कांग्रेस को बड़ा झटका, मायावती ने किया छत्तीसगढ़ में जोगी के साथ गठजोड़, एमपी में भी एकला चलो

राजनीति , नई दिल्ली, शुक्रवार , 21-09-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। बीजेपी विरोधी दलों को एक साथ लाने के कांग्रेस के प्रायसों को बड़ा धक्का पहुंचाते हुए बीएसपी चीफ मायावती ने छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी के साथ गठबंधन की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने मध्यप्रदेश में भी अपने 22 प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है। मायावती की इन घोषणाओं से यूपी में सपा-बसपा-राष्ट्रीय लोकदल और कांग्रेस के बीच बनने वाले महागठबंधन पर भी सवालिया निशान लग गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस बात का दावा कर रहे थे कि 2019 में एक समान विचारधारा वाली पार्टियां एक साथ आएंगी और मिलकर बीजेपी को परास्त करेंगी। लेकिन मायावती ने एक दिन पहले ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उन्होंने बाकायदा संवाददाता सम्मेलन कर इस बात की घोषणा की थी कि अगर बीजेपी विरोधी मोर्चे में उन्हें सम्मानजनक सीट नहीं मिलती है तो उनकी पार्टी अकेले लड़ने के लिए मजबूर होगी।

छत्तीसगढ़ में मायावती द्वारा घोषित किए गए सीटों के बंटवारे के फार्मूले के मुताबिक 90 सीटों की विधानसभा में बीएसपी 35 सीटों पर चुनाव लड़गी जबकि जोगी की छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के प्रत्याशी बाकी 55 सीटों पर अपनी किस्मत आजमाएंगे। इसके साथ ही जोगी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे।

जबकि छत्तीसगढ़ में बीएसपी के पास एक सीट है और 2013 में उसे कुल 4.27 फीसदी वोट मिले थे। कांग्रेस और बीजेपी के वोटों में महज 0.7 फीसदी का अंतर था। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक मायावती ने कहा कि जल्द ही वो जोगी के साथ एक संयुक्त रैली को संबोधित करेंगी।

इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया ने कहा कि बीजेपी अपने काम पर लग गयी है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि “बीजेपी शाम-दाम-दंड किसी भी तरीके से सत्ता हासिल करना चाहती है। लेकिन वो इसमें सफल नहीं होंगे”।

कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक 2013 में एक सीट जीतने और दो सीटों पर दूसरे नंबर पर रहने वाली बीएसपी ने कांग्रेस से शुरुआत में 20 सीटें मांगी थी। कांग्रेस के एक बड़े पदाधिकारी ने एक्सप्रेस को बताया कि “वो उससे कम 15 पर आए फिर 12 पर और आखिर में 9 पर आ गए। लेकिन कांग्रेस में इस बात पर सहमति थी कि बहुत ज्यादा सीटें बीएसपी को नहीं दी जा सकती हैं। हमने उन्हें 5 सीटों का प्रस्ताव दिया था और विभिन्न स्तरों पर बातचीत जारी थी। तीन दिन पहले उन्होंने सूचित किया था कि तीन दिन बाद वो फिर संपर्क करेंगे और आज (बृहस्पतिवार) उन्होंने एकतरफा तरीके से जोगी के साथ गठबंधन की घोषणा कर दी। हम नहीं जानते थे कि इस तरह की कोई खिचड़ी पक रही है।”

पुनिया ने कहा कि कांग्रेस ने सभी 90 सीटों पर लड़ने के लिए पर्याप्त तैयारी कर ली है। 

हालांकि मायावती की इस घोषणा से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है जो मध्य प्रदेश में उसके साथ गठजोड़ करना चाहती थी साथ ही अगले लोकसभा में यूपी में बीएसपी, एसपी और आरएलडी के साथ मिलकर बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ने का मंसूबा पाल रखी थी।

मध्य प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ बीएसपी के साथ संपर्क में थे। कांग्रेस की राज्य इकाई बीएसपी के साथ यूपी से सटे मध्य प्रदेश की सीमा पर रणनीतिक तालमेल बनाना चाहती थी। खासकर भिंड, मुरैना और ग्वालियर जिलों में जहां एसएसी-एसटी एक्ट से छेड़छाड़ के खिलाफ 2 अप्रैल को हुए भारत बंद को भीषण समर्थन मिला था।

2013 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी मध्य प्रदेश में केवल 4 सीट जीत पायी थी। लेकिन बंद को मिली सफलता के बाद उसने अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी थी। बृहस्पतिवार को 22 सीटों पर प्रत्याशियों की की गयी घोषणा में उसके 3 विधायकों का नाम भी शामिल है।

