संसद की नाक के नीचे आरक्षण विरोधियों ने जलाई भारतीय संविधान की प्रतियां

बड़ी ख़बर , , शुक्रवार , 10-08-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। जिस बात की आशंका थी समय आगे बढ़ने के साथ ही वो और गहराती जा रही है। अभी तक देश में संविधान बदलने की ही बात हो रही थी अब उसे जलाने का भी काम शुरू हो गया है। राष्ट्र और लोकतंत्र विरोधी इस काम को संसद की नाक के नीचे उस समय अंजाम दिया गया जब संसद बाकायदा चल रही थी। बताया जा रहा है कि कुछ आरक्षण विरोधियों ने संविधान की एक प्रति को दिल्ली में जलाया है। इस मौके पर सामने आये एक वीडियो में इन लोगों को आरक्षण विरोधी नारे लगाते हुए देखा जा सकता है।

पहले इन लोगों ने कागज के कुछ पन्नों को जलाया फिर संविधान के पहले पेज को आग के हवाले कर दिया। अभी तक बीजेपी और आरएसएस के कुछ लोग खुलकर और बड़े नेता दबी जुबान से संविधान बदलने की बात किया करते थे। लेकिन अब उनकी सत्ता में उसे जलाने का भी काम शुरू हो गया है।

बीजेपी ने पिछले चार सालों में राष्ट्रवाद का सबसे ज्यादा ढिंढोरा पीटा था। जेएनयू से लेकर अलीगढ़ और बीएचयू से लेकर हैदराबाद तक उसने इसी मुद्दे पर परिसर में छात्रों का उत्पीड़न किया। लेकिन अब जब उसके समर्थक इस तरह से खुलेआम राष्ट्र के प्रतीकों की न केवल धज्जियां उड़ा रहे हैं बल्कि उनको खुले तौर पर अपमानित कर रहे हैं। तब कोई भी उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है। पूरा मीडिया चुप है और सत्ता प्रतिष्ठान ने तो मानो अपने मुंह पर ताला ही जड़ लिया है। जेएनयू में छोटी-छोटी बात पर रेड डालने वाली दिल्ली पुलिस के जवान भी दरबे में चले गए हैं। या तो उन्हें कुछ दिख नहीं रहा है या फिर वो जानबूझ कर देखना नहीं चाहते हैं।

हालांकि सोशल मीडिया पर इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई है। वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक न्याय के अगुवा दिलीप मंडल समेत कुछ लोगों ने कड़े शब्दों में इसका प्रतिकार किया है। और उन्होंने कल इसका विरोध करके का ऐलान भी कर दिया है।:

दिलीप मंडल-

हम, भारतीय गणराज्य के साधारण नागरिक, जो संविधान और इस देश की संसद तथा कानून में आस्था रखते हैं, इस बात से बेहद नाराज और दुखी हैं कि कुछ आरक्षण विरोधी देशद्रोहियों ने संविधान को जलाने का अपराध किया है।

हम कल यानी शनिवार को सुबह नौ बजे दिल्ली के संसद मार्ग थाने में पुलिस से यह मांग करेंगे कि उन लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दायर करके मामले की विवेचना करे और अभियुक्तों को कोर्ट तक ले जाएं।

जो भी प्रबुद्ध नागरिक, वकील, टीचर, रिसर्च स्कॉलर, छात्र, लेखक या अन्य नागरिक इस मांग से खुद को सहमत पाते हैं या कल सुबह नौ बजे संसद मार्ग थाने पहुंचना चाहते हैं वे इस पोस्ट के कमेंट बॉक्स में इसकी सूचना दें।

जय फुले, जय भीम, जय भारत!

चौथीराम यादव, साहित्यकार-

संविधान तो अघोषित रूप से कब का जला चुके है। (चूंकि डरने जैसी बात कोई है नहीं,सो...)

आज खुलेआम भी जला कर साफ संदेश दे दिया! (पपूगुगो आह्लादित हुए होंगे) वैसे है यह राष्ट्र का अपमान ही।

डॉ. अम्बेडकर का विरोध भी और मनुस्मृति जलाने का बदला भी।

क्या 4 साल से मनुवादी संविधान से देश को नहीं चलाया जा रहा हैं? हमारी चुप्पी बहुत मंहगी पड़ेगी!!!

 




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???????? ????? ????? :: - 08-12-2018
भारतीय मूल निवासी भाईयों देख लो मनुवाद का असली चेहरा पूरे देश के मूल निवासीयोग से मेरा अनुरोध है कि एक जुट होकर भीमानंद कोरे गाँव का इतिहास दुहराने होगा दोस्तों जय भीम

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