कठुआ गैंगरेप : चार्जशीट जिसने सामने लाया बलात्कार के आरोपियों का स्याह चेहरा

ख़ास रपट , , सोमवार , 16-04-2018


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असद हयात

कठुआ गैंगरेप और मर्डर केस  

थाना हीरा नगर जिला कठुआ जम्मू-कश्मीर

केस क्राइम नंबर-10 सन 2018

वादी युसूफ पुत्र साहिब दीन

अभियुक्त -1- संजीराम 2- अनिल संजीराम का भांजा (नाबालिग होने के कारण परिवर्तित नाम) 3- दीपक खजूरिया (एसएचओ) 4- परवेश कुमार 5- विशाल जगोत्रा (संजीराम का लड़का) 6- तिलक राज हेड कॉन्स्टेबल 7- आनंद दत्ता पूर्व विवेचक 8- सुरेंद्र कुमार

चार्जशीट अंतर्गत धारा 363, 343,376डी, 302, 201, 120 बी ( सीआरपीसी)

कुल 130 से अधिक गवाह जिनके बयान धारा 161 व 164 सीआरपीसी में दर्ज हुए। लाश की बरामदगी जगदीश राज की सूचना पर हुई।

पिछले दो तीन दिन से कठुआ ज़िला में एक देवीस्थान के भीतर एक नाबालिग बालिका के साथ गैंगरेप के बाद हत्या और उन्नाव रेप केस की चर्चा है। इस केस की चार्ज शीट के कुछ महत्वपूर्ण अंश नीचे दे रहा हूं। इससे आप जान सकेंगे कि किन आधारों पर मुल्जिमान की गिरफ्तारी हुई है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद-

इस केस की तफ्तीश थाना हीरानगर का इंस्पेक्टर आनन्द दत्ता कर रहा था और हेड कॉन्स्टेबल तिलकराज उसकी मदद कर रहा था। इनको भी संजीराम ने अपने साथ मिला लिया था और 5 लाख की मोटी रकम में केस दबाने का सौदा तय हो गया था। मगर जब बवाल होने लगा तब आनन्द दत्ता ने संजीराम से कहा कि कोई एक मुल्जिम को हवाले कर दो वरना मामला दबाना मुश्किल होगा। इस पर संजीराम ने अपने भांजे अनिल को उन्हें सौंप दिया और आनंद दत्ता ने अनिल को बयान रटवा दिए और एक अलग कहानी बना दी थी। जिसके मुताबिक रेप और अपहरण अकेले अनिल ने किया था और एक टीन शेड में बालिका को छुपा दिया था मगर एक दिन भेद खुलने के डर से अनिल ने अकेले ही पत्थर मारकर बालिका की हत्या कर दी ।

इस गढ़ी गयी झूठी कहानी की कलई तब खुली जब विवेचना क्राइम ब्रांच के पास आई और एसीपी  नावेद पीरजादा ने जांच शुरू करके अनिल को जुडिशियल कस्टडी से लिया और पूछताछ की। इस पूछताछ में अनिल ने सच्चाई उगल दी।

 केस के अहम तथ्य-

1- संजीराम नहीं चाहता था कि उसके इलाके में बकरवाल मुस्लिम समाज (बंजारा) के लोग अपनी बस्ती बनायें इसलिए उसने इनको हटाने की योजना बनाई और इसके लिए उसने दीपक खजूरिया एसपीओ व अपने भांजे अनिल (नाबालिग होने के कारण परिवर्तित नाम) को अपनी योजना में शामिल किया। उसने अनिल को भड़काया की बकरवाल लोगों से बदला लेना है कि जिन्होंने अनिल की पिटाई की थी। संजीराम ने 7 जनवरी को अनिल को बालिका का अपहरण करने के लिये कहा। 8 जनवरी को जब अनिल खेत पर काम कर रहा था तब दीपक ने उसको बुलाकर सिगरेट पिलाई और इम्तिहान में नक़ल कराने का वादा किया।

2-अनिल ने सारी बात अपने जिगरी दोस्त परेश उर्फ़ मन्नू को बताई और योजना में मदद करने के लिए कहा ।

3- दीपक योजना के तहत अपने मित्र विक्रम के साथ बिटू मेडिकल स्टोर गया और नशे की गोलियां खरीद कर लाया। संजी ने अनिल को कहा कि बालिका को अपहरण के बाद नशे की गोली खिलाकर देवीस्थान पर लाने को कहा।अनिल भी परेश के साथ हीरा नगर गया और ऑटो स्टैंड के पास रामपाल की दुकान से नशे की गोलियां खरीद कर लाया।