एमपी के कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सीटों की घोषणा के जरिये बीएसपी दबाव की राजनीति कर रही है। कांग्रेस नेता पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि “बीएसपी के साथ औपचारिक गठबंधन की कोई घोषणा नहीं की गयी थी। लेकिन वैचारिक समानता को देखते हुए हम रणनीतिक गठबंधन की उम्मीद जरूर कर रहे थे।”

एक नेता ने कहा कि “एकतरफा घोषणा कांग्रेस से ज्यादा सीट हासिल करने के लिए दबाव की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। लेकिन अगर बीएसपी अकेले चुनाव लड़ने का फैसला कर लेती है तो उससे हमें नुकसान होगा।”

उन्होंने कहा कि बीएसपी ने पहले भी ऐसा किया है लेकिन अगर गठबंधन की बातचीत कोई सही आकार लेती है तो अपनी सूची पर वो फिर से विचार करने के लिए भी तैयार हो जाएगी।

छत्तीसगढ़ में जोगी-मायावती गठबंधन कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ा कर सकता है। इस समय यहां की 10 सुरक्षित सीटों में बीजेपी के पास 9 सीटे हैं। कांग्रेस और बीएसपी के बीच गठजोड़ का मतलब उन और दूसरी सीटों पर बीजेपी को भारी नुकसान।

एक बीजेपी नेता ने एक्सप्रेस से कहा कि “अब पूरे राज्य में खास कर उन सीटों पर जहां मायावती और जोगी का प्रभाव है, बीजेपी विरोधी वोट बंट जाएगा।”

छत्तीसगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष धर्मलाल कौशिक ने कहा कि “ये बात बिल्कुल साफ हो चुकी है कि 65 सीटों के लक्ष्य के साथ बीजेपी जीतेगी। कोई भी कांग्रेस के डूबते जहाज पर नहीं बैठना चाहता है।”

मायावती और जोगी के साझे बयान ने इस बात का भी संकेत दिया है कि गठबंधन में वो दूसरे छोटे दलों को भी शामिल करने की कोशिश करेंगे। इस गठबंधन ने जोगी को नया जीवन दे दिया है पिछले दिनों कई लोग उनकी पार्टी छोड़ कर चले गए थे।

राजनीतिक पंडितों का एक हिस्सा मायावती के इस फैसले को दबाव में लिया गया फैसला मानता है। उसका कहना है कि मायावती के सामने केंद्र सरकार सीबीआई का कोड़ा फटकार रही है। और उन पर किसी भी रूप में छत्तीसगढ़ और एमपी में कांग्रेस और यूपी में महागठबंधन में शामिल न होने का दबाव बना रही है। पिछले दिनों गठजोड़ को लेकर जिस तरह की मायावती की प्रतिक्रियाएं आयी हैं उससे ये बात बिल्कुल साफ दिख रही है।

10 सितंबर को कांग्रेस और लेफ्ट के बंद के दिन भी विपक्ष के साथ खड़े होने की जगह मायावती ने तमाम चीजों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। उसके बाद एक और संवाददाता सम्मेलन में सम्मानजनक सीटें न मिलने पर गठबंधन में नहीं जाने की घोषणा की। ये सब चीजें दिखा रही हैं कि मायावती ने पहले से ही कुछ मन बना लिया है और अब वो उसके लिए पृष्ठभूमि और तर्क तलाश रही हैं। क्योंकि आखिर में उन्हें भी अपने सामाजिक आधार को संतुष्ट करना होगा। लिहाजा उन्होंने सम्मानजनक सीट की एक ऐसी लाइन ली है जिसे वो जब चाहें और जैसे चाहें इस्तेमाल कर सकती हैं।

दरअसल यूपी बीजेपी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। साथ ही एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी अगर तीनों राज्यों को बीजेपी खो देती है तो 2019 के चुनावों पर उसका बेहद बुरा असर पड़ेगा। लिहाजा वो किसी भी रूप में बीएसपी को इन गठजोड़ों में जाने से रोकने की कोशिश कर रही है। इसके लिए उसने सीबीआई को अपना हथियार बनाया है। बताया जा रहा है कि सीबीआई के एक बड़े अधिकारी को मायावती से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों को देखने के लिए लगा दिया गया है। और खुद उस अफसर पर भी कुछ नतीजा देने का दबाव है क्योंकि उसके खिलाफ भी सरकार के पास कुछ ऐसे मामले हैं जिन्हें वो जब चाहे इस्तेमाल कर सकती है। 

लिहाजा सीबीआई अफसर ने भी अपनी पूरी जान लड़ा दी है। और मायावती के इन बयानों और नये गठजोड़ों को उसी आइने में देखा जाना चाहिए। हालांकि अभी चुनाव में कई महीने बाकी हैं और लोकसभा का चुनाव तो बहुत दूर है। तब तक गंगा-यमुना में कितना पानी बह गया रहा होगा उसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। लेकिन इससे विपक्ष की एकता में दरार का गलत संदेश तो जा ही रहा है।








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