ऑस्ट्रेलिया ने कहा ‘स्टॉप अडानी’ : जल-जंगल-ज़मीन बचाने की लड़ाई यहां भी, वहां भी

आंदोलन , त्वरित टिप्पणी, रविवार , 08-10-2017


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जितेंद्र चाहर

कारपोरेट हितों के लिए आदिवासियोंग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों की ज़िन्दगियों से खिलवाड़ का दौर भारत में ही नहींपूरी दुनिया में जारी है और शोषक जमात के तार राष्ट्रीय सीमाओं के पार जाकर एक-दूसरे से जुड़ते हैं। पढ़िए पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र चाहर की त्वरित टिप्पणी

ऑस्ट्रेलिया में अडानी की कोयला खदान के खिलाफ प्रदर्शन। फोटो साभार : गूगल

'अडानी गो होम'

ऑस्ट्रेलिया में 7 अक्टूबर 2017 को अडानी की कोल खनन परियोजना के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन आयोजित किए गये हैं। ऑस्ट्रेलिया के स्थनीय नागरिकों ने  'स्टॉप अडानीआंदोलन के नेतृत्व में 45 जगहों पर विरोध-प्रदर्शन किये हैं। सिडनी के बोंडी बीच पर 1000 से अधिक लोगों ने 'स्टॉप अडानीका संकेत बनाया। कई लोगों ने अडानी गो होम की तख्तियां भी ले रखीं थी।

अस्तित्व की लड़ाई

वहां के लोग अपने जलजंगल ,जमीनजीव जंतु और प्रकृति बचाने के लिए संघर्षरत हैं। कारपोरेट हितों के लिए आदिवासियोंग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों की ज़िन्दगियों से खिलवाड़ का दौर भारत में ही नहींपूरी दुनिया में जारी है और शोषक जमात के तार राष्ट्रीय सीमाओं के पार जाकर एक-दूसरे से जुड़ते हैं। जहां भारत के जंगलोंखेतों और खदानों को विदेशी कार्पोरेट के मुनाफे की चारागाह में बदल दिया गया है वहीं भारत के नए-पुराने थैलीशाह भी अफ्रीका से लेकर आस्ट्रेलिया तक इसी तरह की लूट में अपना टुकड़ा ढूंढ रहे हैं।

खदान से बड़ा ख़तरा

मोदी के चहेते अडानी ने आस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में कोयले की जिस खदान के लिए ठेका पाया हैवह वहां के स्थानीय वांगन और जगालिंगौ मूलनिवासियों की ज़मीनपर्यावरण और ज़िंदगी और तहस-नहस कर देने वाला है। साथ हीदुनिया के दुर्लभ आकर्षणों ग्रेट बैरियर रीफ' -सदियों तक जीवाश्मों और मूँगे के इकट्ठा होने से निर्मित होने वाली नाज़ुक समुद्रतटीय बनावट - को भी खतरा पहुंचने वाला है।

ऑस्ट्रेलिया में अडानी की कोयला खदान के खिलाफ प्रदर्शन। फोटो साभार : गूगल

शासकवर्ग का खेल!

आस्ट्रेलिया के शासकवर्ग - डेढ़ से दो सौ साल पहले यूरोप से आए श्वेत लोगों - ने पुराने कबीलों के साथ न सिर्फ अतीत में बर्बर व्यवहार किया बल्कि अब लोकतंत्र और घोषित बराबरी के बावजूद उनको हाशिये पर धकेले हुए हैं। इसीलिए उनकी ज़िंदगी और प्राकृतिक सम्पदा का सौदा अडानी के साथ करने में उनको कोई हिचक नहीं हुई।

खुला भ्रष्टाचार!

इस मुद्दे से जुड़ी यह बात भी अहम है कि लगभग सभी अंतर्राष्ट्रीय बैंकों द्वारा इस प्रोजेक्ट के लिए अडानी को उधार देने से मना करने पर नरेंद्र मोदी ने भारतीय नागरिकों का पैसा इस परियोजना के लिए सस्ते दर पर उपलब्ध कराया है। अडानी को यह सुविधा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सस्ते लोन के माध्यम से दी जा रही है। यह खुला भ्रष्टाचार है।

 






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SUSHI JAMUDA :: - 10-10-2017
Keep it up.

SUSHI JAMUDA :: - 10-10-2017

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