#MeToo की हर कसौटी पर फिट बैठता है मोदी का सोनीगेट

ख़ास रपट , नई दिल्ली, रविवार , 18-11-2018


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जनचौक ब्यूरो

(इस समय जब देशभर में #MeToo के नाम से महिलाओं के साथ हुई छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न की घटनाओं के खिलाफ अभियान चल रहा है और इसकी चपेट में बड़ी-बड़ी हस्तियां आ रही हैं। तब कुछ ऐसे भी मामलों पर गौर करना जरूरी हो जाता है जिनमें महिलाएं सामने आने की हिम्मत नहीं कर सकीं। लेकिन उनकी सच्ची कहानियां सार्वजनिक तौर पर मौजूद हैं। उन्हीं में से एक है मानसी प्रकरण। जिसे लोकप्रिय रूप से सोनीगेट के तौर पर भी जाना जाता है। गुजरात के इस प्रकरण पर दिवंगत मुकुल सिन्हा की ये रिपोर्ट एक बार फिर प्रासंगिक हो गयी है। लिहाजा उसे यहां पूरा का पूरा दिए जाने का जनचौक ने फैसला किया है-संपादक)

जो काम गुलैल और कोबरापोस्ट का ज्वाइंट वेंचर नहीं कर सका उसको मानसी सोनी उर्फ ‘माधुरी’ के पिता प्राणलाल सोनी ने बहुत आसानी से कर दिया। दरअसल गुलैल और कोबरापोस्ट इस बात को नहीं बता पाए थे कि अमित शाह के साहेब कौन हैं जिन्होंने प्राणलाल की बेटी पर नजर रखने का निर्देश दिया था। लेकिन बीजेपी हेडक्वार्टर द्वारा जारी किया गया प्राणलाल का पत्र इस बात को बिल्कुल साफ कर देता है कि साहेब कौन हैं। उन्होंने अपने पत्र की शुरुआत में कहा था कि उसे समय-बेसमय आना-जाना होता था जिसके चलते एक पिता होने के नाते निश्चित तौर पर मैं चिंतित था। इन परिस्थितियों में मैंने मौखिक रूप से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, जिनके साथ हमारा बेहद पुराना पारिवारिक रिश्ता था, से अपनी बेटी का ख्याल रखने की गुजारिश की।

वैसे तकरीबन एक महीने तक उनकी बेटी पर नजर रखवाने के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खौफनाक कृत्य का बचाव करने के पीछे एक पिता की चिंता को मैं समझ सकता हूं। लेकिन उनका बचाव दूर-दूर तक न ही निगरानी रखने के पीछे के उद्देश्यों और न ही उनकी बेटी की वास्तविक ट्रैकिंग और उस पर नजर रखे जाने के कारणों का समर्थन करता है। ये कहना कि मानसी को अपनी मां के आपरेशन में शामिल होने के लिए आना था और उसके लिए विशिष्ट सुरक्षा कवरेज की जरूरत थी कहीं से भी फिट नहीं बैठता है। क्योंकि उसकी मां कुछ दिनों ही अस्पताल में भर्ती रहीं जबकि उन पर निगरानी एक महीने से ज्यादा तक जारी रही।

यहां मुकुल सिन्हा ने इस बात को बिल्कुल साफ कर दिया है कि वो मानसी या फिर नरेंद्र मोदी के निजी जीवन पर न तो टिप्पणी करना चाहते हैं और न ही उसमें घुसना चाहते हैं क्योंकि ये उनका अपना मामला है। अमित शाह और जीएल सिंघल (गुजरात के एक नौकरशाह) के बीच बातचीत एक बिल्कुल दूसरी चीज सामने लाती है जो बेहद निंदनीय होने के साथ ही कानून के शासन के भी खिलाफ है। पिता के इंकार के बावजूद अमित शाह द्वारा जीएल सिंघल को दिए गए निर्देशों से ये बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि मानसी को ट्रैक करने के पीछे एक मात्र उद्देश्य उसके निजी जीवन में ताक-झांक करना और उसके हर पल को ट्रैक करना था जिसे साहेब को रिपोर्ट किया जाना था। और साथ ही ये बात अब बिल्कुल साफ हो चुकी है कि वो कोई और नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी हैं। इसको और स्पष्ट करने के लिए हम अमित शाह द्वारा जीएल सिंघल को दिए गए कुछ निर्देशों को एक बार फिर दे रहे हैं:

बातचीत का पहला टुकड़ा इस बात को साफ-साफ स्थापित करेगा कि पुलिस को न केवल मानसी को ट्रैक करने बल्कि भावनगर के म्युनिसिपल कमिश्नर की भी प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखने के लिए कहा गया था जो संयोग से आईएएस प्रदीप शर्मा थे जिन्हें प्रताड़ित करने के लिए गुजरात सरकार ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रखा है। प्रदीप शर्मा ने बाकायदा एफिडेविट दाखिल कर कहा है कि उनके उत्पीड़न के पीछे मानसी के साथ नरेंद्र मोदी के रिश्तों का उनकी जानकारी में होना मुख्य कारण है। प्राणलाल सोनी ने निश्चित तौर पर मोदी से प्रदीप शर्मा पर नजर रखने के लिए नहीं कहा था।

अमित शाह: सिंघल...कोई अपडेट?

