योगी सरकार के खिलाफ लखनऊ की सड़कों पर उतरे सैकड़ों छात्र गिरफ्तार

आंदोलन , लखनऊ , बुधवार , 26-07-2017


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जनचौक ब्यूरो

लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार की शिक्षा और जनविरोधी नीतियों के कारण प्रदेश के छात्र-युवा सड़कों पर हैं। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही शैक्षिक परिसर अशांत है। विश्वविद्यालयों में सीटों की कटौती और फंड की कमी आम बात हो गई है। लखनऊ विश्वविद्यालय के छह छात्रावासों को स्ववित्त पोषित किया जा रहा है। उसमें रहने वालों छात्रों से अब प्रति वर्ष लाखों रुपये वसूला जाएगा। आम परिवार के छात्रों, गरीब,पिछड़े और दलित छात्रों के लिए अब छात्रावास सपना हो जाएगा। सरकार की इस छात्र विरोधी नीतियों के खिलाफ कैंपसों में छात्र सरकार विरोधी धरना-प्रदर्शन का आयोजन और शांति मार्च निकाल रहे हैं। छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से राज्य सरकार नाराज होकर उत्पीड़न पर उतर आई है। आंदोलनकारी छात्रों को पुलिस गिरफ्तार कर जेलों में डाल रही है। पुलिस दमन के बावजूद छात्रों का आक्रोश कम नहीं हो रहा है।

आइसा नेता नितिन राज कहते हैं कि, ‘‘भाजपा सरकार ने सारे विश्वविद्यालयों को लड़ाई और भगवा राजनीति के अखाड़े में बदल दिया हैं। परिसरों में सीट कटौती और फन्ड कम किया जा रहा है। जिससे आम परिवार के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के द्वार बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। दूसरी बात यह है कि इस दौरान पूरे प्रदेश में महिलाओं पर दमन बढ़ा है। जेएनयू में सीट कटौती की जा रही हैं और दूसरी तरफ आर्मी टैंक लगाने की बात हो रही है।’’

आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा  संयुक्त रूप से  जगह-जगह लोकतंत्र बचाओ मार्च निकाल रही है। इसी क्रम में दोनों संगठनों ने कल लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर से मार्च निकाला। लेकिन चंद कदमों चलने के बाद ही पुलिस ने छात्रों का मार्च रोक कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। लगभग डेढ़ सौ छात्र नौजवानों ने अपनी गिरफ्तारी दी। आइसा के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य कहते हैं कि, ‘‘ योगी सरकार ने सामंती ताकतों को खुली छूट दे रखी है। जिसके कारण पूरे प्रदेश में दलितों,महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं। और लोकतांत्रिक आवाजों का दमन कर रही है।’’

इंकलाबी नौजवान सभा के प्रदेश सचिव राकेश सिंह कहते हैं कि, ‘‘ इस सरकार का काम केवल सामाजिक भाईचारे को बिगाड़ना है और उसकी आड़ में जनविरोधी नीतियों को लागू करना है।’’

 छात्रों की प्रमुख मांग

1. लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों पर लगे फर्जी मुकदमा वापस करो।

2. सहारनपुर के दोषियों को दंडित करो।

3. सहारनपुर के नेता चंद्रशेखर को बिना शर्त रिहा करो।

4. भ्रष्टाचार के नाम पर लगाई गई भर्तियों पर रोक हटाई जाए और उत्तर प्रदेश लोक आयोग की जांच सीबीआई की निगरानी में करवाई जाए।

5. छात्रों की अभिव्यक्ति की आजादी को तत्काल बहाल किया  जाए ।

6. छात्रसंघ चुनाव नियमित करवाएं जाए।

7. सांप्रदायिक सद्भावना और भाईचारे बिगाड़ने की घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाई जाए और दोषी ताकतों के साथ सख्ती से निपटा जाए।

शिक्षा के बजट में कटौती बंद की जाए और रोजगार की गारंटी की जाए।

8.छात्रों -युवाओं के आन्दोलनों का दमन बंद किया जाए ।

 

 






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