधायक पेमाराम, सचिन पायलट ने भी धरना स्थल पर जाकर किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया है

क्रमिक अनशन भी शुरू

बहरहाल, 23 दिन से नींदड़ बचाओ युवा किसान संघर्ष समिति आंदोलन में डटी है, अब भी सरकार और किसान अपनी-अपनी बात पर अड़े हैं। किसानों की मांगों के सामने नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने हाथ खड़े कर दिए हैं। उन्होंने जेडीसी के कंधों पर बंदूक रख दी है। इधर, जमीन समाधि सत्याग्रह में क्रमिक अनशन शुरू हो गया है। सत्याग्रही कहते हैं, हमारी मांगें नहीं मानी जाती तो यहीं खुद पर मिट्टी डाल समाधि ले लेंगे। देखते हैं, अब इस समस्या का क्या हल निकलता है? 

(लेखक जितेंद्र चाहर जन संघर्षों पर रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट www.sangharshsamvad.org के मॉडरेटर हैं।)

 






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