जगह-जगह से भगाए जा रहे हैं बीजेपी नेता, डोर-टू-डोर प्रचार भी हुआ मुश्किल

गुजरात की जंग , अहमदाबाद, सोमवार , 13-11-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। रविवार को मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने बड़ोदा से 15 किलोमीटर दूर  स्थित हरिधाम सोखड़ा गए। सोखड़ा में रूपानी ने हिंदुत्व के मुद्दे को हवा देते हुए कहा कि “अयोध्या में राम, युवाओं को काम और किसानों को दाम” यही उनकी पार्टी का लक्ष्य है। वह यहीं नहीं रूके। उन्होंने देश में सिविल कोड लागू करने की वकालत की, धारा 370 समाप्त होनी चाहिए ये भी कहा। साथ ही कहा कि आतंकवाद के खात्मे के लिए सर्जिकल स्ट्राइक ज़रूरी है। उन्होंने आगे कहा कि गाय, गीता और गंगा हमारे लिए पूजनीय हैं। साथ ही लोगों को गोधरा की घटना की भी याद दिलाई। 

विजय रूपानी राज्य के मुखिया हैं। यह चुनाव राहुल गांधी बनाम मोदी-अमित शाह चल रहा है लेकिन विजय रूपानी को भी इस चुनाव से बहुत कुछ खोना और बहुत कुछ पाना है। विजय रूपानी जिस जैन समाज से आते हैं उसकी संख्या 2011 की जनगणना अनुसार 1% से भी कम है। फिर भी उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यदि गुजरात में बीजेपी चुनाव हार जाती है तो सबसे पहले राज्य की राजनीति में रूपानी शिखर से ज़मीन पर आ जायेंगे। शायद इसीलिए सत्ता विरोधी लहर के सामने रूपानी बार-बार हिंदुत्व के हथियार का उपयोग कर रहे हैं। इससे पहले भी रूपानी आईएसआईएस आतंकवादियों के सहारे अहमद पटेल को निशाने पर लेकर ध्रुवीकरण का प्रयत्न कर चुके हैं। 

आप को बताते चलें कि राज्य में पाटीदार और दलितों के विरोध के चलते बीजेपी प्रचार भी नहीं कर पा रही है। शनिवार को अहमदाबाद के विराट नगर में पूर्व गृह मंत्री गोवर्धन झड़फिया को पाटीदारों के गुस्से का शिकार होना पड़ा। पाटीदार युवाओं ने जय सरदार के नारे के साथ झड़फिया और अन्य बीजेपी नेताओं को भगा दिया। इसी प्रकार से दलितों के विस्तार में भी डोर टू डोर प्रचार करते समय जय भीम के नारों से डर कर बीजेपी नेताओं को उलटे पैर वापस आना पड़ा। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मिनिस्टर आत्माराम परमार को भी दानी लिमडा के प्रोग्राम को रद्द करना पड़ा। अमित शाह भले ही 150+ का सपना देख रहे हों लेकिन ज़मीनी सच्चाई यही है कि बीजेपी नेताओं को पुलिस के साथ प्रचार करना पड़ रहा है। 

सूरत में भी पाटीदारों के आक्रोश के कारण बीजेपी डोर टू डोर प्रचार नहीं कर पा रही है। लगातार चार पांच दिन बीजेपी के विरोध के बाद सूरत के पुलिस कमिश्नर सतीश शर्मा ने पास नेताओं को चेतावनी दी। शर्मा ने कहा कि प्रचार करना सभी दलों का संवैधानिक अधिकार है यदि किसी ने भी प्रचार करने से रोका तो कानून अपना काम करेगा। सूरत के पास कन्वेनर धार्मिक मालवीय ने पुलिस पर भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। 






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