सिब्बल ने फोड़ा नोटबंदी का नया बम! कहा-नोट बदलने के अड्डों में तब्दील हो गए थे बीजेपी मुख्यालय और मंत्रियों के चैंबर

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, बुधवार , 17-04-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री कपिल सिब्बल ने आज फिर नोटबंदी से संबंधित एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कई स्टिंग आपरेशनों के जरिये इस बात को दिखाने की कोशिश की कि नोटों की अदला-बदली में न केवल सीधे बीजेपी के लोग शामिल थे बल्कि उसका पूरा कारोबार उसके दफ्तर से संचालित था। इस सिलसिले में उन्होंने बीजेपी के नेताओं खासकर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पर 40 फीसदी कमीशन लेकर नोट बदलने का आरोप लगाया।

कांग्रेस मुख्यालय पर प्रेस कांफ्रेंस के जरिये किए गए इस खुलासे में सामने आए स्टिंग में 2000 के नोटों की गड्डियां देखी जा सकती हैं। उसका एक स्थान गुजरात का बीजेपी का राज्य मुख्यालय कमलम है तो दूसरा एक होटल। इसके साथ ही एक तीसरा स्थान कृषि मंत्री का चैंबर भी है। स्टिंग के एक हिस्से में एक व्यक्ति को सीधे-सीधे यह कहते हुए सुना जा सकता है कि करोड़ों की करेंसी को ले आने और ले जाने में कहीं कोई समस्या नहीं है। सब कुछ अपने नियंत्रण में है। 

सिब्बल ने कहा कि हमने अप्रैल 9, 2019 को एक घोटाले का खुलासा किया जो ये दर्शाता है कि कैसे, दिसंबर 31, 2016 के बाद, अवैध तरीके से पुराने ₹ 500 और ₹ 1,000 के करेंसी नोट्स को नये चलन में आये ₹2,000 करेंसी नोट्स से अदला-बदली की गयी। उस खुलासे में, हमने राहुल रथरेकर, फील्ड असिस्टेंट, की कथित संलिप्तता का संकेत दिया और उनके पहचान पत्र के माध्यम से उनकी पहचान साबित करने का प्रयास किया, जो वीडियो में देखा गया था। इसके अलावा, इस घोटाले में इंडसइंड बैंक के एक अधिकारी, संजय चाने और अन्य लोग शामिल थे | इस खुलासे के तुरंत बाद, कैबिनेट सचिवालय ने निम्नलिखित बयान जारी किया:

“राहुल एस. रथरेकर कैबिनेट सचिवालय के एक कांस्टेबल स्तर के कर्मचारी थे। पुरानी मुद्रा नोटों के अदला-बदली में उनकी भूमिका के संदेह के बाद उन्हें जून, 2017 में (5 साल की सेवा के बाद) बर्खास्त कर दिया गया था”।

कपिल सिब्बल का कहना है कि यह स्टेटमेंट स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि मार्च 26, 2019 और अप्रैल 9, 2019 को दिखाए गए वीडियोज में घोटाले पर किया गया पर्दाफाश वास्तविक हैं और वीडियोज पर दिखाई गई घटनाएं उस तरीके को दर्शाती हैं, जिसमें ये अदला-बदली हुई थी। ट्रेज़री को लूटने में सरकारी अधिकारियों, बैंकर्स और स्टेट ऑथॉरिटीज़ की भागीदारी स्पष्ट रूप से एक साजिश को दर्शाता है, जो पहले कभी नहीं देखी गई।

उन्होंने सवालिया अंदाज में पूछा कि इस श्रृंखला में लूट के लिए कौन जिम्मेदार था। उन्होंने कहा कि इसकी गहन जांच की आवश्यकता है, जो इस घोटाले की जानकारी के बावजूद यह सरकार करने में विफल रही है। आज दिखाए जाने वाले वीडियो के क्लिप्स पुलिस और पब्लिक फंक्शनरीज़ की संलिप्तता दर्शाते हैं। ऐसा लगता है कि ऑफिसियल मशीनरी इस विशाल घोटाले में सक्रिय रूप से भाग ले रही थी और इस प्रक्रिया में खुद को समृद्ध कर रही थी।

जो वीडियो हमने पहले दिखाया था, जिसमें गुजरात में धन के आदान-प्रदान और बीजेपी के गुजरात मुख्यालय श्री कमलम का इससे सम्बन्ध, इस घोटाले और बीजेपी के करीबी लोगों के बीच की कड़ी को सिद्ध करता है। उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि विपक्षी दलों के खुलासे के बावजूद सरकार द्वारा इन मामलों की जांच के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। यह अकल्पनीय है कि करोड़ों के ₹2,000 के करेंसी नोट्स बिना ट्रेज़री के अधिकारी और वह लोग जो इसकी जमाखोरी कमीशन पाने के लिए कर रहे थे, के सक्रिय सहयोग के बिना उपलब्ध हो सकते थे। उन्होंने कहा कि भाजपा को निम्नलिखित चीजोंका उत्तर देना चाहिए:

1) उन्होंने गुजरात में, नोटबंदी के बाद भी करेंसी नोट्स का आदान-प्रदान करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज और जांच पड़ताल क्यों नहीं शुरू की ? 

