बहरी सरकार को सुनाने के लिए मौत की शर्त भी छोटी

आंदोलन , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 20-07-2017


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। नई दिल्ली में अपने 40 दिनों के आंदोलन के दौरान अलग-अलग तरीके से लोगों का ध्यान आकर्षित करने में कामयाब रहने वाले तमिलनाडु के किसान एक बार फिर जंतर-मंतर पर लौट आए हैं। तकरीबन 100 की तादाद में पहुंचे इन किसानों ने पहले ही दिन प्रधानमंत्री निवास के सामने प्रदर्शन किया जहां से पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। फिर बाद में संसद मार्ग थाने में लाने के बाद उन्हें छोड़ दिया।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते किसान।

फिर लौट आए किसान

ये सभी किसान अपने साथ उन मृत किसानों की खोपड़ियां और हाथ भी रखे हैं। जिन्होंने किसी न किसी संकट के चलते किसी दौर में आत्महत्या कर ली थी। पिछली बार अप्रैल महीने में 40 दिनों के आंदोलन के बाद सूबे के मुख्यमंत्री पलानीसामी के मांगे पूरी करने के आश्वासन के बाद इन लोगों ने आंदोलन स्थगति कर दिया था। और इस चेतावनी के साथ दिल्ली से गये थे कि अगर सरकार उनकी मांगें नहीं पूरी करती है तो वो फिर लौटकर राजधानी में आंदोलन करेंगे। लेकिन किसानों का आंदोलन खत्म करने के बाद सरकार अपने वादों को भूल गयी। और जब मद्रास हाईकोर्ट ने सभी किसानों के ऋण माफी का आदेश जारी किया तो उसे लागू करने की जगह उल्टे उसके फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी। जिसकी अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। सूबे की सरकार के इस रवैये से किसान और भड़क गए हैं।

‘केंद्र और राज्य सरकार धोखेबाज’

किसानों ने मीडिया को बताया कि उन्होंने राजधानी दिल्ली में एक बार फिर से इसलिए विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है क्योंकि केंद्र और राज्य सरकार ने उनके साथ धोखा किया है। दोनों सरकारों ने कहा था कि बैंक उनके जेवर और दूसरी संपत्तियों को नहीं बेचेंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बैंकों ने न केवल उनके जेवर बेचने शुरू कर दिए हैं बल्कि वो अब उनकी जमीनें बेचने की योजना पर काम कर रहे हैं। 

25 लाख के कर्जे के बोझ के नीचे दबे किसान जॉन मिल्क्यराज ने कहा कि “ हम क्या करें? हम इस तरह से जिंदा नहीं रह सकते हैं। हम तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीसामी और दूसरों के आश्वासन पर लौट गए थे। शायद अब हमारी मौत ही इन लोगों को कुछ कार्यवाही करने के लिए मजबूर करे।”

इस बीच तमिलनाडु में विधायकों ने अपनी सैलरी में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी है। विधायकों और नेताओं के इस रवैये ने किसानों का गुस्सा और बढ़ा दिया है। किसानों के नेता ऐय्यकन्नु ने कहा कि “तमिलनाडु के किसान सूखा जैसी स्थिति होने के कारण मर रहे हैं और हमारे विधायक किसानों के मुद्दे पर काम करने की बजाए अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग लिए बैठे हैं”।

प्रतीकात्मक फोटो।

सूखे ने तोड़ा रिकॉर्ड

आपको बता दें कि तमिलनाडु में सूखे ने पिछले 140 सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है। जिसके चलते किसानों के फसलों की किसी तरह की पैदाइश की बात तो दूर अब उनके लिए अपने पशुओं को जिंदा रखना भी मुश्किल हो रहा है। ऊपर से बैंकों और दूसरी संस्थाओं के कर्जों के बोझ ने उनकी कमर तोड़ दी है। और उनकी वसूली के लिए बैंक घटिया से घटिया तरीका भी आजमाने से परहेज नहीं कर रहे हैं। एक मृत किसान की पत्नी रानी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि पति को बैंक अधिकारियों ने इतना अपमानित किया कि उन्होंने आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि "बैंक के अधिकारियों ने मेरे पति से पूछा कि तुम बैंक का लोन नहीं चुका पा रहे हो तो अपनी पत्नी के कपड़े कैसे ख़रीद रहे हो। क्यों हमेशा ग़रीब को ही अपमानित होना पड़ता है? और, उन अमीर लोगों का क्या जो करोड़ों रुपये लेकर देश से भाग जाते हैं?"

किसान अपने लिए 40 हजार करोड़ रुपये की सहायता पैकेज का मांग कर रहे हैं। इसके इलावा उनके ऋण की माफी और तमिलनाडु में कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड की स्थापना उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। इसके साथ ही वो चाहते हैं कि किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम मिले।

किसान मुक्ति संसद में किसान नेता।

दूसरे किसानों के साथ एकजुटता

इन लोगों ने एक बार फिर विरोध के अपने अलग-अलग तरीकों का प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 18 जुलाई को उन्होंने जंतर-मंतर पर हल चला कर अपना विरोध दर्ज किया। उसके बाद 19 जुलाई को बताया जा रहा है कि उन्होंने एक बार फिर खुद को निर्वस्त्र करने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने हस्तक्षेप कर उन्हें मना लिया। 18-19 जुलाई को किसान मुक्ति संसद में इन लोगों ने देश के अलग-अलग हिस्सों से आये किसानों के साथ एकजुटता जाहिर करने के साथ ही उनके सामने अपनी समस्याएं भी रखीं। साथ ही इस बात का संकल्प भी जाहिर किया कि बगैर अपनी मांगे पूरी कराए वो जंतर-मंतर से नहीं हटेंगे। नदियों के आपस में जोड़ने वाले किसानों के संगठन के अध्यक्ष और इस समूह के नेता पी ऐय्यकन्नु ने कहा कि “इस बार हम इस जगह को नहीं छोड़ेंगे जब तक कि हमें कुछ ठोस नहीं मिल जाता। हम वापस नहीं जा सकते हैं। वहां वापस जाने के लिए कुछ बचा भी नहीं है।”

इस बीच उनसे लोगों के मिलने और उनकी मांगों को समर्थन देने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। इस कड़ी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणि शंकर अय्यर ने तमिलनाडु के इन किसानों से मुलाकात कर उनके साथ अपनी एकजुटता जाहिर की। अय्यर ने कहा कि “ये गरीब लोग दिल्ली से चेन्नई के बीच चक्कर काट रहे हैं लेकिन इनके सवालों का कोई जवाब नहीं दे रहा है इसलिए ये लोग एक बार फिर यहां पहुंच गए हैं।”

 






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