कठुआ-उन्नाव के खिलाफ पूरे देश में फूटा निर्भया जैसा गुस्सा, दिल्ली में हुआ बड़ा जमावड़ा

ख़ास रपट , नई दिल्ली, चयन करें , 16-04-2018


kathua-unnao-rape-murder-not-in-my-name-modi-yogi-protest

जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। बोल कि लब आजाद हैं तेरे, बोल जबां अब तक तेरी है....यहां फैज थे तो हबीब जालिब भी थे। नजरूल इस्लाम भी अपने दूसरे गीतों के जरिये पूरी शिद्दत से मौजूद थे, तो इन नज़्मों, कविताओं के साथ ‘हम होंगे कामयाब’ के साथ मज़बूत नागरिक इरादे का दस्तक देता गीत भी था। 

रविवार की शाम को इन गीतों के जरिये कठुआ और उन्नाव की घटनाओं के खिलाफ जो विरोध शुरू हुआ, तो देखते ही देखते वो बड़े प्रदर्शन में तब्दील हो गया। बात हो रही है, संसद मार्ग पर “नॉट इन माई नेम” के बैनर तले होने वाले आयोजन की। ये कार्यक्रम केवल एक शहर तक सीमित नहीं था। इसी तरह के प्रदर्शन पूरे देश में हुए। चंडीगढ़, बेंगलुरू, सूरत, तिरुअंतपुरम, पणजी और मुंबई समेत 10 मेट्रो शहरों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। मुंबई में विरोध प्रदर्शन का केंद्र कार्टर रोड रहा। 

दिल्ली के संसद मार्ग पर समाज के हर हिस्से और पेशे के लोग मौजूद थे। पूरा मध्यवर्ग मानों संसद मार्ग पर उमड़ पड़ा हो। सबके साथ में प्लेकार्ड्स थे,जिन पर बलात्कार के खिलाफ या फिर दोषियों को सजा देने संबंधी मांगें या बातें लिखी थीं। और सबसे ज्यादा भागीदारी महिलाओं और बच्चों की थी। बच्चे कतारों में खड़े नारेबाजी कर रहे थे। इसके साथ ही संसद मार्ग की सड़क पर कई इबारतें लिख कर युवक और युवतियां अपने गर्द-ओ-गुबार निकाल रहे थे। तीन से चार हजार की संख्या में जुटे इस मजमे में सरकार और उसके रवैये के खिलाफ गुस्सा बिल्कुल साफ दिख रहा था। पूरी भीड़ बिल्कुल चार्ज्ड थी। उसके तेवर गरम थे। और मंच के किसी भी नारे और आह्वान पर उतनी ही तेजी से दर्शकों और स्रोताओं की तरफ से प्रतिक्रिया भी मिल रही थी।

दिल्ली में नाट इन माई नेम के बैनर तले प्रदर्शन।

तुगलकाबाद के एक सरकारी स्कूल की कक्षा 10 की छात्राएं ज्योति और चंदा ने अपनी कविता के जरिये मोरल पुलिसिंग पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “यहां तो मेरे दुपट्टे की लंबाई और कुर्ते की चौड़ाई को नापते हैं और बताते हैं कि मुझमें शर्म, हया और इज्जत कितनी है।”

ब्लूवेल इंटरनेशनल स्कूल की एक बच्ची ने अपने मन का गुबार निकालते हुए कहा कि इस घटना के बाद पूरा बचपन ही सवालों के घेरे में आ गया है। लेकिन साथ ही उसने संकल्प भी जाहिर किया कि जीवन में और कुछ भले न वो कर पाये, बचपन और महिलाओं की सुरक्षा के लिए होने वाले हर प्रयास में वह मदद करेगी।

