चंद्रशेखर रावण की रिहाई का फैसला, शासन ने दिया सहारनपुर के डीएम को आदेश

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 13-09-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। भीम आर्मी मुखिया चंद्रशेखर रावण की बहुप्रतीक्षित रिहाई का समय आ गया है। यूपी की योगी सरकार ने उन्हें रिहा करने का फैसला किया है। दरअसल इसे एक बड़े राजनीतिक फैसले के तौर पर देखा जा रहा है। बहरहाल इसका हर पक्ष से स्वागत हो रहा है।

योगी ने कहा कि “फैसले को चंद्रशेखर की मां के प्रार्थनापत्र पर विचार करते हुए और मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर सहानुभूति के आधार पर लिया गया है।”

चंद्रशेखर के खिलाफ सरकार ने रासुका लगाया था। और एक बार हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है। रिहाई को लेकर भीम आर्मी ने दिल्ली में कई बार बड़ी-बड़ी रैलियां आयोजित की। इस दौरान चंद्रशेखर के गृह जिले सहारनपुर में दलित समुदाय से जुड़े लोगों को लगातार पुलिस के उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। और खास कर भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं को हमेशा निशाने पर रहे।

चंद्रशेखर को जेल में रहते 16 महीने बीत गए। यूपी के प्रमुख सचिव अरविंद कुमार ने बताया कि चंद्रशेखर उर्फ रावण को रिहा करने का आदेश सहारनपुर के जिलाधिकारी को भेज दिया गया है।

उनका कहना था कि रिहाई का फैसला उनकी मां के प्रार्थना पत्र पर लिया गया है। सामान्य अवधि के मुताबिक उन्हें 1 नवंबर 2018 को रिहा हो जाना था। लेकिन योगी सरकार ने उन्हें पहले ही रिहा करने फैसला लिया। इसके साथ ही उनके साथ बंद उनके दो साथियों सोनू पुत्र नथीराम और शिवकुमार पुत्र रामदास निवासी शब्बीरपुर को भी रिहा करने का निर्णय लिया गया है। इसे योगी सरकार द्वारा खुद को दलित पक्षधर सरकार के तौर पर पेश करने के फैसले रूप में देखा जा रहा है। 

आपको बता दें कि चंद्रशेखर रावण को मई 2017 में सहारनपुर के शब्बीरपुर में जातीय हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जबकि असल बात ये थी कि पूरी घटना को अंजाम इलाके के ठाकुरों ने दिया था। जिनकी एक रैली थी और उसी के बाद पूरे इलाके में हिंसा फैल गयी थी। जिसमें दलितों के कई घर जला दिए गए थे। चंद्रशेखर भीम आर्मी बनाकर सुर्खियों में आए। उन्हें 8 जून को हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी और फिर रिहाई को लेकर पूरे देश में बीच-बीच में हंगामा होता रहा। जिससे राजधानी दिल्ली भी प्रभावित होने से नहीं बच सकी। उनकी रिहाई के लिए जंतर-मंतर पर हुई रैलियां और सभाएं दिल्ली के लोगों पर अपना अलग छाप छोड़कर चली गयी हैं। 

राजनीति के कई पक्षों से भी उन्हें समर्थन मिला। इसमें कांग्रेस और “आप” खुलकर उनके साथ थे। हालांकि सूबे में वर्चस्व वाली राजनीतिक पार्टियों का रुख ढुलमुल रहा। बावजूद इसके चंद्रशेखर की गिरफ्तारी और उनकी रिहाई को लेकर सूबा लगातार गरम रहा। सरकार ने पिछले साल कुल 6 लोगों को एनएसए के तहत गिरफ्तार किया था।








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