2) श्री कमलम, जो भाजपा मुख्यालय है और इन नोटों की जमाखोरी करने वालों के बीच किस प्रकार के सम्बन्ध थे ?

3) एक व्यक्ति विशेष जो गुजरात में इस आदान-प्रदान को अंजाम दे रहा था और उसने जिन-जिन लोगों के नाम लिए थे जिनकी कमीशन में कथित रूप से हिस्सेदारी थी, उसके बयानों के पीछे की सचाई क्या है ?

4) उन व्यक्तियों की पहचान, जिन्होंने होटल में पुराने नोटों की गिनती की थी |

5) जब राहुल रथरेकर सेवा से बर्खास्त किया गया, उस समय उसे गिरफ्तार कर और उसकी जांच क्यों नहीं की गई ?

6) सरकार के पास क्या सबूत थे जिसके आधार पर उन्होंने कथित धन की अदला-बदली में राहुल रथेकर की भागीदारी पर संदेह किया?

7) क्या बर्खास्तगी से पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?

8) कथित रूप से इस राष्ट्रीय लूट में शामिल साजिशकर्ताओं की पहचान करने के लिए राहुल रथरेकर की गतिविधियों की पूरी तरह से जांच क्यों नहीं की गई?

आगे उनके द्वारा सामने लाए गए वीडियो में दिनांक 4 मार्च, 2017 के वीडियो में कृषि मंत्री के कार्यालय (मंत्रालय,मुंबई) में एक अनिल राजगोर (भाजपा), डीसीपी वाडेकर, सचिन, जाधव और इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट की उपस्थिति को दिखाया गया है। वाडेकर ने इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट और अनिल राजगोर का परिचय कराया। वे इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट द्वारा प्रस्तावित एक नई स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर चर्चा करते हैं और उस संदर्भ में इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट उस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए अमित शाह से मिलने की इच्छा व्यक्त करते हैं। अनिल राजगोर इस मुलाकात को कराने का वादा करता है। 

दूसरा वीडियो मार्च 5, 2017 का है (ट्राइडेंट होटल, मुंबई),जहां वही इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट, डीसीपी वाडेकर, सचिन, जाधव और एक रुस्तम दारूवाला, सेवानिवृत्त मुख्य प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया, को दिखाया गया है। रुस्तम दारूवाला करेंसी नोट्स की अदला-बदली की पूरी प्रक्रिया समझाता है। इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट करेंसी नोट्स की अदला-बदली का निर्णय लेने वालों से मिलने की इच्छा ज़ाहिर करता है। उस संदर्भ में, जादव करेंसी नोट्स की अदला-बदली का तरीका बताता है। जाधव और रुस्तम दारूवाला मीटिंग के बीच में, बैंकर्स, जो करेंसी नोट्स की अदला-बदली करेंगे, उनके साथ मीटिंग की व्यवस्था करने के लिए चले जाते हैं। 

फिर मार्च 6, 2017 को डीसीपी वाडेकर के कार्यालय में एक छोटी बैठक होती है जहां फिर से करेंसी नोट्स की अदला-बदली की चर्चा होती है।

आखिरी एपिसोड, फिर से कृषि मंत्री के कार्यालय (मंत्रालय,मुंबई) में होता है। इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर प्रेजेंटेशन सौंपा और उसके बाद  300 करोड़ रुपये मूल्य के करेंसी नोट्स की अदला-बदली पर चर्चा होती है। अनिल राजगोर कहता है कि उनकी इच्छा अनुसार वह जल्द से जल्द एक मीटिंग कराने की कोशिश करेगा।

कांग्रेस नेता सिब्बल ने पूछा कि जब यह सब हुआ तो चौकीदार सो क्यों रहा था? इस मामले में जांच का न होना ये दर्शाता है की इस  लूट में शामिल लोगों की सुरक्षा की जा रही है।

अब यह प्रतीत होता है कि विमुद्रीकरण के निर्णय ने अपराधियों को ट्रेज़री और गरीबों को लूटकर खुदका मुद्रीकरण करने में मदद की होगी |

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने भ्रष्टाचार से हाथ मिलाया है, वे ईमानदार होने का दिखावा नहीं कर सकते।

 








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