दिल्ली में बच्चियों का प्रदर्शन।

इस मौके पर बहुत सारे लोगों ने अपनी बातें रखीं, जिनमें वरिष्ठ वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता वृंदा ग्रोवर ने सरकार पर तगड़े हमले किए। उन्होंने पीएम मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि अब बयानों और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। देश में उनकी हैसियत अब जुमलों से ज्यादा नहीं। लिहाजा सरकार जुमले उछालना बंद करे और महिलाओं की सुरक्षा के मसले पर ठोस कदम उठाए। उन्होंने बच्चियों से बलात्कार करने वालों के लिए फांसी की सजा के प्रावधान पर कहा कि हरियाणा, राजस्थान और एमपी में ये कानून लागू है। क्या वहां इसके कोई नतीजे निकल रहे हैं? इसलिए जरूरत है- एक ऐसी जवाबदेह प्रशासनिक व्यवस्था और तंत्र की,जो ऐसे मौकों पर कारगर तरीके से हस्तक्षेप कर तुरंत कार्रवाई को सुनिश्चित कर सके। और ऐसा न कर पाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था हो। 

इस मौके पर आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र जम्मू से आये एडवोकेट दीपिका सिंह राणावत और एडवोकेट और आंदोलनकारी तालिब हुसैन थे। दीपिका सिंह ने हिंदू संगठनों और बार एसोसिएशन के लाख विरोध के बावजूद आसिफा का केस लड़ने का फैसला किया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष द्वारा व्यक्तिगत तौर पर धमकी दिए जाने के बावजूद उन्होंने उसकी कोई परवाह नहीं की। आसिफा को न्याय दिलाने के पक्ष में चट्टान की तरह खड़ी दीपिका ने सीधे पीएम पर हमला बोलते हुए कहा, “आप बेटी बचाओ की बात करते हैं लेकिन आप कह रहे हैं कि बेटी बचाओ,पर उन्हें बाहर मत भेजो क्योंकि बाहर दरिंदे हैं।”

नाट इन माई नेम के तहत प्रदर्शन।

उन्होंने कहा कि केवल सामाजिक बदलाव के जरिये ही इस तरह के मामले ठीक किए जा सकते हैं। दीपिका ने कहा, “आज मेरे समुदाय के लोग मुझे हिंदू विरोधी कह रहे हैं। लोग हमसे पूछ रहे हैं कि ये मुकदमा मैंने क्यों अपने हाथ में लिया? उन्होंने मुझे नुकसान पहुंचाया है। वो मेरी वकालत भी छीन सकते हैं....लेकिन मैं पीछे नहीं हटने वाली हूं।”

एडवोकेट तालिब हुसैन वो शख्स हैं,जिन्होंने आसिफा को न्याय दिलाने के आंदोलन की शुरुआत की। इस कड़ी में वो धरने पर बैठे और कई बार हिरासत में भी लिए गए। आसिफा के बकरवाल समुदाय से आने वाले तालिब ने एलएलबी किया है। और प्रशिक्षण के लिए दिल्ली आये थे कि तभी अपने समुदाय के साथ ज्यादतियों की खबर पाकर वो बीच में ही जम्मू लौट गए। और तब से आसिफा समेत बकरवाल समुदाय की दूसरी लड़ाइयों की अगुवाई कर रहे हैं। उन्होंने भी इस आंदोलन को किसी भी कीमत पर न रोकने का संकल्प जाहिर किया।  

इस विरोध प्रदर्शन में बलात्कारी को संरक्षण देने और पीड़िता के पिता की हत्या के लिए जिम्मेदार यूपी की योगी सरकार को बर्खास्त करने की मांग की गयी। कठुआ में बलात्कारियों के पक्ष में निकली रैली की अगुवाई करने वाले बीजेपी के दोनों पूर्व मंत्रियों को गिरफ्तार करने तथा दोनों पीड़ितों के परिवारों को सुरक्षा मुहैया कराने के साथ उचित मुआवजा देने की मांग हुई। इसमें मुकदमा लड़ने के लिए अच्छे और तेज तर्रार वकीलों की व्यवस्था करने की मांग भी शामिल है।

 








Tagnotinmyname kathuaunnao rapemurder protest modiyogi

Leave your comment