पूर्व सेनाध्यक्षों ने लिखा राष्ट्रपति को पत्र, कहा-सेना के इस्तेमाल से बाज आने का राजनीतिक दलों को दें निर्देश

बड़ी ख़बर , नई दिल्ली, शुक्रवार , 12-04-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। सेना के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर सेना से जुड़े सभी हिस्सों में जबर्दस्त नाराजगी देखी जा रही है। कम से कम 8 पूर्व सेनाध्यक्षों और उसके साथ ही ढेर सारे रिटायर्ड वरिष्ठ अफसरों ने इस सिलसिले में तीनों सेनाओं के अध्यक्ष राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में राजनीतिक दलों द्वारा किए जा रहे सेना के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने राष्ट्रपति से कहा है कि वह सीधे राजनीतिक दलों को निर्देश दें कि वे “आगे से सेना के किसी भी तरह के इस्तेमाल” से बाज आएं। साथ ही इस बात को सुनिश्चित करें कि सैन्य इकाइयों या फिर सैनिकों की किसी भी कार्रवाई का राजनीतिक उद्देश्य से इस्तेमाल न हो।

यह अभूतपूर्व अपील कल आधी रात को सामने आयी। यह तब हुआ जब गुरुवार को पहले फेज की पोलिंग के कई घंटे बीत गए थे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि “श्रीमान, हम उस असामान्य और पूरी तरह से अस्वीकार्य मामले की तरफ आपका ध्यान खींच रहे हैं जिसमें राजनेता सीमापार स्ट्राइक जैसे सैन्य आपरेशन का श्रेय ले रहे हैं। इस मामले में वे सैन्य बलों को मोदी की सेना तक होने का दावा कर दे रहे हैं।”

पत्र में किसी राजनीतिक दल या नेता का नाम नहीं लिया गया है। “दि टेलीग्राफ” के हवाले से आयी खबर में पत्र के बारे में पूरी जानकारी दी गयी है। मंगलवार को पीएम मोदी ने पहली दफा वोट करने वाले मतदाताओं को अपना मत बालाकोट में स्ट्राइक करने वाले सैनिकों के नाम करने की अपील की थी। उसके पहले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सैन्य बलों को मोदी की सेना करार दिया था।

पत्र में कुछ बड़े नाम जो शामिल हैं उनमें जनरल एसएफ रॉड्रिग्स, जनरल शंकर रॉय चौधरी, जनरल दीपक कपूर, एडमिरल एल रामदास, एडमिरल विष्णु भागवत, एडमिरल अरुण प्रकाश, एडमिरल सुरीश मेहता और एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी प्रमुख हैं।

इसके साथ ही इन बुजुर्ग सेना के अधिकारियों ने यह भी कहा है कि पत्र में लिखी गयी बातें मौजूदा समय में सेवा में मौजूद सैन्य बलों और उसके सैनिकों और अफसरों की भावनाओं का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। रिटायर्ड अफसरों ने कहा कि नब्ज पर उनका हाथ है इसलिए वे बोल रहे हैं। इसीलिए सुप्रीम कमांडर के ध्यान में इस बात को लाना चाहते हैं। यह मामला न केवल पूर्व सैनिकों बल्कि मौजूदा समय में सेवारत सैनिकों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। 

उन्होंने राष्ट्रपति से इस बात की अपील की है कि वे “इस बात को सुनिश्चित करें कि सैन्य बलों का सेकुलर और अराजनीतिक चरित्र महफूज रहे।”

 








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