सरकार के नंबर दो राजनाथ सिंह को भी नहीं थी बीजेपी के कश्मीर फैसले की जानकारी

ख़ास रपट , नई दिल्ली, बुधवार , 20-06-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। “दि टेलीग्राफ” की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीडीपी से समर्थन वापसी और जम्मू-कश्मीर में गवर्नर रूल लगाने के फैसले की गृहमंत्री राजनाथ सिंह को भी जानकारी नहीं थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंगलवार की सुबह जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बंगले पर गए तो उस समय राजनाथ सिंह नॉर्थ ब्लाक स्थित अपने दफ्तर के फर्स्ट फ्लोर पर बैठे हुए थे।

गृहमंत्रालय के दो वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर सरकार से समर्थन वापसी की बीजेपी ने जैसे ही घोषणा की गृहमंत्री दफ्तर छोड़कर अपने सरकारी आवास पर चले गए। इसके साथ ही उनका कहना था कि जहां तक उन्हें लगता है राजनाथ को इस फैसले की जानकारी नहीं थी।

इन दोनों के अलावा गृहमंत्रालय के दूसरे अधिकारियों ने भी “दि टेलीग्राफ” को बताया कि न राजनाथ और न ही जम्मू-कश्मीर के लिए नियुक्त केंद्र के वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा को इसके बारे में पता था।

इन वरिष्ठ अधिकारियों का कहना था कि बीजेपी नेता राम माधव द्वारा फैसले की घोषणा करते ही वो अवाक रह गए। एक अधिकारी ने बताया कि “हम लोगों को छोड़िए ऐसा लगता है कि राजनाथ सिंह तक को विश्वास में नहीं लिया गया।”

बीजेपी के फैसले के बाद दि टेलीग्राफ की बातचीत में वार्ताकार शर्मा ने कहा कि “मैं श्रीनगर में हूं और अभी इसके बारे में मुझे पता चला है। इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।”

इसको लेकर गृहमंत्रालय में बेहद नाराजगी थी। एक अधिकारी ने तो यहां तक कहा कि “राजनाथ सिंह सरकार में आधिकारिक तौर पर दूसरे नंबर पर आते हैं लेकिन ऐसा केवल पेपर पर है।”

अधिकारी ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार में अकेले राजनाथ सिंह हैं जो बहुत सारे मुद्दों पर अलग रुख अपनाते हैं। उसने उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह से कश्मीर में एकतरफा तरीके से उन्होंने संघर्ष विराम को विस्तारित करने का दबाव बनाया था। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने डोभाल और आर्मी चीफ बिपिन रावत के दबाव में रविवार को उसे वापस ले लिया। शर्मा भी संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने के पक्ष में थे।

एक अधिकारी ने कहा कि अब जबकि वहां कोई सरकार नहीं है तब शर्मा कैसे काम करते हैं ये देखने की बात होगी। सरकारी सूत्रों का कहना है कि डोभाल के पीएमओ में सत्ता का केंद्र बनने के साथ ही राजनाथ सिंह के पंख बिल्कुल कट गए हैं। कश्मीर समेत देश के सभी आंतरिक सुरक्षा के मामलों में अकेले डोभाल फैसले ले रहे हैं।

एक अधिकारी का कहना था कि एनएसए इस समय पीएम मोदी के आंख और कान हैं।

तकरीबन 4.30 बजे शाम को राजनाथ सिंह ने अपने अकबर रोड स्थित सरकारी आवास पर गृह सचिव राजीव ग्वाबा, आईबी चीफ राजीव जैन औऱ विशेष सचिव रीना मित्रा के साथ जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर बैठक की। इस बैठक में डोभाल भी मौजूद थे।

घोषणा के बाद राजनाथ सिंह ने गवर्नर एनएन वोहरा से बात की। सुरक्षा तंत्र से जुड़े हुए अधिकारियों का कहना है कि केंद्र ने अब कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ अभियान छेड़ने का फैसला कर लिया है।

सूत्रों के मुताबिक गवर्नर रूल इस लिहाज से सबसे बेहतर साबित होगा। क्योंकि उसमें किसी तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। इसके साथ ही ये बात भी साफ हो गयी है कि सरकार अब अपने हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के एजेंडे को खुल कर संचालित करेगी। जो 2019 में उसका मुख्य एजेंडा बनने जा रहा है।

इस बीच एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन सालों के दौरान सूबे में आतंकी घटनाओं में 64 फीसदी की वृद्धि हुई है। इंडियास्पेंड के एक विश्लेषण के मुताबिक 2017 के अंत तक तीन सालों के बीच 800 आतंकी घटनाएं हुई हैं। इसके हिसाब से 2015 में 208 और 2017 में 342 घटनाएं घटी थीं।

इन तीन सालों में 744 लोगों की मौत हुई जिसमें 471 आतंकी, 201 सुरक्षा बल के जवान और 72 नागरिक शामिल थे। इसके पहले राज्य ने सबसे ज्यादा आतंकी घटनाएं 2010 में देखी थी जब 488 घटनाएं हुई थीं।

जबकि 2013 आतंकी घटनाओं के लिहाज से सबसे बेहतर साल रहा। इस दौरान पिछले 28 सालों में सबसे कम 170 घटनाएं हुईं।

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि पीडीपी और बीजेपी के बीच गठबंधन बनने के बाद सुरक्षा बलों और आतंकियों के साथ मुठभेड़ों में 53 फीसदी की वृद्धि हुई है।  




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