सरकारी कंपनी बीएसएनएल के सामने फंड का संकट, नहीं मिला कर्मचारियों को पिछले महीने का वेतन

ख़ास रपट , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 14-03-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। फंड के संकट के चलते बीएसएनएल यानी भारत संचार निगम लिमिटेड कर्मचारियों को पिछले महीने का वेतन नहीं दिया जा सका है। नतीजतन देश के 1.76 लाख कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि ऐसा निजी कंपनियों के साथ जारी कीमतों के युद्ध के चलते हुआ है। जिसमें बीएसएनएल बहुत पीछे छूट गया है।

आमतौर पर बीएसएनएल अपने कर्मचारियों को महीने की आखिरी तारीख या फिर अगले महीने की पहली तारीख को वेतन दे देता था। लेकिन इस बार 13 दिन बीत जाने के बाद भी वेतन नहीं आया है। दरअसल इस क्षेत्र में रिलायंस जियो के प्रवेश से सभी कंपनियों की हालत खस्ता हो गयी है। उसमें बीएसएनएल को खासा नुकसान हुआ है। हम सभी को याद है जब पीएम मोदी ने जियो की लांचिंग के समय उसका विज्ञापन किया था। और तस्वीरों के साथ उसके इश्तहार देश के सभी अखबारों के फ्रंट पेज पर छपे थे। उसके बाद से ही इस बात का अंदेशा हो गया था कि बीएसएनएल की क्या हालत होने वाली है।

टाइम्स आफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में कुल 20 सर्किल हैं। उनमें अकेले महाराष्ट्र सर्किल में वेतन के मद में 60 करोड़ रुपये जाते हैं। और इस तरह से देश भर में बीएसएनएल कर्मचारियों के वेतन के मद में कुल 1200 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक बीएसएनएल की आय का तकरीबन 55 फीसदी हिस्सा वेतन के मद में चला जाता है।

संकट कितना बड़ा है इसका अंदाजा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो से लगाया जा सकता है जिसमें बीएसएनएल की एक महिला कर्मचारी अपने बॉस से वेतन के सिलसिले में मिलने गई है। और वहां से नकारात्मक उत्तर पाने पर फफक-फफक कर रोने लगती है। वीडियो में उसने रोते हुए अपनी पूरी कहानी सुनायी है। 

विभाग के कर्मचारियों के संगठन आल यूनियन एंड एसोसिएशन ऑफ बीएसएनएल (एयूएबी) ने टेलीकॉम मिनिस्टर मनोज सिन्हा को पत्र लिखा है। जिसमें उसने सरकार से तत्काल फंड रिलीज करने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि दूसरे ऑपरेटर भी वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं लेकिन वे भारी मात्रा में रकम डालकर स्थितियों को काबू में किए हुए हैं।

कमोवेश यही हालत एमटीएनएल की भी है। जहां नियमित तौर पर एक महीने देर से वेतन आ रहा है। बेहद चर्चे में रही एक और पब्लिक सेक्टर की कंपनी एचएएल की भी कुछ इन्हीं स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने अपने कर्मचारियों का वेतन देने के लिए 1000 करोड़ रुपये का लोन लिया है। ऐसे में समझा जा सकता है कि पिछले पांच सालों में सरकारी कंपनियों को किस घाट लगा दिया गया है। और यह सब कुछ किया गया है निजी कंपनियों और कारपोरेट को आगे बढ़ाने के नाम पर।








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