उप राज्यपाल की सूली पर दिल्ली का लोकतंत्र

राजनीति , , मंगलवार , 12-06-2018


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प्रदीप सिंह

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कल से धरने पर बैठे हैं। इस बार वे जंतर मंतर, रामलीला मैदान या राजघाट पर नहीं बल्कि दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल के सरकारी आवास के अंदर धरना दे रहे हैं। उनके साथ उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और दो अन्य मंत्री सत्येंद्र जैन और गोपाल राय भी धरने पर हैं। इस बार केजरीवाल जनता के साथ नहीं बल्कि जनता के प्रतिनिधि के बतौर धरना दे रहे हैं। उप राज्यपाल अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की जनता का प्रतिनिधि और दिल्ली सरकार का मुखिया मानने से इनकार कर रहे हैं। तभी तो दिल्ली के मुख्यमंत्री को उप राज्यपाल से मिलने के लिए दो दिन का इंतजार करना पड़ा। बात सिर्फ उनसे मिलने के लिए इंतजार तक सीमित नहीं है। उप राज्यपाल अनिल बैजल अपने को दिल्ली का वास्तविक मुखिया मानते हैं। वे केंद्र सरकार के इशारे पर दिल्ली सरकार के अधिकारों में हस्तक्षेप कर रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं और दिल्ली की जनता ने भारी मतों से चुनाव जिताकर उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है। लेकिन उप राज्यपाल केजरीवाल सरकार की बजाए चार सदस्यीय विपक्ष की बातों को ज्यादा तरजीह देते हैं। ऐसा नहीं है कि ऐसा करने वाले बैजल पहले उप राज्यपाल हैं। इसके पहले उप राज्यपाल रहे नजीब जंग का भी दिल्ली सरकार से ऐसा ही रिश्ता था। 

दिल्ली सरकार का आरोप है कि उप राज्यपाल के केंद्र सरकार के इशारे पर काम करने से दिल्ली में प्रशासनिक रूप से विषम स्थिति बनती जा रही है। उप राज्यपाल दिल्ली सरकार की फाइलों को अटका रहे हैं। ऐसा कर वह केजरीवाल सरकार को जनता की नजरों में अक्षम साबित करना चाहते हैं। दिल्ली की स्थिति पर अरविंद केजरीवाल कहते हैं-

‘‘दिल्ली ऐतिहासिक शहर है, लेकिन इसका दुर्भाग्य रहा कि यहां सिर्फ राजाओं का शासन रहा, जनता का नहीं हो पाया। पहले महाराज अकबर, महाराजा औरंगजेब, बहादुरशाह जफर, अंग्रेज उसके बाद 1992 में जो धोखा दिल्ली के साथ हुआ उसके बाद महाराज एलजी। इसमें पहले महाराज नजीब जंग थे और अब महाराज बैजल हैं। देश को आजादी मिल गई लेकिन दिल्ली के नागरिकों को द्वितीय श्रेणी की नागरिकता मिली। दिल्ली के लोग 1 लाख 30 हजार करोड़ टैक्स भरते हैं, पर बदले में उन्हें कुछ नहीं मिलता।’’ 

दरअसल, 19 फरवरी को मुख्यमंत्री आवास पर कथित तौर पर दिल्ली के मुख्यसचिव अंशु प्रकाश पर आम आदमी पार्टी के विधायकों ने हमला किया था। घटना के समय मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री भी उपस्थित थे। तब यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना था। तभी से दिल्ली सरकार और दिल्ली के अधिकारियों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। मामले की जांच में केजरीवाल से पुलिस ने पूछताछ की। लेकिन अधिकारियों की हरकतों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। अरविंद केजरीवाल का कहना है कि-

पिछले चार महीने से दिल्ली के आईएएस अधिकारी काम को रोके रखे हैं। वे अघोषित हड़ताल पर हैं। केंद्र सरकार और उप राज्यपाल उन्हें शह दे रहे हैं। ऐसे में दिल्ली का कामकाज प्रभावित हो रहा है। केजरीवाल और उनके मंत्रियों ने आईएएस अधिकारियों को हड़ताल खत्म करने का निर्देश देने सहित तीन मांगों के साथ उप राज्यपाल से मिलने का समय मांग रहे थे। मनीष सिसोदिया ने ट्वीट में कहा कि उपराज्यपाल से तीन मांगें की गई हैं। पहली यह कि दिल्ली सरकार में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों की हड़ताल खत्म कराई जाए। दूसरी, काम रोकने वाले आईएएस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और तीसरी मांग है कि राशन की दरवाजे पर आपूर्ति की योजना को मंजूर किया जाए।

वहीं उप राज्यपाल अनिल बैजल का कहना है कि-

केजरीवाल ने धमकी भरे अंदाज में अधिकारियों की हड़ताल खत्म कराने की मांग की। अफसरों में डर और अविश्वास का माहौल है, जिसे सीएम ही दूर कर सकते हैं। लेकिन उनसे सकारात्मक बातचीत की कोशिश तक नहीं हुई। डोर-टू-डोर राशन डिलीवरी की फाइल 3 महीने से मंत्री इमरान हुसैन के साथ है। इसके लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी है। 

अरविंद केजरीवाल धरने पर बैठने के पहले दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का प्रस्ताव विधानसभा में रखा। इसके पास होने के बाद केजरीवाल ने कहा-

‘‘अगर केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दे देती है, तो पूरी दिल्ली भाजपा को वोट करेगी। यहां तक कि हम भी उनके लिए प्रचार करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो दिल्ली की जनता हाथों में ‘‘भाजपा दिल्ली छोड़ो’’ के बोर्ड होंगे।’’ 

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार जरूर है। लेकिन दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा न होने के कारण राज्य सरकार को बहुत कम अधिकार हैं। किसी भी काम के लिए कई विभागों के चक्कर काटने होते हैं। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग पुरानी है। भाजपा और पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना भी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में केजरीवाल ने एक बार फिर से पूर्ण राज्य की मांग कर केंद्र की भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश की है।

उप राज्यपाल के आवास पर धरने के बावजूद उप राज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली सरकार की मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है। केजरीवाल ने कहा कि बैजल को एक पत्र सौंपा गया लेकिन उन्होंने कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। कार्रवाई करना एलजी का संवैधानिक कर्तव्य है। कोई विकल्प नहीं बचने पर हमने एलजी से विनम्रता से कहा है कि जब तक वह सभी विषयों पर कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक वे वहां से नहीं जाएंगे।’’ लेकिन अब मुख्यमंत्री आवास के सामने धरना देने के लिए मंच सज रहा है।  

 



 






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