गुजरात में 4000 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा,मूंगफली के नाम पर बोरियों में भरा गया था मिट्टी और पत्थर

ख़ास रपट , नई दिल्ली, शुक्रवार , 10-08-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। गुजरात में एक नया घोटाला सामने आया है। मूंगफली घोटाले के नाम से चर्चित हो रहे इस घोटाले में तकरीबन 4000 करोड़ रुपये की हेरा-फेरी होने का अनुमान है। बताया जा रहा है कि पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मूंगफली की एमएसपी में तकरीबन दो गुना की सरकार ने बढ़ोतरी कर दी थी जो 550 रुपये का भाव था उसे 900 रुपये कर दिया गया था। लेकिन ये सिर्फ चुनाव तक ही सीमित रहा। फिर जैसे ही चुनाव खत्म हुआ और नई सरकार गठित हो गयी दाम फिर पुराना कर दिया गया। लेकिन इस बीच बताया जा रहा है कि खरीद-फरोख्त के जरिये एक बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया। मूंगफली के नाम पर मिट्टी और पत्थर बोरियों में भरकर गोदामों में ठिकाने लगा दिए गए। और जब उसका भी पर्दाफाश होने लगा तो कई गोदामों आग लगा दी गयी।

गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता परेश धनानी ने बृहस्पतिवार को दिल्ली में इस मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 24 सितंबर 2017 को 900 रुपये में 20 किलो एमएसपी की दर पर मूंगफली खरीदने की घोषणा की गयी। उसके बाद 24 अक्तूबर 2017 को भारत सरकार की नोडल एजेंसी नैफेड ने राज्य सरकार की सलाह और सिफारिश पर सूबे की पांच को-आपरेटिव संस्थाओं GUJCOT, GUJCOMASOL, GUJPRO, Banas Dairy और Sabar Dairy को नोडल एजेंसी बनाया। इन पांच नोडल एजेंसियों ने मिलकर 7 लाख 62 हजार मीटरी टन मूंगफली का नयी एमएसपी पर भंडारण किया। खास बात ये है कि इन पांचों एजेंसियों में अकेले GUJKOT ने तकरीबन इसके 80 फीसदी हिस्से यानी 5 लाख टन का भंडारण किया। ये गुजरात सरकार की सोसाइटी है। जिसमें पूरे राज्य स्तर पर एमडी से लेकर चपरासी तक पूरे विभाग में महज छह लोग हैं। उन्होंने पांच लाख टन की मूंगफली खरीद ली।

जबकि बड़ा विभाग होने के साथ-साथ अनुभवी स्टाफ GUJCOMASOL के पास था। लेकिन उसे महज 1 लाख 17 हजार मीटरी टन की खरीद का आर्डर मिला। बाकी तीन संस्थाओं ने मिलकर 5 प्रतिशत यानी 85 हजार मीटरी टन का भंडारण किया। फिर इसी आंकड़े और तस्वीर से नतीजा निकाला जा सकता है कि जिसके पास स्टाफ नहीं था, अनुभव भी नहीं था उसको 80 फीसदी के भंडारण का आर्डर दिया गया। जबकि सक्षम संस्थाओं को दरकिनार कर दिया गया।

अब इन पांचों नोडल एजेंसियों ने राज्य की तकरीबन 169 सोसाइटियों के द्वारा गुजरात के भीतर प्रोक्योरमेंट खरीद केंद्र बनाए। और उनके जरिये खरीद शुरू की। फिर 400 से ज्यादा खरीद केंद्रों पर 24-25 अक्तूबर 2017 से खरीद शुरू हुई। सबसे खास बात ये है कि इन नोडल एजेंसिंयों ने जिन सोसाइटियों को ये काम सौंपा उनमें से कई रजिस्टर्ड तक नहीं थीं। कई तो खत्म हो गयी थीं। एक जानकारी के मुताबिक गुजरात बीजेपी के संगठन महासचिव जो आरएसएस के प्रतिनिधि होते हैं, उनके गृहनगर लख्तर में 11 लोगों की कमेटी कागज पर बनाकर उसको खरीद की इजाजत दे दी गयी।

