मोदी सरकार पर बरसे अमर्त्य सेन,कहा- 2014 के बाद गलत दिशा में लगायी भारत ने छलांग

खरी-खरी , नई दिल्ली, सोमवार , 09-07-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। नोबेल पुरस्कार विजेता और मशहूर अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने केंद्र की बीजेपी सरकार की जमकर आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि देश ने 2014 के बाद गलत दिशा में छलांग लगा लिया है। उन्होंने कहा कि “चीजें बहुत गलत दिशा में चली गयी हैं.....इसने 2014 के बाद गलत दिशा में छलांग लगा दिया है। तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था में हम पीछे जा रहे हैं।”

दुनिया के चंद बड़े अर्थशास्त्रियों में एक सेन अपनी अंग्रेजी किताब “एन अनसर्टेन ग्लोरी-इंडिया एंड इट्स कंट्राडिक्शन” के हिंदी संस्करण “भारत और उसके विरोधाभास” के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे। उन्होंने इस किताब को ज्यां द्रेज के साथ मिलकर लिखी है।

सेन ने कहा कि अर्थव्यवस्था के ढलान पर जाने के साथ ही भारत इस उप महाद्वीप का दूसरा सबसे बुरा देश बन गया है। इलाके के छह देशों में 20 साल पहले भारत श्रीलंका के बाद दूसरा सबसे अच्छा देश था। उन्होंने कहा कि “अब ये दूसरा सबसे खराब देश हो गया है। (शुक्र है) पाकिस्तान ने हमारी खराबी को ढंक दिया है।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार असमानता और जाति व्यवस्था के मुद्दों से दूर चली गयी है। उन्होंने इस बात को चिन्हित करते हुए कहा कि यहां लोगों का एक पूरा समूह है जो शौचालय या सीवेज को अपने हाथों से साफ करता है उनकी मांगों और जरूरतों को बिल्कुल दरकिनार कर दिया गया है।

हाल में आई एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए जिसमें मध्य प्रदेश के दलित जवान द्वारा वेतन में बृद्धि की मांग करने पर पेट्रोल पंप मालिक ने झाड़ पिला दी थी, उन्होंने कहा कि वो अगले समय का भोजन, स्वास्थ्य या शिक्षा को सुनिश्चित कर पाए बगैर इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।

बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ये सोच पाना भी कठिन था कि हिंदू पहचान का इस्तेमाल करके राजनीतिक लड़ाई जीती जा सकती थी लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल गए हैं। 84 साल के अर्थशास्त्री ने कहा कि “लेकिन ऐसा हो गया है। इसी वजह से इस समय विपक्ष की एकता बहुत जरूरी हो गयी है।” सेन ने कहा कि “ये एक इकाई का दूसरे से युद्ध नहीं है या मोदी के खिलाफ राहुल की बात नहीं है भारत क्या है ये उसका मामला है।”

पीएम मोदी की स्वास्थ्य संबंधी महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने इसे जुमला करार दिया। उनका कहना था कि जितनी बड़ी होने का दावा किया जा रहा है उतनी बड़ी ये है नहीं। उन्होंने कहा कि “इस साल के लिए इसका बजट 2000 करोड़ है। यहां तक कि अगर इसको भी खर्च कर दिया जाए तो ये प्रति व्यक्ति के हिसाब से केवल 20 रुपये पड़ेगा।”

इस मौके पर मौजूद ज्यां द्रेज ने कहा कि इसे 50 करोड़ लोगों की स्वास्थ्य बीमा के तौर पर पेश किया गया है। लेकिन सच में ये कुछ नहीं है। गौरतलब है कि द्रेज को ही मनरेगा योजना का जनक माना जाता है।




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