मजदूर संगठनों ने किया संसद मार्च

आंदोलन , , बुधवार , 09-01-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली।ट्रेड यूनियनों के भारत बंद के दूसरे दिन भी देश के कई राज्यों में मजदूर संगठनों के नेतृत्व में कर्मचारी,मजदूर,आंगनबाड़ी और आशाकर्मियों ने सड़क पर उतर पर विरोध-प्रदर्शन किया। हड़ताल में शामिल कर्मचारियों का कहना था कि जनहित में सरकारी क्षेत्र को विस्तृत और सुदृढ़ करने की जगह उसे निजी क्षेत्र को सौंप कर संकुचित किया जा रहा है। सरकार के इस नीति से बेरोजगारी बढ़ रही है। इसके साथ ही सरकारें श्रम कानूनों को दिनोंदिन कर्मचारियों के पूंजीपतियों के हितों की रक्षा के लिए बदल रही है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि-

श्रम कानूनों में संशोधन करके उसे इस तरह बना दिया जा रहा है कि कॉरपोरेट और पूंजीपति जब चाहे तब कर्मचारियों को नौकरी से निकाल बाहर करें। केंद्र में जब से नरेंद्र मोदी की सरकार आई है तब से निजीकरण, निगमीकरण, ठेकाकरण, आउटसोर्सिंग और प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप की नीति तेजी से लागू की जा रही है।

एटक नेता अमरजीत कौर कहती हैं कि-

“केंद्र व राज्य सरकारें विभिन्न विभागों में खाली पड़े एक करोड़ पदों के भरने की बजाए छंटनी कर रही हैं। श्रम कानूनों में फेरबदल करके मजदूरों के हक के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।”

इस क्रम में दिल्ली में एक्टू, सीटू, एटक, एआईयूटीयूसी और विभिन्न मजदूर संगठनों ने संसद तक मार्च किया। संसद मार्च में माकपा नेता बृंदा करात, भाकपा की अमरजीत कौर और सीपीआई-एमएल की कविता कृष्णन शामिल थीं। इस कड़ी में पटना से मिली जानकारी के मुताबिक हड़ताल के समर्थन में विपक्ष भी सड़क पर उतर आया।

बिहार के कई जिलों में चौक-चौराहों पर विपक्ष ने केंद्र सरकार का पुतला दहन किया। विपक्ष का कहा है कि सरकार मजदूर संगठनों का हाथ बांधना चाहती है। हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि केंद्र सरकार मजदूर संगठनों के साथ गलत नीति अपना रही है। सारे सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के विलय के कारण रोजगार पर संकट आ जाएगा। बैंकों के लॉस का खामियाजा कर्मचारी क्यों भुगते? मजदूर संगठनों का आरोप है कि सरकार लेबर लॉ को तोड़कर उसमें बदलाव करना चाहती है। इससे हमें काफी नुकसान होगा।

ट्रेड यूनियनों के बंद की वजह से बिहार के कई जिलों में जाम की स्थिति बन गई। राजधानी पटना के डाकबंगला चौराहे पर चारों तरफ से गाड़ियों की लंबी कतार लगी है। कर्मचारियों और मजदूरों के हड़ताल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं भी उतर आईं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांग है कि सरकार हमारी नौकरी को स्थायी करे। 3 हजार रुपए में घर चलाना काफी मुश्किल होता है। इसी तरह मुंबई में विभिन्न मांगों को लेकर बेस्ट वर्कर्स यूनियन के 30 हजार कर्मचारी ने हड़ताल का समर्थन किया।  

चंडीगढ़ में दूसरे दिन भी  कर्मचारियों की हड़ताल जारी रही। पंजाब और हरियाणा के ट्रेड यूनियनों का दावा है कि इस हड़ताल में 10 लाख कर्मचारी और मजदूरों ने हिस्सा लिया। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के अध्यक्ष धर्मबीर फोगाट व महासचिव सुभाष लांबा ने केंद्र एवं राज्य सरकार को चेतावनी दी कि अगर पुरानी पेंशन स्कीम बहाल नही की गई और सभी विभागों में अनुबंध पर लगे कर्मचारियों को बिना शर्त पक्का नहीं किया तो देश भर के कर्मचारी 21 फरवरी को संसद का घेराव करेंगे। इसके अलावा जन अभियान चलाया जाएगा। जिसके तहत गांवों, शहरों व कस्बों में जन सभाओं का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही राज्य कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की जाएगी। जिसमें संसद घेराव व जन अभियान को सफल बनाने की कार्यनीति तैयार की जाएगी। सीआईटीयू के अध्यक्ष कामरेड सतबीर सिंह व महासचिव जय भगवान,एटक के अध्यक्ष बलदेव सिंह व महासचिव बेचू गिरी, एआईयूटीयुसी के हरी प्रकाश का दावा है कि हरियाणा में देशव्यापी हड़ताल में सात लाख औद्योगिक मजदूरों ने भागेदारी की है। हड़ताल पर रहे कर्मचारी और कर्मचारी नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की भी खबरें आ रही हैं। सूचना के मुताबिक फरीदाबाद में 8 नेताओं के खिलाफ एस्मा के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। 

  

 








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