कठुआ गैंगरेप: एक मात्र रिहाई को अभियोजन पक्ष दे सकता है ऊपरी कोर्ट में चुनौती

ख़ास रपट , नई दिल्ली, सोमवार , 10-06-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। कठुआ गैंग रेप मामले में स्पेशल कोर्ट का फैसला आ गया है। तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास और तीन को पांच-पांच साल की सजा तथा एक आरोपी को बरी कर दिया गया है। आजीवन कारावास की सजा पाए तीनों अभियुक्त पुलिसकर्मी हैं। कोर्ट ने पूरे कांड के मास्टर माइंड सांजी राम के बेटे विशाल जंगोत्रा को बरी कर दिया है।

आजीवन कारावास पाए अभियुक्तों के नाम सांजी राम, स्पेशल पुलिस अफसर दीपक खजूरिया और परवेश कुमार हैं। जबकि 5 साल की सजा पाने वालों में सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, हेड कांस्टेबल तिलक राज और स्पेशल पुलिस आफिसर सुरेंद्र वर्मा शामिल हैं। पहले तीन सजायाफ्ता अभियुक्तों पर एक-एक लाख का अलग से जुर्माना भी लगा है। जबकि बाद वाले तीनों को 50-50 हजार रुपये देने होंगे।

अभियोजन पक्ष के वकीलों ने कहा है कि वे मुख्य अभियुक्त को फांसी दिलाने की मांग को लेकर ऊपरी कोर्ट में अपील करेंगे। इसके साथ ही उनका कहना था कि विशाल जंगोत्रा की रिहाई को भी चुनौती देंगे। दरअसल विशाल को संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने बरी कर दिया है। उसके उस समय मुजफ्फरनगर होने के साक्ष्य दिए गए थे। जिसको अभियोजन पक्ष गलत नहीं साबित कर सका।

अभियोजन पक्ष के वकील जेके चोपड़ा, एसएस बासरा, हरमिंदर सिंह और भूपिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने मुख्य आरोपी के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। और एक मात्र रिहाई के खिलाफ भी वे ऊपरी कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

अपने बयान में उन्होंने कहा है कि “हम लोगों ने गैंग रेप और हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए सभी आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। यह हम लोगों की कड़ी मेहनत और जांच की सही दिशा तथा कानूनी दिमाग था। हमने 99 फीसदी नतीजा हासिल कर लिया है।”

हालांकि आरोपियों के परिजन फैसले से खुश नहीं हैं। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि फैसला मीडिया ट्रायल का नतीजा है। आरोपी के एक रिश्तेदार ने कहा कि “मीडिया ने हम लोगों के खिलाफ केस बनाया। हम मीडिया के मारे हैं।” आरोपियों के एक वकील ने कहा कि वो फैसले को ऊपरी कोर्ट में चुनौती देंगे।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक नाबालिग समेत 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। हालांकि नाबालिग के खिलाफ ट्रायल अभी शुरू होना बाकी है। क्योंकि उसकी उम्र को लेकर विवाद बना हुआ है। और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट को उस पर फैसला करना है।

15 पेज की चार्जशीट में पूरी घटना का ब्योरा दिया गया था। इसमें बताया गया था कि किस तरह से पिछले साल 10 जनवरी को नाबालिग आसिफा का पहले अपहरण किया गया और फिर उसे कठुआ जिले के कसना गांव के एक मंदिर में रखा गया। वहां चार दिनों तक रखे जाने के दौरान लगातार उसे नशीला पदार्थ दिया जाता रहा। जिससे वह हमेशा बेहोशी की हालत में बनी रही। इस दौरान उसके साथ कई बार बलात्कार किया गया। और आखिर में उसके सिर पर पत्थर से चोट पहुंचा कर उसकी हत्या कर दी गयी। सांजी राम जो मंदिर का पुजारी था इस पूरे कांड का मुख्य अभियुक्त या कहिए मास्टरमाइंड था। उसने दूसरे लोगों के साथ मिलकर पूरा षड्यंत्र रचा था। दरअसल पीड़ित से जुड़े बंजारा समुदाय को वह गांव से ही भगा देना चाहता था। और इसके जरिये वह उनके बीच दहशत पैदा करना चाहता था।

इसको लेकर बड़े स्तर पर बवाल हुआ था। और पूरे मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गयी थी। जिसमें एक दौर में बीजेपी से जुड़े विधायक आरोपियों के पक्ष में तिरंगा लेकर जुलूस निकालते देखे गए। यहां तक कि मामले की कोर्ट में सुनवाई तक प्रभावित हो गयी। और कई बार पीड़ितों के पक्ष में खड़े होने वाले वकीलों पर हमलों की कोशिशें तक हुईं। इन सब चीजों को देखते हुए बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पठानकोट की स्पेशल अदालत को ट्रांसफर कर दिया।

फैसले के बाद लोगों ने खुशी जाहिर की है। और इंसाफ पसंद हर शख्स ने फैसले का स्वागत किया है। लेकिन कल तक अलीगढ़ के बलात्कारियों के लिए फांसी की सजा मांगने वाले किसी भी शख्स की तरफ से आसिफा के बलात्कारियों को फांसी देने की मांग सामने नहीं आयी है। मासूम बच्चियों के साथ घिनौना और बर्बर अपराध करने वाले किसी भी शख्स को कड़ी से कड़ी सजा हो भला इसको कौन नहीं चाहेगा। लेकिन कुछ ऐसे लोग जिनके दिमाग में सांप्रदायिकता का कीड़ा बजबजा रहा होता है वो इस तरह के घृणित अपराधों को भी हिंदू-मुस्लिम के तराजू पर रखने से बाज नहीं आते हैं। और उनकी कलई उसी समय खुल जाती है जब एक जगह वो फांसी के पक्षधर होते हैं और दूसरी जगह चुप्पी साधने की बात तो दूर कई बार अभियुक्तों के साथ तक खड़े नजर आते हैं।  

फैसले का बड़े स्तर पर स्वागत हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने बगैर थके काम करने और ट्रायल को अंजाम तक पहुंचाने के लिए पूरी लीगल टीम को बधाई दी है। 

इस पूरे केस का प्रमुख चेहरा बनकर सामने आयीं और तमाम हमलों के खिलाफ चट्टान बनकर खड़ी रहीं वकील दीपिका सिंह राजावत ने फैसले के बाद खुशी जाहिर करने के साथ ही राहत की सांस ली है। उन्होंने कहा कि वो इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रही थीं। साथ ही उन्होंने कहा कि वह लोगों से एक सूचना साझा करना चाहती हैं कि जिस वकील ने धमकियों और दबाव के सामने जिस कठुआ केस को उन्होंने एक चुनौती के तौर पर लिया था उसने एडवोकेट के तौर पर अपनी यात्रा को लेकर एक किताब लिखने की शुरुआत कर दी है। एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि हमेशा सत्य की जीत होती है।

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कठुआ फैसले से राहत की सांस मिली। पूरा श्रेय आईजीपी मुज्तबा, एसएसपी जाला, एडिशनल एसपी नावेद, डिप्टी एसपी श्वेतांबरी, दीपिका सिंह राजावत और तालिब को जाता है। जिन्होंने तमाम दबावों के बाद भी तथ्यों को सामने लाने का काम किया।

 








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