सामने आया पीएनबी घोटाले पर वित्तमंत्री की चुप्पी का राज! बेटी सोनाली जेटली थी चौकसी की वकील

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, बुधवार , 14-03-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के मसले पर वित्तमंत्री अरुण जेटली की चुप्पी का राज अब समझ में आ रहा है। “दि वायर” में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अरुण जेटली की बेटी सोनाली जेटली और दामाद जयेश बख्शी की लॉ फर्म जेटली एंड बख्शी मेहुल चौकसी की कंपनी से जुड़े कानूनी मामलों को देखती थी। इस सिलसिले में दोनों पक्षों के बीच करार हुआ था। 

हालांकि मामला सामने आने के बाद जेटली की बेटी की कंपनी ने एकतरफा तरीके से इस करार को रद्द कर दिया। इस मामले में सबसे खास बात ये है कि जांच के दौरान सीबीआई ने मेहुल चौकसी से जुड़ी तमाम ला फर्मों के यहां छापा डाला था लेकिन इस कंपनी को उसने छुआ तक नहीं। और अब राहुल गांधी ने इसको लेकर सीधे वित्तमंत्री पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री की पीएनबी घोटाले पर चुप्पी की राज अब समझ में आ रहा है। क्योंकि उन्हें अपनी बेटी की रक्षा करनी थी।

“दि वायर” ने इस सिलसिले में कंपनी से ईमेल के जरिये कई सवाल पूछे थे। जिसके जवाब में कंपनी के मालिक और जेटली के दामाद जयेश बख्शी ने कंपनी के रिटेनर होने की बात को स्वीकार की। बख्शी ने इस बात की पुष्टि की कि कंपनी के साथ दिसंबर 2017 में समझौता हुआ था जिसे जनवरी 2018 में तोड़ दिया गया।

उन्होंने “दि वायर” को भेजे जवाब में कहा कि “आपके इमेल के जरिये भेजे गए सवालों के जवाब में हम बताना चाहते हैं कि दिसंबर 2017 में एम/एस गीतांजली जेम्स लिमिटेड द्वारा जेटली एंड बख्शी के चैंबर से संपर्क किया गया था। जिसके तहत वो सलाह और कानूनी मसलों में अपने प्रतिनिधि के तौर पर चैंबर को हायर करना चाहते थे। उस समय हम लोगों को बताया गया कि उनके शोरूम और दूसरी स्थायी संपत्तियों से जुड़े विवाद विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।

हालांकि कोई कानूनी काम हमारे पास भेजा जाता उससे पहले ही उनके बैंक घोटाले में शामिल होने से जुड़ी खबर माडिया में आयी। इसलिए हम लोग ने करार को एकतरफा तरीके से रद्द कर उसके रिटेनर को लौटाना ही उचित समझा। इस बात को स्पष्ट किया जाता है कि गीतांजली जेम्स लिमिटेड की तरफ से मिली पूरी रिटेनर राशि को चैंबर्स आफ जेटली एंड बख्शी द्वारा लौटा दिया गया है।

यहां इस बात को एक बार फिर दोहराया जा रहा है कि हमें कभी भी गीतांजली जेम्स लिमिटेड का प्रतिनिधित्व करने या फिर उनके लिए किसी तरह का कानूनी काम करने का अवसर मिला। और उनके बैंक घोटाले में शामिल होने की सूचना के तुरंत बाद हमने उनके साथ हुए समझौते को रद्द कर दिया।”

दि वायर के एक दूसरे ईमेल में इस बात को स्पष्ट करने के लिए कि कब करार रद्द हुआ था। बख्शी ने कहा कि “तथ्यों को एक बार फिर दोहराते हुए गीतांजली जेम्स लिमिटेड ने हमको दिसंबर 2017 के महीने में रखा था। रिटेनरशिप समझौते के तहत हमने कोई भी कानूनी काम नहीं किया क्योंकि कोई भी काम दिया ही नहीं गया था।

कंपनी के बैंक घोटाले में शामिल होने से जुड़ी जब खबरें आनी शुरू हुईं ‘ये 31 जनवरी 2018 के बाद है’ हम तुरंत एकतरफा तरीके से लीगल मैंडेट को रद्द कर दिए और पूरी रिटेनरशिप की राशि को लौटा दिए। इस काम को बैंकिंग चैनल के जरिये किया गया।

क्योंकि ऊपर दी गयी सूचना हमारी ला फर्म की तरफ से स्पष्ट तरीके से किसी भी तरह के गलत या फिर अनुचित काम का इशारा नहीं करती है हम ये आशा करते हैं कि हमारे पक्ष को आप सही तरीके से पेश करेंगे और उसमें किसी तरह का पक्षपात नहीं होगा।”

पंजाब नेशनल बैंक विवाद में ढेर सारी लॉ से जुड़ी कंपनियां जांच के घेरे में आयी हैं। पिछले महीने साइरिल अमरचंद मंगलदास के मुंबई स्थित दफ्तर पर फ्राड से जुड़ी जांच के क्रम में सीबीआई टीम द्वारा छापा डाला गया था। गौरतलब है कि स्कैम सामने आने के कुछ ही महीने पहले इस कंपनी को काम मिला था।

एक मीडिया रिपोर्ट में उस समय बताया गया था कि “सूत्रों का कहना है कि कंपनी ने सीबीआई के साथ पूरा सहयोग किया जिसने पिछले सप्ताह ही छापा डाला था। ये भी बात पता चली है कि इसके पहले फर्म ने नीरव मोदी या फिर उसकी कंपनी का कोई काम नहीं की थी।”

इस मसले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट के जरिये वित्तमंत्री अरुण जेटली की घेरेबंदी की है। उन्होंने कहा है कि अब ये बात स्पष्ट हो गयी है कि हमारे वित्तमंत्री का पीएनबी घोटाले पर मौन अपनी बेटी की रक्षा करने के लिए था जिसे स्कैम सामने आने से केवल एक महीना पहले आरोपी द्वारा बड़ी राशि अदा की गयी थी। जब दूसरी ला फर्मों पर सीबीआई द्वारा छापे डाले गए तो फिर उनकी कंपनी पर छापा क्यों नहीं पड़ा?










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