पंड्या हत्याकांड में नये खुलासे के बाद वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत ने जागृति को लिखा पत्र, कहा-आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं थी

विशेष , अहमदाबाद, सोमवार , 12-11-2018


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कलीम सिद्दीकी

(गुजरात के पूर्व गृहमंत्री हरेन पंड्या हत्याकांड केस में एक नया मोड़ तब आ गया जब आज़म खान नामक गवाह ने कोर्ट को बताया कि "हरेन पंड्या को मारने की सुपारी पूर्व आईपीएस डीजी वंजारा ने सोहराबुद्दीन को दी थी।" जो बात गवाह ने कही यह बात अफवाहों, सरकारी महकमों की चर्चाओं और राजनैतिक गलियारों में आम थी। इस प्रकार की बातें पिछले 15 वर्षों में रही हैं। हत्याकांड के पीछे वंजारा के अलावा अभय चूडास्मा और अमित शाह का हाथ होने का शक किया जाता रहा है। यदि गवाह का बयान सही है तो इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड के तार देश के सबसे ताकतवर व्यक्ति तक पहुंच सकते हैं। गवाह के बयान से सबसे बड़ा प्रश्न यही उठता है कि वंजारा पंड्या की हत्या की सुपारी सोहराबुद्दीन को क्यों देगा? जबकि वंजारा और पंड्या के बीच कोई दुश्मनी हो.....ऐसा कभी भी नहीं देखा गया।

क्या यह राजनैतिक हत्या थी? जिसके चलते कभी औरंगज़ेब ने सत्ता की खातिर दाराशिकोह को मरवा दिया था। वरिष्ठ पत्रकार एवं हरेन पंड्या के मित्र प्रशांत दयाल ने हरेन की पत्नी जागृति पंड्या को लिखे गए खुले पत्र में बहुत सी बातें कह डाली हैं। इसके हिसाब से पंड्या हत्याकांड राजनैतिक षड्यंत्र का हिस्सा मालूम होता है। दयाल का यह खुला पत्र मेरा न्यूज़ डॉट कॉम में प्रकाशित हुआ है खुले पत्र का शीर्षक है "तमे आवा करवा नी जरूर नहती" (आप को ऐसा करने की जरूरत नहीं थी)। 

आप को बता दें कि जागृति पंड्या इस समय बीजेपी में हैं। और उन्हें गुजरात सरकार ने बाल एवं महिला विकास विभाग का चेयरमैन बनाया है। पत्र से प्रतीत होता है कि दयाल जागृति पंड्या के इस निर्णय से खुश नहीं हैं। गवाह के बयान के बाद जागृति कुछ भी बोलने से बच रही हैं। प्रशांत दयाल ने यह पत्र गुजराती भाषा में लिखा है जिसका यहां हिंदी अनुवाद दिया जा रहा है। जिसे जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी ने किया है-संपादक) 

जागृति बहन,

ऐसे तो मैं और मेरे जैसे हरेन के मित्र आप को भाभी के नाम से संबोधन करते हैं इसके बावजूद पत्र लिखते समय आपको बहन के नाम से संबोधन कर रहा हूं। साल 2003 से पहले मैं आपके घर हरेन से मिलने आता जाता था तो आप से भी बातचीत हो जाती थी। 26 मार्च 2003 की सुबह भी मैं और मेरे सभी मित्र हैरान थे हरेन को गोली मारी गई थी। यह समाचार जैसे ही मिला मन से आवाज़ निकली ईश्वर बचा लेना लेकिन ईश्वर भी कभी-कभी निष्ठुर हो जाते हैं। हमारी प्रार्थना घर की दीवारों से टकरा कर वापस लौट आती है।

मैं समझता हूं हरेन मेरा मित्र था लेकिन आपका पति और दो बच्चों का पिता भी। उस समय बच्चे भी छोटे थे। उस समय आप की परिस्थिति समझी जा सकती थी। मेरे अंदर इतनी भी हिम्मत न थी कि आपको आश्वासन दे सकूं। इसीलिए मैं मिलने भी नहीं आया। न ही फोन किया। ऐसी हालत में कैसे कहता हिम्मत रखना। क्योंकि जो स्त्री अपना सब कुछ गवां दी हो उसकी वेदना आप से बेहतर कौन समझ सकता है।