4-अगले दिन 10 जनवरी को अनिल ने बालिका की आवाज़ सुनी जब वह वीना देवी नामक महिला से अपने खोये घोड़े के बारे में पूछ रही थी। अनिल उस वक़्त परेश की छत पर था जो तेज़ी से नीचे आया और बालिका से कहा कि उसने घोड़ा देखा है और बालिका को बहका कर जंगल की तरफ ले गया।

बालिका ने खतरा भांप कर जब भागना चाहा तो अनिल और परेश ने उसका मुंह भींच दिया और जमीन पर पटक दिया।अनिल ने नशे की गोली बालिका को जबरन खिला दिया। बालिका जब बेहोश हो गयी तब अनिल ने बालिका से रेप किया। परेश उर्फ़ मन्नू ने भी रेप करना चाहा मगर सफल नहीं हो सका। इसके बाद दोनों देवीस्थान गए और वहां मेज के नीचे प्लास्टिक के चटाइयों और रजाइयों में बालिका को छुपा दिया और ताला बंद करके घर चले गए।

अगले दिन 11 जनवरी की सुबह बालिका के मां व बाप देवीस्थान आए और संजीराम से बालिका के बारे में पूछा तो संजीराम ने कहा कि कहीं रिश्तेदारी में गयी होगी, आ जाएगी।

इसी दिन 12 बजे दीपक आया और उसने  बालिका को नशे की 10 गोलियां खिलाईं और पानी पिलाया व बालिका के गले को अपनी उंगलियों से रगड़ा ताकि गोलियां पेट में चली जाएं ।

11 जनवरी को ही अनिल ने संजीराम के पुत्र विशाल को फोन किया और बालिका से रेप करने और मज़े लेने के लिए आमंत्रित किया। विशाल उस समय मुज़फ्फरनगर यूपी के मीरापुर कस्बें में बीएससी कृषि का छात्र था जो,अगले दिन सुबह गांव रासना आ गया।

12 जनवरी को देवीस्थान में विशाल और अनिल ने बालिका को नशे की 3 गोली खिलाई। संजी ने आनंद दत्ता और तिलक से मामला दबाने का सौदा तय कर लिया। तिलक ने बकाया रकम संजी से मांगी। 12 जनवरी को तृप्ता नाम की महिला जो संजी की बहन है, संजी के घर आई (जो अनिल की मां है) तब उसको संजी ने बताया कि अनिल ने बालिका से बलात्कार किया है। तिलक और तृप्ता साथ-साथ प्राइमरी स्कूल में पढ़े थे लिहाज़ा मित्र थे, इसलिये संजी ने तृप्ता को डेढ़ लाख रूपये दिए और इस रकम को तिलक राज को दे आने को कहा ।

13 जनवरी को सुबह अनिल, विशाल व संजी देवीस्थान गए व तीनों ने पूजा की। पूजा के बाद संजी देवीस्थान के पिछले दरवाज़े से बाहर दीपक से मिलने चला गया। इसके बाद पहले विशाल और उसके बाद अनिल ने परेश की मौजूदगी में बालिका से रेप किया और फिर उसको गोली खिला कर उसी तरह मेज़ के नीचे छुपा दिया ।

5- लोहड़ी की खिचड़ी बांटने के बाद अनिल ने संजी को बताया कि विशाल ने भी बालिका से रेप किया है ।तब संजी ने कहा कि बालिका को मार डालो । इस पर परेश, विशाल और अनिल बालिका को देवीस्थान से हटाकर जंगल में ले गए तभी दीपक भी वहां आया और उनसे कहा कि अभी बालिका को मत मारो, मैं भी रेप करूंगा।

पहले दीपक और फिर अनिल ने बालिका से रेप किया। दीपक ने अपनी जांघ पर बालिका की गर्दन रखी और दबाने लगा मगर असफल रहा। ये देख कर अनिल ने अपनी कोहनी से बालिका की पीठ को दबाया और फिर बालिका की चुन्नी से उसका गला घोंट दिया। अनिल ने मृत्यु सुनिश्चित करने के मकसद से दो बार पत्थर बालिका के सर पर मारा। बालिका मर चुकी थी। नहर में लाश को फेंकने की योजना थी मगर गाड़ी नहीं मिली तब लाश को वापस देवीस्थान में छुपा दिया गया।

