भगत सिंह के रास्ते से ही आएगा जनता का शासन: वरवर राव

विशेष , गिरिडीह, सोमवार , 21-08-2017


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विशद कुमार

क्रान्तिकारी कवि, लेखक, पूर्व शिक्षक, क्रान्तिकारी लेखक संघ के संस्थापक एवं आरडीएफ के अध्यक्ष 76 वर्षीय कामरेड वरवर राव का साक्षात्कार: 

नक्सलबाड़ी आंदोलन की 50वीं वर्षगांठ पर झारखंड के गिरिडीह में आयोजित समारोह में शिरकत करने आए कामरेड वरवर राव ने एक साक्षात्कार में साफ कहा कि दुनिया के आंदोलन के इतिहास में नक्सलबाड़ी आंदोलन का इतिहास सबसे लंबा रहा है। भारत में तेलंगाना का आंदोलन भी 1946 से 1951 तक मात्र पांच साल ही टिक पाया था। जिसका कारण यह भी था कि वह मात्र दो जिलों तक ही सिमट कर रह गया था। जबकि नक्सलबाड़ी आंदोलन आज 50वें वर्ष में प्रवेश कर गया और यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा जब तक जनता का शासन पूरे देश पर कायम नहीं हो जाता। एक सवाल के जवाब में कॉ. राव ने कहा कि हम सरकार बनाने का सपना नहीं देख रहे हैं बल्कि आदिवासी, दलित, शोषित, पीड़ित एवं मध्यम वर्ग के किसानों के हक अधिकार के लिए आंदोलित हैं।

वरवर राव को सुनती जनता।

वरवर राव ने बताया कि ग्राम राज्य की सरकार का हमने सारंडा, जंगल महल, नार्थ तेलंगाना और ओडीसा के नारायण पटना में गठन कर दिया है। दण्डकारण्य में जनताना सरकार पिछले 12 वर्षों से काम कर रही है। जहां एक करोड़ लोग रह रहे हैं। जिनके समर्थन से पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी बना है। कॉ. राव बताते हैं कि जनताना सरकार आदिवासियों, दलितों, छोटे व मझोले किसानों का मोर्चा है और इस सरकार ने वहां बसने वाले सभी परिवारों को बराबर-बराबर जमीन बांट दी है। जिसका नतीजा यह है कि जो आदिवासी कभी खेती के बारे जानता तक नहीं था वह अब तरह-तरह की सब्जियां व अनाज की उपज कर रहा है। इन किसानों द्वारा मोबाइल स्कूल, मोबाइल हॉस्पिटल चलाया जा रहा है। जनताना सरकार की क्रांतिकारी महिला संगठन में एक लाख से अधिक सदस्य हैं, सांस्कृतिक टीम चेतना नाट्य मंच में 10 हजार सदस्य हैं, जो एक मिसाल है, क्योंकि किसी भी बाहरी महिला संगठन एवं सांस्कृतिक टीम में इतनी बड़ी संख्या में सदस्य नहीं हैं। वहां अंग्रेजों से लड़ने वाले क्रांतिकारी गुण्डादर के नाम पर पीपुल्स मिलिशिया (जन सेना) है। जनताना सरकार माओत्से तुंग के तीन मैजिक वीपन्स — पार्टी, यूनाइटेड फ्रंट और सेना की तर्ज पर चल रही है। 

कॉ. राव स्पष्ट कहते हैं कि माओवादी आंदोलन ही क्रांति ला सकता है। 

 माओवादी आंदोलन में वाम जनवादी भागीदारी के सवाल पर कॉ. राव कहते हैं कि वे लोग जो सत्ता से दूर हैं उनके साथ हम फ्रंट बना सकते हैं, जैसे हमने आंध्रा व तेलंगाना में तेलंगाना डेमोक्रेटिक फोरम में सीपीआई, सीपीएम, एमएल के अलग अलग ग्रुप सहित आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक, छात्र आदि के 10 संगठन शामिल किया है। 

समाजवाद के सवाल पर वरवर राव कहते हैं कि दुनिया में कहीं भी समाजवाद नहीं है। रूस व चीन साम्राज्यवादी देश बन गए हैं, नेपाल से आशा थी वह भी समाप्त हो गया है, वह भी भारत का उपनिवेश बन गया है। भारत का अमेरिका के साथ गठबंधन यहां के आदिवासियों व दलितों के लिए काफी खतरनाक है। अमेरिका की नजर हमारे जंगल, पहाड़ व जमीन पर है, जहां काफी प्राकृतिक संपदाएं हैं। जिसे लूटने की तैयारी में अमेरिका मोदी सरकार को हथियार और जहाज दे रहा है जिससे आसमान से जंगलों को निशाना बनाकर वहां से आदिवासियों को भगाया जा सके और उस पर कब्जा करके मल्टीनेशनल कंपनियों को दिया जा सके। यह काम मोदी सरकार नक्सल सफाया के नाम पर कर रही है। 

मंच पर बैठे वरवर राव व अन्य नेतागण।

वे कहते हैं मेरा मानना है कि ऐसी स्थिति में नवजनवाद केवल नक्सल आंदोलन से ही आ सकता है, जो सशस्त्र संघर्ष से ही संभव है। 

आजादी के 71 वर्षों बाद भी देश की दुर्दशा पर वरवर राव कहते हैं कि जिस देश में बच्चों के लिये आक्सीजन नहीं हो जो प्राकृतिक है। मॉ के पेट में बच्चों का पूर्ण विकास होता है और उनके विकास के लिये सारी मौलिक चीजें मॉ के पेट में मिलती हैं। जबकि बाहर आने पर आक्सीजन के बिना वे मर जा रहे हैं। का. राव कहते हैं बड़ा अजीब कॉम्बिनेशन है कि 71 साल 72 बच्चे और झारखण्ड में 74 इंडस्ट्रीज को जमीन आवन्टित करने की बात हो रही है। मल्टीनेशनल कम्पनियां या कॉरपोरेट कम्पनियां पूरी तरह हाई टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं। जिससे श्रम बेकार पड़ जायेगा। मतलब की श्रमिक वर्ग की रोटी का जुगाड़ समाप्त हो जायेगा। यह कौन सा विकास है। मोदी सरकार को निशाना बनाते हुए वरवर राव कहते हैं कि गौ हत्या, बीफ, देशभक्ति का नाटक करके ये लोगों को आपस में लड़वाने का काम कर रहे हैं। एक सवाल के जवाब में का. राव कहते हैं कि 4000 लोगों की हत्या करवाने वाला कथित लोकतंत्र के संसदीय रास्ते के कारण ही आज देश का प्रधानमंत्री बना हुआ है। इतिहास गवाह है कि इन्दिरा की हत्या के बाद 3 से 4 हजार सिखों की हत्या का ईनाम राजीव गांधी को प्रधानमंत्री रूप में मिला। यह इसी लोकतंत्र की संसदीय प्रणाली की देन है। फिर हम ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था की संसदीय प्रणाली पर कैसे भरोसा करें। 

अंत में वे कहते हैं कि हमें भगत सिंह की विरासत के रास्ते पर चलना होगा तभी देश में जनता का शासन सम्भव है। 

(विशद कुमार स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल बोकारो में रहते हैं।)






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