ये है अंबानी की महिमा! पैदा होने से पहले ही उनकी संस्था को मिल गया उत्कृष्टता का प्रमाणपत्र

बड़ी ख़बर , , मंगलवार , 10-07-2018


ambani-mukesh-institute-certificate-hrd-modi-iit

गिरीश मालवीय

पहली बार खुद को इतने गुस्से में महसूस कर रहा हूं। लिखने के लिए शब्द ही नहीं हैं। यह किस तरह के बिके हुए लोगों के हाथ में सत्ता सौंप दी है हमने!

हमारे मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कल शाम को देश के 6 उत्कृष्ट संस्थानों Institute of Eminence (IoEs) का ऐलान किया है। यकीनन उसमें से पांच नाम आपने सुने होंगे लेकिन छठे नाम का अभी तक कहीं नामोनिशान नहीं है।

इसमें आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बाम्बे, आईआईएससी बंगलोर, मनिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन और बिट्स पिलानी का नाम शामिल है। छठा नाम है जिओ इंस्टीट्यूट का! क्या आपने कभी इस इंस्टीट्यूट का नाम सुना है?

वैसे पिछले साल ऐसी खबर आई थी कि रिलायंस फाउंडेशन कोई इंस्टीट्यूट बनाने जा रहा है लेकिन इस बारे में इंटरनेट पर भी किसी भी तरह की कोई जानकारी नहीं है। बिल्डिंग की फ़ोटो तो छोड़िए प्रस्तावित प्लान तक की कोई फ़ोटो नहीं है। वास्तविकता की तो बात ही क्या की जाए?

कमाल की बात तो यह है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय जो देश भर के इंस्टीट्यूट की रैंकिंग भी कराता है। जिसे राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचा (NIRF) कहा जाता है उसमें साल 2018 की रैंकिंग में आईआईएससी बेंगलुरु पहले, आईआईटी बॉम्बे तीसरे और आईआईटी दिल्ली चौथे स्थान पर था। वहीं मणिपाल 18वें और बिट्स 26वें स्थान पर था लेकिन 'जियो इंस्टीट्यूट' तो NIRF-2018 का हिस्सा भी नहीं था।

सार्वजनिक क्षेत्र के जिन संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दिया गया है, उन्हें अगले 5 साल के दौरान 1000 करोड़ रुपये का सरकारी अनुदान देने की बात की जा रही है। हो सकता है निजी क्षेत्र के संस्थानों को भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी न किसी तरह फायदा पुहंचाने की बात हो और वह बाद में सामने आए।

प्रकाश जावड़ेकर अपने घोषणा में कहते हैं कि मोदी सरकार की प्रतिबद्धता हस्तक्षेप नहीं करने और संस्थानों को अपने अनुरूप आगे बढ़ने की अनुमति देने की है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से एक और मील का पत्थर स्थापित करने वाली पहल की गई है।

वाकई ये घोषणा मील का पत्थर है ओर उस मील के पत्थर के पीछे यह भी लिखा है कि यह मोदी सरकार बिकी हुई है। हालांकि पहले इस तरह के 20 संस्थानों को चुना जाना था लेकिन यूजीसी ने अभी केवल 6 नामों पर ही अपनी मुहर लगायी है। बताया जा रहा है इसके जरिये

सरकार की कोशिश देश की कुछ शिक्षण संस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में ले आना है। इस लिहाज से 10 सरकारी और 10 निजी संस्थाओं को चुना जाना है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि अभी जो संस्था पैदा भी नहीं हुई उसे कैसे उत्कृष्टता की श्रेणी में रखा जा सकता है। ये बताता है कि इस फैसले में अपने चहेते लोगों को फायदा पहुंचाने का निहित स्वार्थ छुपा हुआ है। 

(गिरीश मालवीय आर्थिक मामलों के जानकार हैं और आजकल इंदौर में रहते हैं।)




Tagmukeshambani institute hrd iit modi

Leave your comment