15 को संजी ने विशाल व अमित को बताया कि किशोर ने गाड़ी देने से मना कर दिया है लिहाज़ा नहर नहीं जाया जा सकता इसलिए लाश को जंगल में फेंक दो।लाश को देवीस्थान में हत्या के बाद संजी की मौजूदगी में छुपाया गया था।

जंगल में लाश को फेंकने विशाल और अनिल गए। परेश साथ नहीं था ।विशाल मेरठ चला गया। शाम को अनिल खेलने अपने दोस्त अमित के पास गया और उसको घटना के बारे में बताया। संजी ने डेढ़ लाख की रकम इंस्पेक्टर आनंद दत्ता व तिलक राज को दी।17 जनवरी को बालिका की लाश पायी गयी ।संजी ने आनंद दत्त को 1 लाख और दिए।

विशाल का बचाव और नई कहानी 

इस केस का अभियुक्त विशाल मीरापुर (जिला मुज़फ्फरनगर, यूपी) का बीएससी कृषि का छात्र है। उसका बचाव में कहना है कि वह घटना के दौरान अपने खतौली स्थित परीक्षा केंद्र पर एग्जाम दे रहा था। चार्ज शीट में उल्लेख है कि झूठा सबूत बनाने के लिए कॉलेज मैनेजमेंट, यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को मोटी रकम दी गयी है। परीक्षा केंद्र का डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर को सीज़ किया गया है और फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इस मामले की अलग से जांच की जा रही है व दोषियों के खिलाफ अलग से चार्ज शीट दाखिल की जायेगी।

फॉरेंसिक जांच में मिले सबूत 

जांच प्रक्रिया के दौरान पुंसत्व परीक्षण में विशाल जगोत्रा और प्रवेश कुमार की रिपोर्ट को सकारात्मक पाया गया है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट है कि किशोर आरोपी सहित सभी आरोपी यौन संभोग करने में सक्षम हैं।अभियुक्त दीपक खजूरिया के पुंसत्व परीक्षण के लिए विशेषज्ञों ने मांग की है जो अदालत से अनुमति मांगने के बाद किया जाएगा। दरअसल, दीपक खजुरिया ने बीमारी के कारण अपना परीक्षण नहीं कराया था।

1- जांच के दौरान एफएसएल विशेषज्ञों के साथ-साथ एसआईटी के सदस्य और नायब तहसीलदार, कार्यकारी मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कूटाह ने दौरा किया और घटना के समय के दृश्य को बनाने की कोशिश की। घटना स्थल से कई सामानों को इकट्ठा किया गया। एफएसएल टीम ने रक्त सना हुआ लकड़ी के डंडे और बालों के टुकड़ों समेत कई चीजों को जब्त किया गया था। कार्यकारी मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी द्वारा पैक और सीलबंद पैकेट को विश्लेषण के लिए एफएसएल को भेजे गए थे।

इसके अलावा, कुछ बाल देवीस्थान और पास के जंगल से बरामद किया गया था जहां आरोपियों ने मृत शरीर को फेंका था। उसे नई दिल्ली में विशेषज्ञों को भेज दिया गया था। डीएनए विशेषज्ञों द्वारा दी गई राय के आधार पर जंगल, देवीस्थान और आसिफा के बालों में समानता की पुष्टि की है। डीएनए से मिलान के बाद यह कहा जा सकता है कि पीड़िता को देवीस्थान के अंदर रखा गया था। आरोपी संजीराम का इसमें हाथ था। डीएनए और जेसीएल रिपोर्ट का तथ्य यह है कि आरोपी पुलिस अधिकारी एसआई आनंद दत्ता और तिलक राज ने मृतक के कपड़े और अन्य सबूतों को नष्ट करने के लिए काफी प्रयास किए थे और एफएसएल श्रीनगर ने धुले कपड़ों की परीक्षा के आधार पर कोई राय नहीं बनाई थी, लेकिन एफएसएल दिल्ली ने आधुनिक प्रौद्योगिकी से रक्त के नमूनों के आधार पर आरोपियों के उपस्थिति की पुष्टि की है।

