चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग पर विपक्ष बढ़ा आगे

मुद्दा , , शुक्रवार , 20-04-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। जस्टिस लोया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कल अपना फैसला सुनाया। ताजा फैसले से जहां सत्तारूढ़ दल को राहत मिली है वहीं विपक्ष अपने को आहत महसूस कर रहा है। इस फैसले के आने के बाद सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी पार्टी के नेता एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने शुरू कर दिए। विपक्ष सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर आज कांग्रेस के नेतृत्व में एक बैठक करने जा रहा है। जिसमें यह संभावना जताई जा रही है कि विपक्षी दल भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा पर महाभियोग प्रस्ताव लाने पर आम राय बनाएंगे। विपक्ष यदि सहमत होता है तो संसद में मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक-

राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद आज विपक्षी दलों के नेताओं और सांसदों से मिलकर महाभियोग प्रस्ताव लाने पर चर्चा करेंगे। कहा जा रहा है कि इस मुद्दे पर गुलाम नबी आजाद ही मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। संसद सदस्यों से मिलकर महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराने में वह कांग्रेस, सीपीएम, सीपीआई, एनसीपी, सपा और बसपा नेताओं से मिल रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया में लगभग 60 से अधिक संसद सदस्य पहले ही प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।  

जजेज इंक्वायरी एक्ट,1968 के मुताबिक किसी न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत लाने के लिए लोकसभा के सौ सदस्यों या राज्यसभा के पचास सदस्यों के संकल्प के माध्यम से की जा सकती है। संसद में यदि मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया तो देश के न्यायिक इतिहास की यह पहली घटना होगी, जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा।  

मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की बात पहली बार नहीं हो रही है। जनवरी माह, में सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की पहल की थी। उसी समय सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा द्वारा सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों के आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता ना अपनाने का सवाल उठाया था।

तब यह मुद्दा बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा था। लेकिन तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा था कि महाभियोग लाने के मुद्दे पर वह सभी विपक्षी पार्टियों से सहमति लेना जरूरी मानते हैं। दरअसल,

उस समय तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक महाभियोग प्रस्ताव लाने के खिलाफ थे। दोनों दलों के कदम पीछे खींचने के बाद कांग्रेस ने भी इस मसले से अपने को दूर कर लिया था। कांग्रेस के अंदर भी अभिषेक सिंघवी जैसे वकील-राजनेताओं ने याचिका पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। तब कांग्रेस के विभिन्न नेता इस प्रस्ताव पर अलग-अलग सुर अलाप रहे थे। लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि मुख्य न्यायाधीश पर महाभियोग प्रस्ताव लाने की चर्चा अब बंद हो चुकी है। लेकिन दूसरे दिन ही कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने बयान दिया कि कांग्रेस ने कभी महाभियोग प्रस्ताव से हटने की बात नहीं कही। पिछले सप्ताह पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि यह मुद्दा अभी भी खुला है। 

अब सीबीआई की विशेष अदालत में न्यायाधीश रहे जस्टिस लोया की संदिग्ध मौत पर आए फैसले के बाद मुख्य न्यायाधीश पर विपक्ष की भृकुटि तन गई है। ऐसे में महाभियोग लाने की तैयारी चल रही है। एक बार सांसदों के प्रस्ताव रखने के बाद, अध्यक्ष इसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं। यदि महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो शिकायत की जांच करने के लिए एक न्यायिक समिति का गठन किया जाएगा। जो यह निर्धारित करेगा कि महाभियोग शुरू करने के लिए मामला बनता है या नहीं।




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Mohit :: - 04-20-2018
Bjp me nyay prnali ko highjack kar kiya hai. RSS be apni vichadhara saare sansthao me bhar di hai. Jiske karan desh aaj bhugat raha hai. Is desh me savidhan ko bjp nahi pasand karti hai. RSS ko yadi pehle hi ban kar diya jata to desh me ye halat nahi bante. Congress ki ye jeeewan ki sabse badi bhul hai ki desh ko todne bale RSS sagthan ko survive karne diya gya.