सूरत में हड़ताल: पुलिस दमन भी नहीं तोड़ सका कपड़ा व्यापारियों का मनोबल

आंदोलन , , बुधवार , 05-07-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद/सूरत। 70 वर्षों से कपड़ा उद्योग कर मुक्त था। लेकिन 3 जून को जीएसटी कौंसिल की 17 वीं मीटिंग में मोदी सरकार ने इस उद्योग को भी कर के दायरे में ला दिया। इसको लेकर देश कपड़ा व्यवसायी नाराज हैं। इसका सबसे ज्यादा असर टेक्सटाइल का मक्का समझे जाने वाले सूरत पर पड़ा। वहां के व्यापारी फैसले के खिलाफ हड़ताल पर चले गए हैं। हालांकि स्थानीय सांसद ने जब जबरन हड़ताल तुड़वाने की कोशिश की तो व्यापारियों ने उसका विरोध किया। जिसका खामियाजा उन्हें पुलिस की लाठी खाकर भुगतना पड़ा। 

सूरत में कपड़ा व्यापारियों की सभा।

नाकाम हो गयी बीजेपी नेताओं की अपील 

भाजपा के बड़े नेताओं द्वारा अपील की गई थी कि सूरत के कपड़ा व्यापारी सोमवार को टेक्सटाइल संघर्ष समिति द्वारा कॉल की गई  अनिश्चितकालीन हड़ताल छोड़कर अंपनी दुकानें खोल दें। लेकिन व्यपारियों ने बाज़ार में अपनी दुकानें खोलने की जगह विरोध-प्रदर्शन में शामिल हो गए। वो जब मोदी हाय-हाय और जेटली हाय-हाय के नारे लगा रहे थे तो भाजपा सांसद सीआर पाटिल ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर दुकानों को जबरन खुलवाने की कोशिश शुरू कर दी। जिसका व्यापारियों ने जमकर विरोध किया। व्यापारियों के विरोध से निपटने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। जिसमें कई व्यापारी गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस लाठीचार्ज में फेडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अवतार सिंह को भी चोटें आई हैं। 

सूरत व्यपार मंडल के अध्यक्ष जयलाल लालवानी ने जनचौक को बताया कि भारत में कपड़ा उद्योग में तकरीबन 3 करोड़ व्यपारी हैं जिसमें 95 फीसदी छोटे व्यापारी हैं। जो 10/10 की दुकान में अपना कारोबार करते हैं। गांव में एक व्यापारी एक ही दुकान में कपड़ा भी बेचता है और बर्तन एवं अन्य सामान भी रखता है। ऐसे में मोदी सरकार यह उम्मीद करती है कि यह छोटा दुकानदार जीएसटी नंबर लेकर हर महीने सरकार को धंधे का हिसाब दे। और उसके लिए 10 हजार रुपये की पगार पर अकाउंटेंट रखे। सरकार के पास कोई इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है गांव तो गांव आलम ये है कि राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक में भी नेट बराबर काम नहीं करता। ऐसे में गांव से ऑनलाइन जीएसटी का रिटर्न कैसे भरा जाएगा। ये न सरकार समझ रही और न ही समझने के लिए तैयार दिख रही है। 

जीएसटी पर संसद सत्र का नजारा।

सही नहीं मानते जीएसटी को

व्यापारियों का मानना है कि मोदी राज के इस कदम से इंस्पेक्टर राज और भ्रष्टाचार को और बढ़ावा मिलेगा। इससे सरकार की तिजोरी में कोई ख़ास इजाफा नहीं होने वाला है। नये नियमों के मुताबिक व्यापारियों को तीन-तीन कमिश्नरों को जवाब देना पड़ेगा। सच्चाई ये है कि कमिश्नर तीन मिनट के काम के लिए व्यापारी को तीन घंटे बैठाते हैं। इसके हिसाब से सालाना 2.5 लाख कमाने वाले व्यपारी को 1.5 लाख कर के तौर पर दे देने होंगे। ऐसे में उसके पास क्या बचेगा उसको आसानी से समझा जा सकता है। सच ये है क 95 फीसदी छोटे व्यापार बंद हो जाएंगे। जिससे इस फैसले से बेरोज़गारी का बढ़ना तय है। 

एक दूसरे व्यापारी नेता ने बताया कि व्यापारियों का यह आन्दोलन व्यपारी खुद चला रहे हैं। इसमें तकरीबन 99 फीसदी ऐसे हैं जो बीजेपी को वोट देते रहे हैं। लेकिन सूरत के ये व्यापारी अब अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। उनका कहना था कि जब तक मोदी सरकार अपने इस फैसले को वापस नहीं लेती व्यापारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। व्यापारियों ने सोमवार के बीजेपी नेताओं और पुलिस के रवैये पर कड़ी आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को ये नहीं भूलना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। 

व्यापारियों ने मोदी को चेताया

व्यापारियों के एक उम्रदराज नेता ने मोदी सरकार को गुजरात नवनिर्माण आन्दोलन से सीख लेने की सलाह दी। उनका कहना था कि 1974 में गुजरात यूनिवर्सिटी के मेस की फीस 125 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दी गयी थी। जिसके खिलाफ छात्रों ने उग्र आन्दोलन किया। लेकिन प्रशासन ने महंगाई का हवाला देकर फीस कम करने से इंकार कर दिया। धीरे-धीरे यही आन्दोलन राष्ट्रीय स्तर पर पहुच गया। जिसका बाद में जेपी ने नेतृत्व किया। आखिर में आंदोलनकारियों ने इंदिरा गांधी जैसी शक्तिशाली नेत्री को सत्ता से उखाड़ फेंका। व्यापारियों का आन्दोलन भी इसी दिशा में जा रहा है। समय रहते मोदी सरकार होश में नहीं आई तो देश का वातावरण 1974 जैसा ही हो जाएगा। और फिर मोदी सरकार का पूर्ण बहुमत धरा का धरा रह जाएगा।

अरुण जेटली

कुछ व्यापारी बातचीत के पक्ष में 

साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर एसोसिएशन के अध्यक्ष जीतू वाखरिया ने पुलिस द्वारा की गई लाठीचार्ज की निंदा की लेकिन साथ ही वो हड़ताल से सहमत नहीं थे। वाखरिया का कहना था कि बातचीत ही एकमात्र विकल्प है। उनका कहना है कि व्यापारी अभी जीएसटी को ठीक से समझ नहीं पाए हैं। रविवार को सीआर पाटिल के साथ मीटिंग के बाद अधिकतर व्यापारी दुकानें खोलने को तैयार हो गए थे। लेकिन कुछ लोग और पुलिस के कारण अगले दिन दुकानें नहीं खुल पाईं। टेक्सटाइल से जुड़ी दूसरी सेवाएं मसलन एम्ब्रोडरी, छपाई इत्यादि पर 18 फीसदी जीएसटी था। उनका कहना था कि उन लोगों ने 8-9 जून को वित्तमंत्री जेतली से मीटिंग की थी। जिसके बाद 13 जून को ही सरकार ने सर्विस पर 5 फीसदी जीएसटी कम कर दिया। इसी प्रकार से बातचीत द्वारा मामले का हल निकला जा सकता है। अनिश्चितकालीन हड़ताल इसका कोई हल नहीं है।






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