आरक्षण में कटौती के खिलाफ और व्यापक होगा आंदोलन

आंदोलन , वाराणसी, सोमवार , 07-08-2017


reservation-seminar-varanasi-movement-sc-st-obc

जनचौक ब्यूरो

वाराणसी। उत्तर प्रदेश में आरक्षण का मसला एक बार फिर गर्म हो रहा है। सरकार कई संस्थानों में ऐसे तरीके अपना रही है जिससे दलित और पिछड़े तबके के आवेदक आरक्षण का फायदा लेने से वंचित हो जाएं। इसको लेकर समाज के वंचित तबकों में तीखा आक्रोश है। और उसके खिलाफ अब गोलबंदी भी होनी शुरू हो गयी है। इसी कड़ी में वाराणसी में एक परिचर्चा का आयोजन हुआ। जिसमें वक्ताओं ने इसे सामाजिक न्याय पर कुठाराघात करार दिया। उनका कहना था कि योगी सरकार के मंसूबे बेहद खतरनाक हैं। और उसका अगर यही रवैया बना रहा तो सूबे के दलित और पिछड़े छात्र सड़क पर निकल कर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

इस आयोजन में शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में वंचित तबकों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की गारंटी की मांग की गयी। परिचर्चा का विषय था `कैसे हल हो प्रतिनिधित्व का प्रश्न’| कार्यक्रम `एससी/एसटी/ओबीसी संघर्ष समिति’ के बैनर के तले आयोजित किया गया था। लंका स्थित स्वयंवर वाटिका में छात्र और नागरिक आन्दोलनों की आगे दिशा तय करने की रणनीति बनायी गयी।

वाराणसी में गोष्ठी।

परिचर्चा की शुरूआत करते हुए बीएचयू के पूर्व छात्रनेता सुनील यादव ने कहा कि बीएचयू और काशी विद्यापीठ के बाद अब शहर के दूसरे कैम्पसों में भी आंदोलनात्मक पहलकदमियां ली जाएंगी| सुनील यादव ने कहा कि `राष्ट्रवाद’ और `सबका साथ-सबका विकास’ का मोदी जी का नारा भी जुमला ही है; अन्यथा यह कैसे हो जाता कि राष्ट्र की बहुसंख्यक एस.सी./एस.टी./ओबीसी आबादी के आरक्षण के अधिकार को निष्प्रभावी करने के सवाल पर आरएसएस और सरकार दोनों ही चुप्पी साधे रहते!  

परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के प्रोफ़ेसर एम.पी. अहिरवार ने रोस्टर पद्धति से होने वाली नियुक्तियों की असलियत बताते हुए कहा कि दरअसल यह बहुजन समाज के लोगों को नौकरी पाने से रोकने का नया हथकंडा है। प्रोफ़ेसर एम.पी. अहिरवार ने कहा कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में वंचित तबकों का प्रतिनिधित्व के लिए जरूरी है कि रोस्टर पद्धति को ख़त्म करके बैकलाग भरने सहित सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में अन्य जरूरी कदम उठाये जाएं। 

वाराणसी में गोष्ठी।

परिचर्चा को सम्बोधित करते हुए जिला पंचायत सदस्य योगीराज सिंह पटेल ने कहा कि सामाजिक न्याय के आन्दोलन को ग्रामीण क्षेत्रों में भी ले जाने की जरूरत है। परिचर्चा को शिक्षक नेता अरविन्द सिंह पटेल, लालबहादुर, राजेश यादव, जीपी यादव, डाक्टर ब्रजेश, वीके सहगल, सन्दीप कुमार गौतम सहित अन्य कई वक्ताओं ने संबोधित किया।

दरअसल आरएसएस का सरकार पर आरक्षण खत्म करने का दबाव है। इस काम को सीधे तरीके से न कर पाने की स्थिति में सरकार ने अब नये-नये रास्ते खोजने शुरू कर दिए हैं। अनायास नहीं कुछ दिनों पहले बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा था कि आरक्षण को खत्म भले न किया जा सके लेकिन उसे अप्रासंगिक जरूर बनाया जा सकता है। और इसकी कई तरकीबें उनके पास हैं। आरएसएस-बीजेपी लगता है अब उसी रास्ते पर चल पड़े हैं।

 






Leave your comment