मुंबई में उमड़े किसानों के लाल समंदर के लिए अगले कुछ घंटे हैं बेहद ऐतिहासिक

आंदोलन , मुंबई, सोमवार , 12-03-2018


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लोकमित्र गौतम

मुंबई। किसानों का लाल समन्दर देश की वित्तीय राजधानी पहुँच चुका है। घटनाएँ बहुत तेजी से आकार ले रही हैं। सत्तासीन सरकार से लेकर तमाम राजनीतिक पार्टियां पल-पल की घटनाओं पर न सिर्फ नजरें गडाए हैं बल्कि उन्हंत अपने फायदे की शक्ल देने में भी जी जान से लगी हुई हैं। सुबह ठीक 8 बजे मंत्रालय से ब्रेकिंग न्यूज आ चुकी है कि सरकार किसानों से बात करने के लिए कमेटी बना चुकी है। हालाँकि अभी अंतिम रूप से इस शायद 11 बजे के आस-पास बैठक शुरू हो जायेगी और 11.30 के आसपास कोई ब्रेकिंग न्यूज मिल जाए।

लेकिन इस गहमागहमी के बीच एक महत्वपूर्ण इतिहास बनने की संभावनाएं हैं। पूरे महाराष्ट्र में करीब 6 लाख से ज्यादा ऐसे किसान हैं जो जंगली जमीन को जोत बो रहे हैं। आजादी के बाद से ही सरकार ने देश के जंगली जमीन पर आश्रित किसानों को आश्वासन दिया था कि जल्द ही उस जमीन का पट्टा उनके नाम कर दिया जाएगा। लेकिन हकीकत में आज तक ऐसा नहीं हुआ।

इस आन्दोलन की किसान कर्जमाफी के बाद दूसरी सबसे बड़ी मांग यही है कि जिस जमीन को किसान जोत बो रहे हैं वह उनके नाम की जाए।

मुंबई में किसानों का मार्च।

जिससे प्रशासन उन्हें रह-रहकर परेशान न करे। जो सूत्रों से खबरें मिल रही हैं उनके मुताबिक़ राज्य इसके लिए तैयार है और शायद इसका ऐलान हो जाए। अगर ऐसा होता है तो पूरे देश में 60 लाख किसानों को इसका फायदा मिल सकता है।

अगर ऐसा होता है तो यह देश भर के किसानों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। क्योंकि एक बार महाराष्ट्र के किसानों को जमीन का यह मालिकाना मिल गया तो पूरे देश के उन किसानों को फायदा मिलेगा जो ऐसी ही जमीन पर खेती करते हैं।

अगर यह होता है तो ये इस आन्दोलन की ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। लेकिन यह मोदी सरकार के लिए संकट भी हो सकता है क्योंकि 1980 तक वन राज्य सूची में थे, लेकिन भारतीय वन संरक्षण अधिनियम के बाद अब वन भूमि केन्द्र सरकार के संरक्षण में है।

इसके पहले किसानों ने छात्रों की बोर्ड की परीक्षाओं को देखते हुए रात में ही आज़ाद मैदान कूच करने का फैसला ले लिया। जबकि 180 किलो मीटर पैदल चलकर उनके पैर पहले ही लहूलुहान हो चुके थे। लेकिन उन्हें छात्रों की परेशानी उससे भी बड़ी लगी लिहाजा वो थके मादे ही रात में चल दिए। इतना ही नहीं आज उनकी योजना 11 बजे विधानसभा के घेराव की थी।

लेकिन चूंकि छात्रों की परीक्षा 12 बजे खत्म होगी लिहाजा उन्हें लौटने में परेशानी न हो इसके चलते उन्होंने घेराव के अपने समय को और आगे बढ़ा दिया। हालांकि इसके साथ ही सरकार भी हरकत में आ गयी है। जिसमें कुछ ऐतिहासिक फैसले होने की उम्मीद बन गयी है।










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Rajendra mishra :: - 03-12-2018
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