तेल आयात मामले में ईरान ने दी भारत को विशेषाधिकार का दर्जा वापस लेने की धमकी

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, शुक्रवार , 13-07-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। तेल आयात मामले में ईरान ने भारत को धमकी दी है। उसने कहा है कि अगर भारत तेल आयात में कटौती किया तो उसको मिलने वाला विशेषाधिकार का उसका दर्जा खत्म कर दिया जाएगा। इसके साथ ही उसने चाबहार बंदरगाह के विस्तार के लिए होने वाले निवेश के वादे को पूरा न करने के लिए भी भारत सरकार की आलोचना की है।

मंगलवार को ईरान के डिप्टी एंबेसडर मसूद रेज़वानियां राहाघी ने कहा कि अगर भारत सऊदी अरब, रूस, इराक और अमेरिका जैसे देशों से तेल आयात करने की कोशिश करता है तो ईरान की तरफ उसको मुहैया कराया जाने वाला विशेषाधिकार खत्म कर दिया जाएगा।

पीटीआई के हवाले से आई खबर में उन्होंने कहा कि ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि चाबहार बंदरगाह के विस्तार के लिए किए जाने वाले निवेश के वादे को भारत नहीं पूरा कर रहा है। जिसका नतीजा ये है कि संपर्क का ये प्रोजेक्ट अभी तक नहीं पूरा हो सका। अगर चाबहार बंदरगाह में उसका सहयोग और संपर्क सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण प्रकृति का है तो भारत को तत्काल इस दिशा में महत्वपूर्ण उपाय करने चाहिए।

दरअसल अमेरिका ने ईरान से अपना समझौता तोड़कर उस पर फिर से आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया है। इस कड़ी में उसने दूसरे देशों से भी ईरान के साथ अपने रिश्तों को सीमित करने का सुझाव दिया है। भारत सरकार भी अमेरिका के दबाव में आकर ईरान के साथ अपने वर्षों पुराने घनिष्ठ रिश्तों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है।

इस कड़ी में उसने ईरान से तेल के आयात में कटौती कर दी है। आपको बता दें कि भारत अपनी तेल की जरुरतों का 80 प्रतिशत  हिस्सा आयात के जरिये पूरा करता है। ईरान तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर है जो भारत को तेल निर्यात करता है। इस तरह से हिंदुस्तान की 15 प्रतिशत तेल की जरुरत ईरान पूरी करता है। खास बात ये है कि मौजूदा आयात में कटौती की मोदी सरकार ने ना तो कोई सूचना दी और न ही उसकी कोई घोषणा की या फिर उस पर सफाई ही दी।

कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उसने कहा है कि इसमें न केवल देश और हमारी जनता का नुकसान है बल्कि देश एक विश्वसनीय मित्र भी खो देगा। 

कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा कि राजनीति में स्थितियां और चुनौतियां आती हैं जिनसे पता चलता है कि जो नेता अपने आपको शेर कहता है, वो शेर है या केवल कागजी शेर है? ईरान से तेल के आयात पर कटौती लगाकर पीएम मोदी ने साबित कर दिया कि वो शेर नहीं, कागजी शेर हैं, जो अमेरिका के दबाव में आकर भारतवर्ष के राष्ट्रीय हित का बलिदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार हिंदुस्तानियों के हितों के विरुद्ध अमेरिकियों के सामने घुटने टेक रही है। 

आपको याद होगा कि 2012 में भी ऐसी ही स्थिति आई थी, जब अमेरिका और ईरान के रिश्तों में तनाव था। डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने एक सफल विदेश नीति के द्वारा भारत के राजनयिक हित को महत्व देते हुए ईरान व अमेरिका को बराबर रखा। लेकिन आज मोदी सरकार ने अमेरिका के दबाव में आकर राष्ट्रीय हित के साथ समझौता किया है। इस बात का उत्तर मोदी सरकार को देना पड़ेगा। ईरान से तकरीबन प्रतिदिन 7 लाख 70 हजार बैरल कच्चा तेल आता था, आज वो सिर्फ 5 लाख 70 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया है। 

मोदी सरकार देशवासियों को बताए कि अगर ईरान से कच्चा तेल आना बंद हो जाएगा तो, क्या मोदी सरकार के पास कोई नीति है जिससे देशवासियों को बढ़ते पेट्रोल के दामों से बचाया जा सके? 

उन्होंने कहा कि देश ये जानना चाहता है कि प्रधानमंत्री को अमेरिका का हित याद रहा और क्यों अपना हित भूल गए? 

इसके साथ ही उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि ईरान अब हिंदुस्तान को धमकियां दे रहा है, क्या प्रधानमंत्री के पास उसका कोई जवाब है? कच्चे तेल के आयात में जो कटौती हुई है, वो मोदी सरकार की विफल विदेश नीतियों या जलेबी फॉरन पॉलिसी का जीता-जागता सबूत है।

 




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