डॉ. कफील के छोटे भाई को गोरखपुर में गोली लगी, पुलिस के रवैये के चलते 3 घंटे बाद शुरू हो पाया इलाज

पहली ख़बर , गोरखपुर, सोमवार , 11-06-2018


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मनोज कुमार सिंह

गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कालेज के आक्सीजन कांड में गिरफ्तारी के कारण चर्चित हुए मेडिकल कालेज के बालरोग विभाग के प्रवक्ता व एनएचएम के नोडल अधिकारी रहे डा. कफील अहमद के छोटे भाई काशिफ जमील को कल रात 10.30 बजे गोरखनाथ क्षेत्र में गोली मार दी गई। दो हमलावरों ने उन पर तीन गोलियां चलायीं जिससे वह बुरी तरह घायल हो गए। घायल काशिफ को एक निजी नर्सिंग होग में भर्ती कराया गया है। आपरेशन के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बतायी जा रही है।

गोरखपुर शहर के बसंतपुर मोहल्ला निवासी डा. कफील अहमद के छोटे भाई काशिफ जमील बिजनेस मैन हैं और इनवर्टर व बैट्री का कारोबार करते हैं। डा. कफील चार भाई हैं। सबसे बड़े अदील अहमद खान हैं और उसके बाद डा. कफील अहमद खान हैं। काशिफ जमील तीसरे नम्बर पर हैं। सबसे छोटे फजील अहमद खान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मेडिकल कालेज में एमबीबीएस करने के बाद सीनियर रेजीडेंट हैं।

मिली जानकारी के अनुसार काशिफ जमील किसी काम से गोरखनाथ क्षेत्र में गए थे। वह बाइक से थे। वह घर लौट रहे थे कि जेपी हास्पिटल के पास ब्राउन कलर की स्कूटी पर सवार दो हमलावरों ने उन पर तीन गोलियां चलायीं। एक हमलावार चेहरे पर गमछा बांधे हुए था जबकि दूसरा हेलमेट पहने था। कासिफ जमील को दो गोली कंधे और हाथ में और तीसरी एक दूसरी गर्दन के पास लगी। वह बुरी तरह घायल हो गए। राहगीरों की मदद से वह किसी तरह टेम्पो से विंध्यवासिनी नगर स्थित स्टार नर्सिंग होम पहुंचे जहां चिकित्सकों ने उनका तुरन्त इलाज शुरू किया।

काशिफ जमील के बड़े भाई अदील अहमद खान ने बताया कि वह और डा. कफील आज कुशीनगर गए हुए थे। वह घर लौटे ही थे कि इस घटना की जानकारी हुई। उन्होंने कहा कि चूंकि काशिफ जमील बुरी तरह घायल हैं, इसलिए घटना के बारे में उनसे कोई जानकारी नहीं मिल पायी है। घटना की वजह भी पता नहीं चल पा रही है। अदील अहमद खान ने कहा कि उनका पूरा परिवार बीआरडी मेडिकल कालेज के आक्सीजन कांड के बाद से मुसीबतों में है। डा. कफील खान के जमानत पर रिहा होने के बाद वह लोग लगातार खतरे की आशंका में जी रहे हैं। यह घटना डॉ कफील को चुप कराने के नीयत से अंजाम देने की कोशिश भी हो सकती है।

डा. कफील के भाई का अस्पताल में इलाज।

बदमाशों की गोली से बुरी तरह घायल डा. कफील के भाई काशिफ जमील के आपरेशन में पुलिस के रवैये से तीन घंटे से ज्यादा विलम्ब हुआ। मेडिको लीगल कराने के लिए पुलिस, काशिफ जमील को पहले जिला अस्पताल और फिर बीआरडी मेडिकल कालेज ले गई। इस कारण उनके गले में फंसी गोली निकालने के कारण आपरेशन रात ढाई बजे तक नहीं हो पाया।

पुलिस के इस रवैये से डा. कफील और उनके परिजन बेहद आक्रोशित दिखे। परिजनों ने कहा कि यदि काशिफ को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदार पुलिस होगी।

एक गोली उनके गर्दन में लगी जबकि दो गोलियां हाथ और कंधे में लगी थी। गर्दन में लगी गोली काशिफ जमील के लिए जानलेवा हो सकती थी। इसलिए चिकित्सकों की राय थी कि जल्द से जल्द आपरेशन कर गोली निकाल दी जाए। गोली के असर से काशिफ जमील के हाथ में झनझनाहट थी और धीरे-धीरे उनका हाथ काम करना बंद कर रहा था।

इसी बीच स्टार हास्पिटल पहुंची पुलिस काशिफ जमील का मेडिकोलीगल कराने के लिए उन्हें जिला अस्पताल ले गई। वहां उनका मेडिको लीगल हो गया। इसके बाद परिजन काशिफ को आपरेशन के लिए स्टार हास्पिटल लाना चाहते थे। परिजनों के अनुसार पुलिस ने कहा कि काशिफ का एक और मेडिको लीगल बीआरडी मेडिकल कालेज में होगा और उन्हें वहां ले जाया जाएगा।

परिजनों ने इसका विरोध किया तो वहां मौजूद सीओ गोरखनाथ भारी पुलिस बल बुला लिया और काशिफ जमील को बीआरडी मेडिकल कालेज ले गई। वहां इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों ने जिला अस्पताल में मेडिको लीगल हो जाने के बाद दोबारा मेडिको लीगल किए जाने से मना कर दिया और कहा कि परिजन जहां मरीज का इलाज कराना चाहते हैं, उसे ले जा सकते हैं। इसके बाद काशिफ जमील को दोबारा स्टार हास्पिटल ले जाया गया। इस कारण करीब तीन घंटे तक काशिफ का आपरेशन रूका रहा।  इस दौरान काशिफ की हालत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गए।

समाचार लिखे जाने तक काशिफ को दुबारा स्टार हास्पिटल ले जाया गया और जहां उनका आपरेशन हो गया था और अब वो खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। हालांकि कुछ न्यूरो संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। डाक्टर उसकी भी जांच कर रहे हैं। 

(मनोज कुमार सिंह संस्कृतिकर्मी और पोर्टल न्यूज़लाइन के संपादक हैं। आप आजकल गोरखपुर में रहते हैं।) 




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