हरेन के पिता विट्ठल भाई के लिए भी बड़ा आघात था। खुद के बेटे को कन्धा देना किसी भी पिता के लिए कितना पीड़ादायक होता है। मैं समझ सकता हूं वह जाहेर में रो-रो कर कहते थे हरेन की हत्या नरेंद्र मोदी ने कराई है। उस समय मेरा मन इस बात को मानने को तैयार न था। हरेन पंड्या ने अपनी एलिस ब्रिज विधानसभा सीट को नरेंद्र मोदी के लिए खाली करने से मना कर दिया था। उस दिन से ही मोदी - पंड्या आमने-सामने थे। जिस कारण हरेन की हत्या नरेंद्र मोदी ने कराई है। शक होना स्वाभाविक है। विट्ठल भाई अपने जीवन के अंत तक अपने बेटे के हत्यारे को सजा दिलाने के लिए लड़ते रहे। उस समय आप बिल्कुल शांत थीं। आपको अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता थी। आप शांत थीं इसका अर्थ कत्तई नहीं था कि आप हरेन को न्याय नहीं दिलाना चाहती थीं लेकिन संयोग ही ऐसा था। 

बच्चे बड़े हुए। आप बाहर निकलीं। आप समझदार थीं। आपको मालूम था कि ससुर विट्ठल भाई की तरह केवल आरोप लगाने से परिणाम नहीं आएगा। मैं आप के प्रयत्न का गवाह हूं।  आप हरेन पंड्या की फाइल लेकर एक वकील से दूसरे वकील के ऑफिस घूम रही थीं। हम भी मिलते थे। चर्चा करते थे कि कैसे आगे बढ़ें। पुलिस और सीबीआई द्वारा पकड़ा गया असगर अली जिसने हरेन को गोली मारी थी वह सिर्फ एक मोहरा है। हम दोनों ऐसा मानते थे। हमें शक था हरेन की हत्या के पीछे अमित शाह हो सकता है। हमें केवल शक था। हमारे पास उस समय भी और आज भी कोई आधार नहीं है। हरेन की हत्या असगर ने की है या नहीं । यदि की है तो किसके इशारे पर यह जानना महत्वपूर्ण था। आपकी हिम्मत और प्रयत्न की दाद देनी होगी। एक स्त्री होते हुए आप अपने पति के हत्यारे से मिलने जेल पहुंच गईं। आपने असगर से खूब विनती किया। उसका केस भी लड़ने की तैयारी बताई। फिर भी वह आपके सामने कुछ नहीं बोला। 

जब गुजरात हाईकोर्ट ने असगर सहित सभी को निर्दोष छोड़ दिया तो हमारे मन का शक और भी मजबूत हो गया। जब असगर ने हरेन को नहीं मारा तो किसने मारा। आप दिल्ली सीबीआई के धक्के कम नहीं खायीं। उस समय यूपीए की सरकार थी। अहमद पटेल नाम का सिक्का बोलता था। इस मामले में सीबीआई दोबारा जांच करे, सुप्रीम में अपील करे। इसलिए आप कई बार इनसे भी मिलीं थीं लेकिन कांग्रेस वाले भी नालायक साबित हुए। उन्हें केवल हरेन के नाम से मोदी और अमित शाह को गाली देने के सिवाय किसी और चीज़ में दिलचस्पी नहीं थी। उन्होंने भी किसी प्रकार की मदद नहीं की। मेरी और हरेन की मित्रता उस समय से थी जब वह कॉर्पोरेटर थे। मैं प्रदीप सिंह जडेजा और बिमल रोज़ ही मिलते थे। 

मेरा काम पत्रकारिता है। कई बार मैं भाजपा और हरेन के खिलाफ लिखता था। वह मेरे काम को जानता था। कभी-कभी नाराज़ भी होते थे। फिर खुद को समझा लेते थे। मेरे जैसे पत्रकार के जीवन में ख़राब दिन भी आते हैं। हरेन मेरे बुरे समय का साथी था। हमारे संबंध तूं तुकार वाले थे। मैं आपके साथ इसीलिए खड़ा था क्योंकि मुझे अपनी मित्रता का क़र्ज़ चुकाना था। हम लोग हरेन को न्याय दिलाने के लिए प्रयत्न कर रहे थे। हमारा इरादा नरेंद्र मोदी और अमित शाह से बदला नहीं लेना बल्कि जिसने हरेन की हत्या की है वह पकड़ा जाये और सजा हो ऐसी ही इच्छा थी। हम हों या कोई अनजान व्यक्ति सभी को समझ में आएगा कि हरेन की हत्या से किसे लाभ होने वाला था लेकिन हमारे पास कोई आधार न था। कई बार हम लोग थक हार कर बैठ गए।

