पूर्व सीबीआई निदेशक ने डीजी फायर सर्विसेज का पद संभालने से किया इंकार,कहा-मुझे आज से ही मान लिया जाए रिटायर

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, शुक्रवार , 11-01-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। हटाए गए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने डीजी फायर सर्विसेज और सिविल डिफेंस एंड होम गार्ड्स का पद संभालने से इंकार कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि उन्हें आज से ही रिटायर मान लिया जाए।

डीओपीटी सचिव चंद्रमौलि सी को लिखे गए एक पत्र में उन्होंने कहा कि “सेलेक्शन कमेटी ने एक फैसले पर पहुंचने से पहले अधोहस्ताक्षरित शख्स को सीवीसी द्वारा रिकार्ड किए गए विवरण पर अपना पक्ष पेश करने का अवसर नहीं दिया।”

“प्राकृतिक कानून ध्वस्त कर दिया गया और फिर अधोस्ताक्षरित को सीबीआई के निदेशक पद से हटाने के लिए पूरी प्रक्रिया को पलट दिया गया।”

आलोक वर्मा का पत्र। साभार इंडियन एक्सप्रेस

इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से सामने आया वर्मा का पत्र आगे कहता है कि “कल लिया गया फैसला न केवल मेरी कार्यप्रणाली को परिलक्षित करेगा बल्कि सीवीसी के जरिये सरकार सीबीआई जैसी एक संस्था के साथ कैसा व्यवहार करती है उसकी भी गवाही देगा, जिसकी नियुक्ति सत्तारूढ़ सरकार के बहुमत के सदस्यों द्वारा की जाती है। कम से कम राज्य के लिए ये सामूहिक आत्मचिंतन का समय है।”

पूर्व सीबीआई निदेशक ने कहा कि वो “31 जुलाई 2017 को रिटायरमेंट ले लेते।” और वो “फायर सर्विसेज, सिविल डिफेंस एंड होम गार्ड्स के डीजी की सेवानिवृत्ति की उम्र पहले ही हासिल कर चुके हैं। और उसके मुताबिक उन्हें आज ही और तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त माना जाए।”

उन्होंने कहा कि “सेलेक्शन कमेटी ने इस तथ्य पर गौर नहीं किया कि पूरी सीवीसी की रिपोर्ट एक ऐसे शिकायतकर्ता के आरोपों पर आधारित है जो मौजूदा समय में सीबीआई की जांच के घेरे में है। यहां इस बात को ध्यान में रखा जाना चाहिए कि सीवीसी ने शिकायतकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित बयान को फारवर्ड कर दिया। और वो शिकायतकर्ता कभी भी माननीय जस्टिस एके पटनायक (पूरे मामले की सुपरवाइजिंग कर रहे थे) के सामने नहीं आया। इसके साथ ही जस्टिस पटनायक इस नतीजे पर पहुंचे थे कि रिपोर्ट का आखिरी नतीजा उनका नहीं है।”

उन्होंने कहा कि संस्थाएं लोकतंत्र की सबसे मजबूत और सबसे ज्यादा दिखने वाले प्रतीकों में से एक हैं। और ये कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि भारत में सीबीआई सबसे महत्वपूर्ण संगठनों में से एक है। 

एक कैरियर नौकरशाह के तौर पर चार दशकों के सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी का विचार ही मेरे लिए चालक शक्ति का काम किया है। भारतीय पुलिस की सेवा के दौरान मेरे ऊपर एक दाग नहीं लगा है। और अंडमान निकोबार द्वीप, पुदुचेरी, मिजोरम, दिल्ली और दिल्ली जेल और सीबीआई दो संगठनों का हेड रहा। 










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