जगदलपुर जेल में क्यों करना पड़ा बेला भाटिया को सत्याग्रह

ज़रूरी ख़बर , , बृहस्पतिवार , 10-01-2019


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तामेश्वर सिन्हा

जगदलपुर। सामाजिक कार्यकर्ता और वकील बेला भाटिया जेल प्रशासन के रवैए से नाराज होकर बुधवार शाम जेल परिसर में ही सत्याग्रह पर बैठ गई हैं। बस्तर मे लंबे समय से आदिवासियों के हितों के लिए संघर्ष  कर रही समाजसेवी बेला भाटिया का कहना है कि उन्हें जेल मे बंद उनके 3 क्लाइंट की पेशी की तारीख नहीं दी जा रही है। जिसके चलते उन्होंने डेट नहीं मिलने तक सत्याग्रह में बैठने का फैसला कर लिया है। बेला भाटिया का कहना है कि यह घटना उनके साथ दूसरी बार हो रही है। इससे पहले भी सितंबर माह में उन्हें उनके क्लाइंट से मिलने नहीं दिया जा रहा था और न ही उनकी पेशी की डेट दी जा रही थी।

दरअसल, वे जेल परिसर में अपने पक्षकार की पेशी की तारीख जानने के लिए पहुंची थीं। बेला का कहना है कि उन्हें उनके पक्षकार की पेशी की तारीख देने के लिए जेल प्रशासन लगातार घुमा रहा है, इसलिए वे यहां गांधीवादी तरीके से धरने पर बैठी हुई हैं। उन्होंने कहा कि वे कानूनन जेल प्रशासन से जानकारी मांग रहीं हैं, फिर भी उन्हें जानकारी देने के नाम पर परेशान किया जा रहा है। यही कारण है कि वे सत्याग्रह का रास्ता अपना रहीं हैं। 

बेला भाटिया ने कहा कि, मैं एक वकील हूं और जगदलपुर कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हूं। यहां के सेंट्रल जेल में अपने पक्षकार की पेशी की तारीख जानने के लिए बुधवार की शाम पहुंची तो जेल प्रशासन ने जानकारी देने के लिए इंतजार करने को कहा। काफी देर इंतजार कराने के बाद प्रबंधन ने बताया कि जानकारी कोर्ट से ले लें। बेला का कहना है कि जेल प्रबंधन से फोन पर संपर्क करने के बाद ही यहां आयी थी। उन्होंने खुद कहा था कि शाम को 5 के बाद और 7 बजे के पहले आकर मिल सकती है, उस वक्त जानकारी दे दी जाएगी। 

बेला ने बताया कि जेल प्रबंधन ने पहले आवेदन लिया, वकील का आइडेंटिटी लेकर सारी औपचारिकताएं पूरी की।  फिर एक-दो घंटे इंताजर कराने के बाद यह जानकरी अंदर से आती है, कि वे जानकारी उपलब्ध नहीं करा सकते। साथ ही बेला ने कहा कि जानकारी नहीं देने के पीछे जेल प्रशासन को चाहिए कि वह लिखित में जानकारी दे। उसमें यह भी लिखें कि किस कारण वे जानकारी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।

नुलकातोंग मुठभेड़ की घटना के बाद पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया था। इसमें एक महिला और पुरुष को जगदलपुर जेल में लाया गया था। सितंबर माह में उनसे मिलने वे यहां पहुंची थीं, लेकिन यहां केवल महिला से मुलाकात करने दिया गया था। उसके बाद पेशी की तारीख लेने पहुंचीं, तो जेल प्रशासन ने घंटों इंतजार करने के बाद कहा कि कोर्ट से जानकारी ले लें। इस बार भी ऐसा ही रवैया रहा, इससे नाराज होकर ही सत्याग्रह करने करने पर मजबूर हुईं। उन्होंने बताया कि पक्षकार की जानकारी जेल प्रबंधन आरटीआई के माध्यम से भी नहीं दे रहा है।

बेला ने बताया कि बासागुड़ा थाना क्षेत्र की पुनेम संजना, जगरगुंडा थाना क्षेत्र के कोरसा बुधरी को 14 दिसंबर को बासागुड़ा बाजार से पकड़ा गया था। परिवार वालों को मालूम ही नहीं कि उनका जुर्म क्या है। इसके बाद परिजनों ने उनसे संपर्क किया, इसलिए वे इनकी पेशी की तारीख जानने यहां पहुंची थीं। वहीं एक और पक्षकार पुनेम सन्नु भी मार्च, 2018 से जेल में हैं। उनकी जानकारी के लिए भी यहां वे पहुंची हुई थीं।

बेला भाटिया के धरने पर बैठने को लेकर जेलर अमित शांडिल्य से पत्रकारों ने बात की। उसके बाद जेल प्रशासन हरकत में आया और वकील बेला भाटिया को उनकी जानकारी दी। रात को जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपना सत्याग्रह समाप्त किया और वे घर चली गईं। 

 








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