चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग: विपक्ष ने सौंपा वैंकैया को ड्राफ्ट

बड़ी ख़बर , , शुक्रवार , 20-04-2018


congress-impeachment-opposition-jaitly-chief-justice

जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई शुरू कर दी है। विपक्षी नेताओं ने 7 दलों के 71 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित महाभियोगा के ड्राफ्ट को आज राज्यसभा के चेयरमैन और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को सौंपा। इसमें चीफ जस्टिस के खिलाफ कई आरोप लगाए गए हैं। जिसमें मेडिकल घोटाले में उनके शामिल होने का आरोप प्रमुख है।

हस्ताक्षर करने वाली पार्टियों में कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी), समाजवादी पार्टी (एसपी), नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), कम्यूनिस्ट पार्टी आफ इंडिया (सीपीआई), झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इनके 71 सांसदों ने महाभियोग के ड्राफ्ट पर हस्ताक्षर किया है।

चेयरमैन को सौंपे गए ड्राफ्ट में चीफ जस्टिस के खिलाफ पांच आरोप लगाए गए हैं। जिसमें प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट जिसे मेडिकल घोटाले के तौर पर भी जाना जाता है सबसे प्रमुख है। इसमें चीफ जस्टिस के शामिल होने की बात कही गयी है। इस केस में उन पर घूस के लेन-देन की साजिश का आरोप है।

आरोप में कहा गया है कि क्योंकि चीफ जस्टिस के पास प्रशासनिक और न्यायिक अधिकार था लिहाजा जांच के लिए दायर इस मामले से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई करने का फैसला करके उन्होंने जजों के लिए बनी आचार संहिता के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। 

एक दूसरे आरोप में कहा गया है कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा द्वारा 6 नवंबर 2017 को जारी एक प्रशासनिक आदेश में तारीखों से छेड़छाड़ की गयी है जो फर्जीवाड़े के दायरे में आता है।

इसी तरह के एक अन्य आरोप में कहा गया है कि अपनी वकालत के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने एक जमीन हासिल की थी जिसका शपथ पत्र बाद में झूठा पाया गया। जिसके बाद एडीएम ने 1985 में उस आवंटन को रद्द कर दिया था। जबकि बताया जा रहा है कि जस्टिस मिश्रा ने उस जमीन को 2012 में लौटाया।

इसी कड़ी में उन पर आरोप लगाया गया है कि मास्टर आफ रोस्टर के हेड होने के जरिये जस्टिस मिश्रा ने अपने पद का दुरुपयोग किया है। उन्होंने तमाम राजनीतिक तौर पर संवेदनशील मामलों को चुनिंदा जजों को आवंटित किया। जिसके नतीजे पहले से ही तय कर लिए जाते थे।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष के इस फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि विपक्ष इसे राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग दो ही स्थितियों में लाया जाता है जब वो अक्षम हो या फिर उसका कोई गलत आचरण साबित हो चुका हो।

जेटली ने इसे बदले की याचिका करार दिया। उन्होंने कहा कि जज लोया मामले में अपने झूठ के पकड़े जाने पर कांग्रेस ने इस कदम को उठाया है। उनका कहना था कि ये एक जज को धमकाना है। इसके साथ ही दूसरे जजों को ये संदेश देना है कि अगर आप हमसे सहमत नहीं हुए तो 50 सांसद मिलकर आप से भी इसी तरह से बदला लिया जाएगा।

खास बात ये है कि इस महाभियोग के प्रस्ताव पर कांग्रेस के कुछ वकील सांसदों ने हस्ताक्षर नहीं किए। इसमें सलमान खुर्शीद और अभिषेक मनु सिंघवी प्रमुख हैं। पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वो सीजेआई के महाभियोग समूह के हिस्से नहीं हैं।

  

 




Tagcongress impeachment opposition chiefjustice jaitly

Leave your comment