मोदी जी! घटनाओं को दबाने के पीछे भी काम करता है न्यूटन का नियम

ख़बरों के बीच , , रविवार , 14-01-2018


amit-shah-sc-judge-chidambaram-raid-ed

महेंद्र मिश्र

कल पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के घर पर ईडी का छापा पड़ा है। इस छापे का शख्स जितना महत्वपूर्ण है उससे ज्यादा उसका समय है। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में मुंबई की स्पेशल सीबीआई अदालत में चल रहे मुकदमे में एक प्रकरण आया था जो बेहद चौंकाने वाला था। मामले को देख रहे जस्टिस बीएच लोया से तबके बांबे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने उसे 30 दिसंबर 2014 तक निपटा देने की गुजारिश की थी। मुख्य न्यायाधीश ने दिसंबर की 30 तारीख इसलिए सुझायी थी क्योंकि उसी दिन क्रिकेटर एमएस धोनी को टेस्ट क्रिकेट से सन्यास लेना था। जज का इशारा था कि उस दिन इस खबर की गूंज में सीबीआई कोर्ट का फैसला दब जाएगा। और मीडिया भी चाहते हुए उसे ज्यादा तवज्जो नहीं दे पाएगी।

और खास बात ये है कि लोया की मौत के बाद जो अगले जज गोसावी आए उन्होंने 12000 पन्नों की सीबीआई चार्जशीट की 15 मिनट की सुनवाई के बाद उसी तारीख को फैसला सुना दिया। जिसे मुख्य न्यायाधीश ने सुझाया था। और बिल्कुल वही हुआ। धोनी के सन्यास के हंगामे के शोर में अमित शाह के बरी होने का मामला दब गया। क्योंकि अगर उस मामले पर बात होती तो साथ ही ये भी सवाल उठता कि किसी कोर्ट के ट्रायल के बीच कैसे किसी आरोपी को बरी किया जा सकता है। और वो भी 12000 पन्नों की चार्जशीट को कोई जज इतने कम समय में पढ़कर कैसे फैसला सुना सकता है। और एक ऐसा जज जिसकी अभी नियुक्ति हुई हो और जिसे पूरे केस के बारे में बहुत कुछ समझना हो। वो इस काम को कैसे कर सकता है। इसके साथ ही लोया की मौत का मामला भी उठता। और फिर बात कहां तक जाती उसके बारे में कुछ भी कह पाना मुश्किल है। लेकिन ये सब सवाल और बातें धोनी के सन्यास के शोर में दब गयीं। 

अब आइये असली सवाल पर। 30 दिसंबर की तारीख किसी जज को नहीं सूझी होगी। बल्कि इसे देने वाला वो शख्स होगा जो पूरे मामले की प्लानिंग कर रहा है। और वो कौन हो सकता है उसके बारे में यहां बताने की जरूरत नहीं है। 

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों के प्रेस कांफ्रेंस करने के बाद पूरा मामला चीफ जस्टिस और केंद्र सरकार के बीच गठजोड़ पर केंद्रित हो गया। पालतू मीडिया की डाइवर्ट करने की लाख कोशिशों के बाद भी असली मामला सामने आना शुरू हो गया। जिसमें बताया जा रहा है कि जस्टिस बीएच लोया की मौत की सुनवाई इस पूरे प्रकरण में आखिरी कील साबित हुई। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जस्टिस गोगोई ने इस बात को स्वीकार भी किया। और शुक्रवार की सुबह इन जजों की मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात भी बताया जा रहा है इसी केस को लेकर हुई। लेकर चीफ जस्टिस वरिष्ठ न्यायाधीशों की बात मानने के लिए तैयार नहीं हुए (जिसमें उस मामले को किसी वरिष्ठ जज की बेंच को देने की बात शामिल थी। गौरतलब है कि उसे एक बार फिर उन्हीं अरुण मिश्र को दे दिया गया है जिन पर मामलों को उनकी मेरिट के आधार पर न देखने का आरोप लग रहा है)। नतीजे के तौर पर उन जजों को जनता के सामने आना पड़ा।

दरअसल न चाहते हुए भी एक बार फिर जस्टिस लोया की मौत का मामला मुद्दा बनता जा रहा है। इसमें मुख्यधारा का मीडिया उसे दबाने की पूरी कोशिश कर रहा है लेकिन बात है कि दब ही नहीं रही है। दूसरे मीडिया उसको उभार दे रहे हैं। लिहाजा एक बार फिर सत्ता में बैठी राजनीति की चंट चौकड़ी का शातिर दिमाग सक्रिय हो गया। और इस पूरे मामले को कैसे डाइवर्ट किया जाए उसके लिए उपाय ढूंढे जाने लगे। नतीजतन अपनी पालतू एजेंसी ईडी याद आयी और चिदंबरम जैसा एक बड़ा शख्स तलाशा गया। और फिर अगली सुबह 7.30 बजे ही एयरसेल मैक्सिस मामले में उनके बेटे के दिल्ली और चेन्नई स्थित घरों में (कार्ति अपने पिता पी चिदंबरम के साथ ही रहते हैं इस लिहाज से वो चिदंबरम का ही घर है।) छापे डलवा दिए गए।

अगर चिदंबरम की बात मानें तो ईडी का उनके घर पर छापे का कोई तुक ही नहीं बनता है। चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट को लिख कर दिया है कि एयरसेल-मैक्सिस मामले में ईडी को जांच का कोई अधिकार नहीं है। उनका कहना है कि इस मामले में उनके और उनके बेटे के खिलाफ कोई एफआईआर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी ईडी से 30 जनवरी तक इस पर जवाब देने को कहा है। और तब तक के लिए मामले को स्थगित कर दिया है। लेकिन ईडी ने सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों को दरकिनार कर रेड की कार्रवाई की।

बहरहाल इस रेड से सुप्रीम कोर्ट के जजों और फिर उससे जुड़ी लोया की मौत की जांच को कितना प्रभावित किया जा सकेगा। उसके बारे में कुछ कह पाना मुश्किल है। लेकिन इस वाकये ने एक बार फिर बता दिया कि सत्ता के गुजराती खिलाड़ियों का एक घटना से दूसरे घटना को दबाने की कार्रवाई अभी भी उनकी रणनीति का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है। 






Leave your comment











FIROZ KHAN MEHMOOD KHAN :: - 01-14-2018