योगी सरकार आदिवासियों से छीन रही है उनकी जमीन

आंदोलन , , रविवार , 25-06-2017


yogi-up-naugarh-tribal-adiwasi-land-highcourt-government-rajnath

जनचौक ब्यूरो

नौगढ़, चंदौली। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार नौगढ़ के आदिवासी इलाके में आग से खेलने की कोशिश कर रही है। सरकार ने यहां आदिवासियों को उनकी जमीनों बेदखल करना शुरू कर दिया है। ये मामला इतना गंभीर है जिसमें कोई सरकार हाथ डालने की हिम्मत नहीं कर पाती। इसके पहले राजनाथ सिंह की सरकार ने एक बार ऐसी कोशिश की थी लेकिन उसके हाथ जल गए थे। नतीजतन उसे अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे। 

दरअसल ये इलाका बेहद संवेदनशील है। इसमें आदिवासियों की बहुलता होने के साथ ही संपत्ति के तौर पर उनके जंगल और जमीन हैं। इसके साथ ही बड़ी मात्रा में खनिज और दूसरे कीमती पदार्थ भी जमीनों के भीतर पाए जाते हैं। जिस पर कारपोरेट की निगाह गड़ी रहती है। लेकिन इस काम को वो अपने बल पर नहीं कर सकता है। ऐसे में उसे सरकार के सहयोग की जरूरत पड़ती है। अब अपने पक्ष की सरकार के आने के बाद उसके हौसले बुलंद हो गए हैं। लिहाजा उसने सरकार को आगे कर दिया है। और सरकार बगैर सोचे समझे जमीन बेदखली की कार्रवाई को आगे बढ़ाने में जुट गयी है। इस प्रक्रिया में वो कोर्ट के निर्देशों का खुल्ला उल्लंघन कर रही है। इस मामले में हाईकोर्ट का निर्देश बिल्कुल साफ है। हाईकोर्ट के आदेश और वनाधिकार कानून के तहत बगैर दावा निस्तारण के किसी को भी उसकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल नहीं किया जा सकता है। लेकिन इसको दरकिनार कर दावों की सत्यापन और मान्यता प्रक्रिया के बिना ही आदिवासियों और वनाश्रितों को जबरन उनकी जमीन से बेदखल किया जा रहा है। सरकार की इस पहल से एक बार फिर इलाके में अशांति का खतरा पैदा हो गया है। 

गांव वालों के साथ बैठक करते दिनकर कपूर।

पहले भी राजनाथ सिंह के नेतृत्व में बनी प्रदेश सरकार की नीतियों और कार्यवाहियों ने नौगढ़ में अशांति पैदा की थी। इसके खिलाफ स्वराज अभियान के नेता अखिलेन्द्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में चले लोकतांत्रिक आंदोलन के पश्चात ही शांति की बहाली हो पायी थी। एक बार फिर योगी सरकार उसे भंग करने की कोशिश कर रही है। बहरहाल मामले को स्वराज अभियान ने अपने हाथ में ले लिया है। और उसने इसके खिलाफ इलाके में गोलबंदी शुरू कर दी है। इसके तहत उसने इन तमाम सवालों को लेकर 28 जून को धरना देने का फैसला किया है। 

इसकी तैयारी की कड़ी में स्वराज अभियान की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य दिनकर कपूर ने भरदुआ, तेन्दू, मझगंवा, बोदलपुर, गोलाबाद, मनोवर, परसिया आदि गांवों में सभा की। इसमें उन्होंने नौगढ़ की शांति की रक्षा, वनाधिकार कानून को लागू कराने और गैरकानूनी बेदखली पर रोक लगाने की मांग की। 

एक दूसरे गांव में बैठक

इसके साथ ही उनके नेतृत्व में स्वराज अभियान की एक जांच टीम ने ग्रामीणों से बेदखली की कार्यवाही के बारे में भी जानकारी एकत्र की। टीम को गोलाबाद गांव में ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीम ने 36 लोंगो को पुश्तैनी जमीन से बेदखल किया है। इन जमीनों पर ग्रामीणों के कच्चे मकान, ओसारा व कुएं बने हुए थे और इन पर वो खेती कर रहे थे। इन जमीनों पर ज्यादातर ने वनाधिकार में दावा भी तहसील में जमा किया हुआ था। इसी प्रकार बोदलपुर में खेती की जमीन से ग्रामीणों को बेदखल कर टेंच और गड्ढे बना दिए गए हैं। जबकि बगल की ही खाली पड़ी वन भूमि परती पड़ी हुई है। तेदुआं और मझगांवा में लोगों ने बताया कि वन विभाग द्वारा उन्हें जमीन खाली करने की नोटिसें दी जा रही हैं। 

जांच टीम ने उप जिलाधिकारी से भी बात कर उन्हें कानूनी स्थिति से अवगत कराया। जांच टीम ने यह भी देखा कि जंगल की सैकड़ों एकड़ जमीन पर भूमफियाओं ने कब्जा कर रखा है पर उन्हें वन विभाग बेदखल नहीं कर रहा है। कपूर ने बताया कि नौगढ़ दौरे की रिपोर्ट महामहिम राज्यपाल और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेज कर उनसे उप्र सरकार को विधि के अनुरूप कार्यवाही करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया जायेगा साथ ही उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अवमानना याचिका भी दाखिल की जाएगी। 

 






Leave your comment











bhartia :: - 06-25-2017
दुखद