फ्रॉक-सलवार पर दाग ने पीड़िता के पास आरोपियों की उपस्थिति की पुष्टि की है। जांच के दौरान विभिन्न साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के अपराध की पुष्टि करता है। इसके साथ ही यह तथ्य भी पाया गया कि एक से अधिक लोगों ने पीड़िता के साथ बलात्कार किया। इसलिए इस मामले में धारा 376 डी सीआरपीसी को जोड़ा गया है। चिकित्सा रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि उसे कई दिनों तक बिना भोजन के रखा गया था। जिसके कारण कार्डियक और पोलुमनरी अटैक से उसकी मौत हुई। विशेषज्ञों की राय और पोस्ट मार्टम रिपोर्ट चालान का हिस्सा है।

जांच के दौरान अभियुक्तों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन के कॉल विवरण संबंधित क्वार्टर से प्राप्त किए गए थे। सीडीआर रिपोर्ट के विश्लेषण से पता चला है कि सारे आरोपियों का लोकेशन अपराध स्थल और एक दूसरे के आसपास था। घटना के दिन और समय सारे आरोपी आसपास ही थे। अभियुक्त दीपक खजुरिया के सीडीआर का विश्लेषण बताता है कि वह सुरिंदर कुमार के साथ लगातार संपर्क में था, जिन्हें एसपीओ के रूप में तैनात किया गया था।

पीड़िता के अपहरण के समय वह पुलिस स्टेशन हीरानगर में तैनात था। इस संदर्भ में सुरिंदर कुमार को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। लेकिन वह अभियुक्त दीपक खजूरिया के साथ अपनी टेलीफोन की वार्ता के बारे में कोई सुस्पष्ट और ठोस स्पष्टीकरण नहीं दे सका। इसके बावजूद तथ्य यह है कि अभियुक्त दीपक खजूरिया ने खुलासा किया था कि उन्होंने 14 जनवरी 2018 को और देवीस्थान के आसपास बकरवाल की आवाजाही का पता लगाने के लिए सुरेंद्र कुमार को भेज दिया था। और उन्हें यह बताया भी था कि पीड़िता को देवीस्थान में कैद कर रखा गया है। इसके जवाब में सुरिंदर कुमार ने देवीस्थान का दौरा किया और बकरवालों और हालत के बारे में उन्हें बताया।

जांच और गवाहों के बयान के आधार पर सुरिंदर कुमार की वहां होने की पुष्टि होती है। धारा 161 सीआरपीसी के तहत बयान में वह देवीस्थान के आसपास होने के कारण उसे न्यायिक हिरासत में लिया गया है। इस मामले में उसकी भागीदारी के संबंध में जांच की जा रही है। जांच में उसका नारको टेस्ट भी हो सकता है।जिसके लिए उसकी सहमति पहले ही प्राप्त हो चुकी है।

जांच के दौरान यह पता चला है कि आरोपी विशाल जगोत्रा जो उत्तर प्रदेश के आकांक्षा कॉलेज मीरापुर में बीएससी कृषि का छात्र हैं (पीड़िता के बलात्कार और हत्या में सक्रिय रूप से भाग लिया) ने अपने पिता के साथ मिलकर एक अलग ही कहानी बनाई। झूठे साक्ष्य और कहानी प्रस्तुत करने में किशोर पुत्र प्रेमनाथ ( रिश्तेदार) जो चंमोरियन का निवासी है। संजीराम ने आकांक्षा कॉलेज मीरापुर (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ) के चेयरमैन आरपी सिंह को रिश्वत देकर गलत साक्ष्य गढ़ा। इसकी भी जांच हो रही है जिसमें फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विशाल जगोत्रा को कॉलेज में उपस्थित बताया गया। 

इस केस के खुलासे में 3 पुलिस अफसरों की मुख्य भूमिका रही।जिसमें एसीपी नावेद पीरजादा, एसएसपी रमेश कुमार जल्ला और आईजी अहमदुल मुज्तबा का नाम शामिल है। वकीलों ने पीड़ित परिवार की वकील डीएस राजावत को वकालत करने व पुलिस को चार्ज शीट दाखिल करने से रोका था। इसी बीच जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा 2 पब्लिक प्रोसिक्यूटर भूपेंद्र सिंह एवं हरनाम सिंह की नियुक्तियों का आदेश आया।

                                (असद हयात, एडवोकेट हयूमन राइट्स एक्टिविस्ट, कैंप दिल्ली।)

 

 




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