जीएल सिंघल: सर, वो होटल छोड़ चुकी है और अब वो प्रहलाद नगर की ओर जा रही है।

अमित शाह: भावनगर के एसपी के साथ तुम्हारे कैसे रिश्ते हैं

जीएल सिंघल: बहुत अच्छा सर

अमित शाह: चेक करो कमिश्नर उसके घर पर है या वो यहां आ रहे हैं

जीएल सिंघल: ओके सर...

अमित शाह: म्युनिसिपल कमिश्नर.....

जीएल सिंघल: ओके सर... 

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जीएल सिंघल: कुछ गोपनीय काम करने की जरूरत है।

आर असारी: सर

जीएल सिंघल: क्या तुम गोपनीय तरीके से अपने बीएमसी म्युनिसिपल कमिश्नर की लोकेशन बताओगे?

आर असारी: शर्मा सर...की लोकेशन

जीएल सिंघल: हम्म

आर असारी: ओके, मैं उसे चेक करता हूं सर

जीएल सिंघल: लेकिन गोपनीय तरीके से, ओके

आर असारी: हां हां...हां सर

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जीएल सिंघल:  .....भावनगर की जो जांच करनी थी उसके संदर्भ में, देर रात को संदेश हासिल करने के चलते मैंने आपको परेशान करना उचित नहीं समझा। वो वहीं भावनगर में हैं। 

अमित शाह:  उस पर नजर रखो।

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अमित शाह: ओके....और वो भावनगर का शख्स.....और उसकी लोकेशन?

जीएल सिंघल: सर....वो वहीं भावगनर में है।

आगे बातचीत का दूसरा टुकड़ा इस बात को स्थापित कर देगा कि मानसी की ट्रैकिंग उसकी भलाई के लिए नहीं की जा रही थी बल्कि नरेंद्र मोदी को रिपोर्ट करने के लिए उस पर गोपनीय तरीके से निगरानी रखी जा रही थी। अगर उसकी भलाई के लिए ऐसा किया जाता तो अधिकारी निश्चित तौर पर उसका पीछा किए जाने के बारे में  उसको बताते। नीचे दी गयी बातचीत इस बात को दिखाती है कि मानसी को न केवल अंधेरे में रखा गया बल्कि पुलिस वास्तव में एक जाल बिछाने का प्रयास कर रही थी जिससे पता चल सके कि वो क्या करने वाली है।

अमित शाह: सिंघल क्या तुमने चेक किया

जीएल सिंघल: सर हमारे आदमी वहां पहुंच गए हैं। अभी तक किसी भी तरह की गतिविधि की रिपोर्ट नहीं आयी है।

अमित शाह: चेक करो कि वो वहां है या नहीं

जीएल सिंघल: वास्तव में हमने रात में एक ट्रावेल एजेंसी के बहाने कॉल करके एक जाल बिछाने का प्रयास किया और पूछा कि नैंसी डिसूजा नाम की एक मेहमान क्या उस रूम में रुकी हैं? उस नाम का कोई भी वहां नहीं रुका है लेकिन उन्होंने बताया कि कोई .....नाम से बुलाया जाने वाला वहां रुका है। लेकिन वो लड़की इतनी चालाक है कि जब वो एयरपोर्ट से लौट रही थी तो किसी ने उसे मिस कॉल दिया और फिर उसने उस नंबर पर वापस कॉल किया और पूछना शुरू कर दिया कि किसने कॉल किया था। लेकिन ये बताया गया कि ये पब्लिक बूथ से कॉल था। उसने पूछना शुरू कर दिया कि किसने कॉल किया था और वो किस तरह से दिखता/दिखती थी।

अमित शाह: हम्म

जीएल सिंघल: उसके बाद एक बार फिर हम लोगों ने इसकी पुष्टि करने की कोशिश की कि क्या रात के 11 बजे के आस-पास उसके रूम में कोई दूसरा भी था।

आखिर में बातचीत के एक दूसरे हिस्से में ये बात बिल्कुल स्पष्ट हो जाती है कि साहेब अपने स्वतंत्र सूत्रों के माध्यम से किसी गतिविधि की ठोस सूचना पाते हैं और इसलिए सिंघल से महिला पर नजर रखने के लिए विमान में पुलिसकर्मी तैनात करने के लिए कहा जाता है।

अमित शाह: सिंघल...

जीएल सिंघल: हां सर

अमित शाह: क्या हम किसी शख्स को मुंबई जाने वाली फ्लाइट में भेज सकते हैं

अमित शाह: साहेब के पास किसी गतिविधि की ठोस सूचना है इसलिए किसी को फ्लाइट में तैनात करना बेहतर रहेगा।

जीएल सिंघल: हां सर.....बहुत अच्छा सर मैं किसी को भेज दूंगा

अमित शाह: कुछ पैसा दे दो और उसे फ्लाइट में भेज दो और दूसरा अगर वो एसटीडी पीसीओ से एयरपोर्ट पर कॉल करती है तो नंबर चेक करवा लेना होगा।

जीएल सिंघल: हां सर....ठीक सर...  

पिता प्राणलाल के पत्र के पीछे बीजेपी हेडक्वार्टर ने नरेंद्र मोदी के एक और अवैध तथा निर्लज्ज कृत्य को धोने का प्रयास किया है। ये सत्य को तोड़ने-मरोड़ने का एक और निंदनीय और शैतानी प्रयास है। ये निश्चित तौर पर मोदी का सोनीगेट है जिसकी सीबीआई से जांच होना बहुत जरूरी है।








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