अटल बिहारी वाजपेयी, मोदी और डीजी वंजारा।

हरेन की हत्या किसने की और क्यों कराई गई हम ढूंढ नहीं पाए। जिसका अफसोस हमें आज भी है लेकिन मुझे और मेरे मित्रों को सदमा उस समय लगा जो भाजपा नेता तुम्हारे पति की हत्या करवाने के लिए शक के घेरे में थे और जो भाजपा नेता हरेन की हत्या के बाद तुमसे दूर रहने का प्रयत्न करने लगे थे। तुम्हारे मुश्किल समय में हरेन के खास गिने जाने वाले अनगिनत मित्र और बीजेपी नेता दूर जाते रहे। कारण कि आप के साथ रहने का अर्थ था नरेंद्र मोदी और अमित शाह से दुश्मनी लेना। समय बदला और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए और अमित शाह राष्ट्रीय अध्यक्ष। ऐसे तो आप मेरे साथ छोटी-छोटी बातों पर चर्चा करती थीं लेकिन वह बात आपने कभी नहीं कही। एक दिन सुबह जब मुझे खबर मिली कि आप भाजपा में जुड़ गए हो तो मैं हैरान था।

आप भाजपा में जुड़ीं और बोर्ड की चेयरमैन भी हो गईं। मेरा मन कुछ भी समझ सके ऐसी स्थिति में नहीं था। सवाल तुम्हारे भाजपा में जुड़ने का नहीं था। जब भी राष्ट्रीय नेता अहमदाबाद आते और हरेन केस के सिलसिले में तुम उनसे मिलने का प्रयत्न करती तो यही भाजपा के नेता पुलिस से कह कर तुम्हें डिटेन कराते थे। हमारे पास कोई आधार न था फिर भी हम लोग मानते थे कि हरेन की हत्या किसी भाजपा नेता ने ही कराई है। आपने ऐसा क्यों किया यह सवाल मैं कई बार अपने आप से पूछ चूका हूं। आप के सामने ब्रेड बटर का सवाल नहीं था। भाजपा में जुड़ो और चेयरमैन बनो तभी तुम्हारा चूल्हा जलेगा ऐसा भी न था। तो फिर आपने ऐसा क्यों किया? कभी कभी मेरे मन में ऐसी भी शंका हुई है कि आप हरेन की मौत के नाम पर भाजपा नेताओं पर दबाव बनाकर पद और ओहदा लेना तो नहीं चाहती थीं ? लेकिन ऐसे गलत विचार को मैंने निकाल दिया क्योंकि आप ऐसा नहीं कर सकतीं।

हो सकता है आप भाजपा में गयीं और चेयरमैन बनीं  जिस कारण आपने मेरे साथ बात करना लगभग बन्द ही कर दिया है। आपको ऐसा भी लगता होगा कि तुम्हारे इस निर्णय के बारे में तुमसे मैं पूछूंगा तो आप क्या जवाब दोगे। तुम्हें मुझे जवाब देना है यह जरुरी नहीं है। इसके बावजूद बोलना ये आप का शिष्टाचार भी था। सरकारी कार में सरकारी ऑफिस में जाती होंगी और हरेन की हत्या किसने की यह बात तो आप भूल ही गए लेकिन मैं नहीं भूल सका। सिस्टम के सामने मैं भी लाचार होने के कारण कुछ नहीं कर सका। कई बार मुझे अपनी इस लाचारी पर गुस्सा भी आया। पिछले शनिवार को मुम्बई कोर्ट में सोहराबुद्दीन शेख़ के साथी आज़म खान ने बताया हरेन पंड्या की हत्या पूर्व आईपीएस डीजी वंजारा के इशारे पर हुई। विस्फोट किया उसी समय तुरंत ही मुझे आप की याद आ गई।

वर्तमान में आज़म सच बोल रहा है। यदि यह मान लिया जाये तो वंजारा और हरेन में कोई दुश्मनी नहीं थी तो वंजारा ने हरेन की हत्या क्यों करवाई। यह महत्त्व का सवाल है। हम लोगों का शक  और सामने आए तथ्य अमित शाह की ओर ले जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में आप उनके साथ कैसे बैठ सकती हो। मान लिया जाये कि विठ्ठल भाई की तरह आप भी लड़ते-लड़ते मर जायेंगी। लेकिन जिस पर हरेन की हत्या करवाने का शक हो ऐसी कौन सी बात है जो तुम्हें वहां बैठने के लिए मजबूर करती है। या सत्ता का लालच  है। इस पत्र को पढ़ कर आप को ख़राब जरूर लगेगा लेकिन मेरी बात पर विचार करना। देर कभी नहीं होती। गलती सब करते हैं बस सुधार लेने की तैयारी होनी चाहिए।

जब भी हम लोग हरेन से मिलेंगे जहां (स्वर्ग) वह है तब हम हरेन से कह सकें दोस्त तुम्हारे लिए खूब लड़े और लड़-लड़ कर थक गए और हारे भी। लेकिन कभी भी समझौता नहीं किया। ऐसा कुछ करने का प्रयास करो ताकि ऐसा कह सकें।

बस अब विराम

प्रशांत दयाल

 










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