सीजेआई के कड़े पत्र के बाद मोदी सरकार को बदलना पड़ा गुजरात हाईकोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस की नियुक्ति का फैसला

पहली ख़बर , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 08-11-2018


justice-sc-gogoi-modi-govt-gujarat-highcourt-bombay-acting

जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। उच्च न्यायिक संस्था में केंद्र सरकार ने एक बार फिर ऐसा कुछ किया है जिससे न केवल उसे शर्मिंदा होना पड़ा है बल्कि अपने फैसले को तुरंत वापस भी लेना पड़ा है। हालांकि ये काम भी उसने दबाव में ही किया। मामला गुजरात हाईकोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस की नियुक्ति का था। बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एस सुभाष रेड्डी के सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन के बाद दूसरे नंबर पर सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस एए कुरेशी थे। लेकिन मोदी सरकार ने दबाव डालकर जस्टिस ए दवे को कार्यकारी चीफ जस्टिस नियु्क्त करवा दिया। और जस्टिस एए कुरेशी का रातों-रात बांबे हाईकोर्ट में तबादला कर दिया गया।

अंग्रेजी वेबसाइट दि प्रिंट के सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस पर तगड़ा एतराज जाहिर किया और उन्होंने केंद्र सरकार को 2 नवंबर को एक कड़ा पत्र लिखा। ये पत्र केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद को संबोधित था।

इस पत्र में सीजेआई गोगोई ने केंद्र के इस फैसले को बेहद पक्षपातपूर्ण करार दिया था। क्योंकि वरिष्ठता में नंबर-2 को कार्यकारी चीफ जस्टिस नियुक्त कर दिया गया था। इस प्रक्रिया में केंद्र ने जस्टिस कुरेशी की सबसे वरिष्ठ जज होने की बात को दरकिनार कर दिया था। और फिर उनका तबादला भी बांबे हाईकोर्ट कर दिया गया था। हालांकि जस्टिस कुरेशी के पास बांबे हाईकोर्ट में शपथ लेने के लिए 15 नवंबर तक का समय था।

गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की पोस्ट जस्टिस आर सुभाष रेड्डी के सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन के चलते खाली हो गयी थी।

सूत्रों का कहना है कि सीजेआई गोगोई जस्टिस कुरेशी की जगह दवे को कार्यकारी चीफ जस्टिस नियुक्त करने के फैसले से बहुत परेशान हो गए थे। क्योंकि ये स्थापित मान्यताओं के खिलाफ था। इस बात का उन्होंने अपने पत्र में भी इशारा किया था। 

ऐसा कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के कुछ दूसरे जजों ने भी सरकार के इस फैसले पर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की थी।

केंद्र सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया था कि  ‘संविधान के आर्टिकल 223 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति गुजरात हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज अनंत कुमार सुरेंद्र राय दवे को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के कर्तव्यों को पूरा करने के लिए नियुक्त करने पर प्रसन्नता महसूस कर रहे हैं। ये श्री जस्टिस रामायागरी सुभाष रेड्डी के सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त होने के बाद गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का चार्ज छोड़ने के साथ ही लागू हो जाएगा।’ ये अधिसूचना केंद्र सरकार के ज्वाइंट सेक्रेटरी राजिंदर कश्यप की ओर से जारी की गयी है।

चीफ जस्टिस के पत्र के बाद केंद्र ने अपनी गल्ती को सुधारने के लिए तेजी से पहल की। एक बार फिर खुद को गलत जगह पाता देख और सर्वोच्च न्यायपालिका के साथ एक और झगड़े में फंसने की आशंका के चलते केंद्र ने बहुत तेजी से काम किया। और कुछ ही घंटों के भीतर नया नोटिफिकेशन जारी हो गया जिसमें जस्टिस कुरेशी को एक्टिंग चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया।

सूत्रों का कहना है कि सरकार द्वारा सीजेआई आफिस को नया नोटिफिकेशन देने के लिए  विशेष दूत भेजा गया। जस्टिस कुरेशी के बांबे हाईकोर्ट में तबादले को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। और इस फैसले के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट के वकील शुक्रवार से हड़ताल पर चले गए थे।

 

बताया जा रहा है कि गुजरात हाईकोर्ट बार ने आरोप लगाया था कि जस्टिस कुरेशी का इसलिए बांबे हाईकोर्ट तबादला कर दिया गया था क्योंकि मोदी सरकार उन्हें पसंद नहीं करती थी।








Tagjustice supremecout modigovt gujarathighcourt Dave

Leave your comment