और यहां तक कि खरीद के दौरान आन लाइन रजिस्ट्रेशन में भी किसानों के साथ कांग्रेस या बीजेपी से जुड़ाव के आधार पर पक्षपात किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में तय मानदंडों और गुणवत्ता का भी कोई ख्याल नहीं रखा गया। और बाद में उनमें से बहुत ज्यादा मूंगफली भी गोदामों तक नहीं पहुंची। गुजरात में 279 गोदामों में प्रोक्योरमेंट करके मूंगफलियां रखी गयी थीं। बताया जा रहा है कि उसका एक बड़ा हिस्सा बीजेपी समर्थकों की मिलों को दे दिया गया जिन्होंने उसकी पिराई करने के बाद तेल बनाकर बेंच दिया। ये एक सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। क्योंकि जिन गोदामों में मूंगफलियों का स्टोरेज किया गया था वहां बोरियों में मूंगफली की जगह मिट्टी, पत्थर और कंकड़ मिले।

परेश धनानी विरोध करते हुए।

इन गोदामों को गुजरात वेयर हाउस कारपोरेशन और GUJKOT ने मिलकर हायर किया था। जिसमें उन्होंने कई जगहों पर प्राइवेट प्रापर्टी को गादमों के लिए रेंट पर लिया था। जिसमें बताया जा रहा है कि कई जगहों पर बीजेपी के लोगों ने बिचौलियों का काम किया। धनानी का आरोप है कि उन्होंने सबलेट में गोदाम लिए और जिसमें न केवल उन्हें ऊंचा दर मिला बल्कि गोदामों में मूंगफली की जगह मिट्टी, पत्थर और कंकड़ भरकर पूरा माल भी हड़प लिया।

मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। जब घोटाला सामने आने लगा और लगा कि इसमें सत्ता में बैठे बड़े-बड़े लोग बेनकाब हो जाएंगे। तो गोदामों में आग लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गयी। गांधीनगर गोदाम जली। जाम नगर के हाफा में गोदाम में आग लगी। राजकोट का गोदाम जलकर स्वाहा हो गया। फिर गोंडल के गोदाम की बारी आयी। उसे भी आग के हवाले कर दिया गया।

मुख्यमंत्री के गृहनगर राजकोट में जहां कि पूरे बाजार में सीसीटीवी सर्विलेंस हैं वहां 25 लाख मूंगफली भरने वाले बैगों को जलाया गया। इस तरह से 280 गोदामों में कहीं किसी तरह का सुरक्षा प्रबंध नहीं था। बताया जा रहा है कि इन गोदामों में मूंगफली की जगह बोरियों में मिट्टी भरी हुई थी। और बाद में जो कुछ मूंगफली बची हुई थी। साढ़े तेरह सौ प्रति 20 किलोग्राम के हिसाब से खरीदी गयी इन मूंगफलियों को आखिर में 680 से लेकर 740 रुपये प्रति 20 किलो के घाटे में बेच दी गयी। ये सब कुछ व्यापारियों को डरा-धमका कर पूरा कर लिया गया।

इस तरह से गोदामों में रखी 10 लाख मीटरी टन मूंगफली में तकरीबन साढ़े चार लाख मीटरी टन मूंगफली में मिट्टी, पत्थर और कंकड़ के होने की आशंका जाहिर की जा रही है। दरअसल कुछ गोदामों में व्यापारी जब डिलीवरी लेने गए तो उन्हें मामले को समझते देर नहीं लगी। लिहाजा उन्होंने उसकी वीडियो क्लिप बना ली थी। पेडला गोदाम में 35 किलो के बैग में 20 किलो मिट्टी और पत्थर मिले।

सबसे खास बात ये है कि जले गोदामों में पुलिस ने झांकना भी नहीं जरूरी समझा। केवल गोंडल गोदाम में पुलिस पहुंची थी। बाकी पांच में विपक्ष की लिखित शिकायत के बाद भी सरकार ने कोई कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा। और फिर ज्यादा हंगामा मचाने पर उसे अपनी ही पालतू एजेंसी पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया। लेकिन अभी तक उसने किसी एक भी शख्स को न्याय के कटघरे में लाना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने सीधे-सीधे इसके तार मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े होने का आरोप लगाया।

इस सिलसिले में एक आडियो क्लिप बाहर आयी है। जिसमें मुख्यमंत्री, दो कैबिनेट मंत्री, एक सांसद और एक बीजेपी के जिलाध्यक्ष के साथ मोदी के भी दो बार नाम सामने आए हैं।  

धनानी ने कहा कि इस घोटाले के संदर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर, कृषि मंत्री, राज्यपाल तक से गुहार लगायी। लेकिन उन्होंने दिए गए आवेदनों का जवाब तक देना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने इस पूरे मामले की हाईकोर्ट के मौजूदा जज के नेतृत्व में न्यायिक जांच कराने की मांग की है।




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