अपने ऊपर लगे आरोपों को सीजेआई ने किया खारिज, कहा-खतरे में है न्यायपालिका

विवाद , नई दिल्ली, रविवार , 21-04-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर चर्चे में है। लेकिन इस बार कारण बिल्कुल दूसरा है। सुप्रीम कोर्ट में काम करने वाली एक महिला ने चीफ जस्टिस पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। सीजेआई ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है। यह काम उन्होंने बाकायदा कोर्ट की स्पेशल बैठक बुलाकर किया। अपने नेतृत्व में सुबह 10.39 मिनट पर बुलाई गई इस बैठक में उन्होंने इस आरोप पर गहरा दुख जाहिर किया। साथ ही इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नजरंदाज करने की कोशिश बताया।

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना के साथ बेंच में बैठे चीफ जस्टिस ने कहा कि “यह बिल्कुल अविश्वसनीय है। इंकार करने की स्थिति में भी मैं इतना नीचे नहीं गिर सकता।” एटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सालीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से इस मामले को गंभीरता से लेने के लिए कहा। सीजेआई ने कहा कि इसके जरिये न्यायपालिका को दरकिनार करने का एक प्रयास किया गया है साथ ही आरोप लगाकर सीजेआई आफिस को निष्क्रिय कर देने की कोशिश है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि न्यायपालिका बेहद खतरनाक दौर से गुजर रही है। सीजेआई ने कहा कि यब सब कुछ इसलिए हो रहा है क्योंकि अगले हफ्ते कुछ बेहद महत्वपूर्ण मसले सुनवाई के लिए आ रहे हैं। सीजेआई का ये इशारा किस तरफ था इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।

उन्होंने बिल्कुल भावुक अंदाज में पूछा कि 20 सालों बाद सीजेआई को यही पुरस्कार मिला है? साथ ही उन्होंने कहा कि 20 साल बाद मेरे खाते में 6,80000 रुपये हैं। कोई भी बैलेंस चेक कर सकता है। यहां तक कि मेरे चपरासी के पास भी इससे ज्यादा पैसा है। आगे उन्होंने कहा कि वह भागने वाले नहीं हैं और अपने रिटायर होने तक अपनी ड्यूटी को पूरा करेंगे। वेणुगोपाल ने कहा कि इस तरह के दो उदाहरण हैं। एक रिटायर्ड जस्टिस स्वतंत्र कुमार के खिलाफ आरोप है और दूसरा वरिष्ठ एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी वाला। और दोनों मामलों में मीडिया को मामले को प्रकाशित करने पर रोक लगा दिया गया था।

आगे उन्होंने कहा कि यहां तक कि यौन उत्पीड़न के कानून में आरोपी और पीड़ित के नाम को प्रकाशित नहीं करना है। लेकिन सामने आए इस केस की में रिपोर्टों में पूरे खुले रूप में नामों को प्रकाशित किया गया है। लॉ अफसर ने बताया कि यहां तक उन्हें सोशल मीडिया पर हमले का निशाना बनाया गया। बहस में शामिल होते हुए सीजेआई ने कहा कि इस सेशन को बुलाने की जिम्मेदारी मेरी है। इस असामान्य और अभूतपूर्व कदम को मैंने उठाया है क्योंकि चीजें बहुत आगे निकल चुकी हैं। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कुछ अपराधिक मामलों में आज शिकायतकर्ता के जमानत आवेदन पर सुनवाई और इस आरोप दोनों का समय एक दूसरे से मिल गया है। मेहता ने कहा कि आरोप बेहद बेतुके तरीके से आ रहे हैं। अपनी चिंता को जाहिर करते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अगर इस तरह के बेतुके आरोप लगते रहेंगे तो न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाएगी। और इससे लोगों के न्यायपालिका में भरोसे पर असर पड़ेगा।

जस्टिस खन्ना ने इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि जब एक केस पर फैसला होता है तो यह एक के खिलाफ जाता है और दूसरे के पक्ष में। जहां तक कोर्ट के कर्मचारियों की बात है तो उसकी प्रक्रिया बहुत लंबी है।एजी ने कहा कि जजों के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा अगर उन्हें इस तरह से निशाना बनाया जाएगा।

सीजेआई ने आगे कहा कि कोई भी जज फैसला नहीं करने जा रहा है....यह तय करना जरूरी नहीं है। वो एक साथ स्थगित कह देंगे और उसके बाद दूसरे तरीके से आ जाएंगे।

सीजेआई ने कहा कि कोई सही आदमी क्यों जज बनना चाहता है केवल प्रतिष्ठा ही ऐसी चीज थी जो हम लोगों के पास थी । और अब वही हमले के निशाने पर आ गयी है। कोर्ट अपनी तरफ से कोई आदेश पारित करने से बचता रहा। और कहा कि ये बात वो मीडिया पर अपनी सद्बुद्धि के हिसाब से काम करने के लिए छोड़ देते हैं। बेंच ने कहा कि वह इस बात की आशा करता है कि वह इस बात को सुनिश्चि करेगा कि इस तरह के आधारहीन आरोपों के आधार पर स्वतंत्र न्यायपालिका प्रभावित नहीं होगी। 

 








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Umesh Chandola :: - 04-21-2019
वाह साहब वाह ! सारे मुसलमानों पर आतंकवाद का आरोप लगाना सही ? साध्वी प्रज्ञा आदि पर आरोप लगाना सवालों के घेरे में कैसे? कतई बेकसूर मारुति सुजुकी, मानेसर , प्रिकोल के ऊपर आरोप लगा लो , 4 साल बिना चार्जशीट जेल में रखो ?अमीरों के ऊपर आच भी नहीं ? समानता का अधिकार अनुच्छेद 14 जानते हैं? जिससे प्रशान्त भूषण ने 8 चीफ जस्टिस को भ्रष्ट कहा गया था।