महिलाओं ने संभाल ली है भीम आर्मी की कमान

आंदोलन , , शनिवार , 17-06-2017


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वीना

द ग्रेट चमार के रौब से ठाकुरों को तिलमिलाने पर मजबूर करने वाले चंद्रशेखर आज़ाद (रावण) की गिरफ्तारी के बाद बेटे की जिम्मेदारी मां ने अपने कंधों पर ले ली है। 18 जून 2017 सुबह 10 बजे चंद्रशेखर की मां जंतर-मंतर पहुंच रही हैं। केवल चंद्रशेखर की मां ही नहीं सहारनपुर की दलित मांओं-बहनों का गुस्सा पूरे उबाल पर है। अपने समाज को पढ़ाने-लिखाने, सम्मान से जीना सिखाने के लिए उनके बेटे-भाईयों को जो सज़ा दी जा रही है,  उन्हें नक्सली-आतंकवादी घोषित किया जा रहा है, वो उन्हें मंजूर नहीं।

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर की मां की ओर से सोशल मीडिया पर जारी की गई अपील

'मेरे बेटे ने कोई गुनाह नहीं किया'

चंद्रशेखर की मां कहती हैं कि 'मेरे बेटे ने कोई गुनाह नहीं किया है। मुझे गर्व है उसपर।' तमतमाते हुए किशोरियां कह रही हैं कि 'जेल में डालना है तो पूरे समाज को डालो। हम सब भीम के हैं।'

21 मई 2017 को जंतर-मंतर पर भीम आर्मी और अचानक सुर्खियों में आए उसके संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद की ताकत देखकर क्या भाजपा शासित केंद्र और राज्य सरकारों के होश उड़ गए हैं? आज की तारीख़ में यह सवाल अहम हो गया है।

भीम आर्मी का पोस्टर साभार: गूगल

भीम आर्मी से डरी सरकार?

पश्चिम उत्तर प्रदेश के हर जिले में भीम आर्मी का साथ देने वालों पर नकेल कसने के लिए योगी सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस अफसरों को तैनात किया है। लगातार प्रशासन द्वारा लड़कों की पहचान कर डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। कहा जा रहा है कि जो भी भीम आर्मी के साथ जुड़ा होगा उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लाव-लश्कर और गोदी मीडिया से लैस पूरी मोदी-योगी सरकार भीम आर्मी और उसके समर्थकों के पीछे लगी है।

भीम आर्मी के सदस्यों के अलावा पुलिस 40 दलित नौजवानों को जेल में डाल चुकी है। जबकि दलितों के घर जलाने, तलवारों गोलियों से मार-काट मचाने वाले ठाकुरों के करीब 80 नामजद आरोपियों को अब तक हाथ तक नहीं लगाया गया है। और जिनको गिरफ्तार भी किया गया था उनमें से 8 को एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार निर्दोष बताकर छोड़ दिया गया है।

प्रदेश के हर जिले में भीम आर्मी से किसी भी तरह जुड़े लोगों को ट्रैक-ट्रेस करने का काम ज़ोरों पर है। भीम आर्मी के करीबी कहते हैं कि लोगों के अंदर पुलिस प्रशासन का डर बैठाया जा रहा है। ये बात अलग है कि प्रशासन से डरकर लोग घर पर नहीं बैठें हैं, निकल कर बाहर आ रहे हैं। मर्दों को पुलिस ने रोका तो महिलाएं आंदोलन में कूद पड़ी हैं। 15 जून को चंद्रशेखर की रिहाई के  लिए हजारों की संख्या में क्षेत्रीय दलित महिलाओं ने इकट्ठा होकर प्रशासन की नाक में दम कर दिया। कई घंटो तक तहसील की घेराबंदी की, हाइवे जाम कर दिया।

चंद्रशेखर की रिहाई के लिए प्रदर्शन करती महिलाएं। फोटो साभार: गूगल

योगी सरकार के भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ महिलाओं ने डटकर मोर्चा संभाल लिया है। उनका कहना है कि हमने कोई जुर्म नहीं किया है अपना हक़ मांग रहे हैं, हमारा हक़ हमें दे दो। अपने बच्चों के लिए अगर हमारी कोई सुनवाई नहीं करता है तो हम जाम लगाएंगे। प्रदर्शन करेंगे। दिल्ली जाएंगे। चंद्रशेखर की मां ने एलान किया है कि वो 18 जून को जंतर-मंतर आएंगी।

महज दो साल पहले दलित छात्रों के साथ ठाकुरों के भेदभाव और अपमान पूर्ण रवैये को चुनौती देने के लिए असित्त्व में आई भीम आर्मीने जल्दी ही अपने समाज के लोगों के बीच जगह बना ली। संत रविदास और बाबा साहेब की मूर्ति पर कालिख पोतने का मामला हो या शब्बीरपुर में ठाकुरों का अत्याचार हर मोर्चे पर विरोध किया। प्रदेश के तथाकथित ऊंची जात के अत्याचारों के खिलाफ अपने समाज को एकत्र करने और हिंदू-मुसलमान दंगों के नाम पर दलितों का इस्तेमाल होने से रोकने में चंद्रशेखर आज़ाद ने अहम भूमिका निभाई है।

भीम आर्मी (फाइल) साभार: गूगल

'आंदोलन दबाना आसान नहीं'

भीम आर्मी के करीबी कहते हैं कि इस आंदोलन को दबाना इतना आसान नहीं है क्योंकि आंदोलन का जो सपोर्ट बेस है अब वो केवल चंद्रशेखर व सहारनपुर तक ही सीमित नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान में फैल गया है। चंद्रशेखर को जेल में डालने से योगी सरकार सोचती है कि ये मूवमेंट रुक जाएगी तो ऐसा नहीं होने वाला है। शब्बीरपुर भी अभी ठंडा नहीं हुआ है।

भीम आर्मी के समर्थन में देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। संविधान बचाओ देश बचाओ समिति, रिहाई मंच, भागीदारी आन्दोलन, जन एकता मंच, पिछड़ा समाज महासभा, दलित पैंथर सेना आदि संगठन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और बहुजन कम्युनिस्ट पार्टी भी दलित आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।

बेशक भीम आर्मी का आग़ाज़ राजपूतों के खिलाफ विषेशकर चमार जाति के उत्पीड़न के खिलाफ द ग्रेट चमारकी मुहिम से शुरू हुआ था लेकिन अपने विकास के क्रम में इसने पहले मुसलमानों को साथ लिया और फिर अन्य दलित पिछड़ों को। 

इस आंदोलन की आग देश भर में फैल रही है। 21 मई को जंतर-मंतर से अपने संबोधन में चंद्रशेखर ने कहा था - ‘‘मैं पूरे यादव समाज और पूरी ओबीसी कम्युनिटी को विश्वास दिलाता हूं कि बहुजन मूवमेंट हम आप लोगों के साथ मिलकर लड़ेंगे। वाल्मीकि समाज भी हमारी कौम है, ये हमारी लड़ाई है, सबकी लड़ाई साथ मिलकर लडेंगें।’’ ये पहली बार है कि दलित आंदोलन सही मायने में जुझारु बहुजन आंदोलन का रूप ले रहा है। बहुजन का नारा अब मनुवादी अल्पमत के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।






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