खाली कुर्सियां और भाषण के बीच उठकर लोगों का जाना, यही है मोदी की रैलियों का सच!

गुजरात की जंग , नई दिल्ली।, बृहस्पतिवार , 07-12-2017


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के धुंधका की अपनी रैली में मंदिर के बहाने कांग्रेस पर हमला कर रहे थे। तो उसी समय उनके सामने एक और घटना घट रही थी। जिसे वहां उपस्थित लोगों ने अपनी आंखों से देखा और कैमरों ने कैद कर लिया। वो घटना थी बड़ी तादाद में कुर्सियों का खाली होना और बीच रैली से लोगों का उठकर जाना।

‘दि क्विंट’ वेबसाइट ने इस संबंध में एक रिपोर्ट दी है। जिसमें वीडियो के साथ ही उस सयम के फोटो दिए गए हैं जब पीएम लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि “12 बजे पीएम मोदी हेलिकॉप्टर से रैली स्थल पर पहुंचे और उन्होंने 20 मिनट बाद रैली शुरू की। आश्चर्य की बात ये थी कि मोदी ने रैली में जैसे ही लोगों से बात करनी शुरू की, लोगों ने वहां से जाना शुरू कर दिया। ये ऐसे हो रहा था, मानो रैली में आगे बैठने वाले लोग पहले निकलेंगे”।

मोदी की रैली में खाली कुर्सियां। साभार-दि क्विट

पोर्टल के रिपोर्टर ने रैली छोड़ने वाले कुछ लोगों से बात की, तो उन्होंने कहा कि “मौसम काफी ठंडा है। कुछ लोगों ने दावा किया कि वो बहुत दूर से आए थे और उन्हें घर लौटने के लिए 2 घंटे की यात्रा करनी थी। जबकि कुछ ने कहा कि भाषण बहुत लंबा था और मोदी के जाने के बाद ट्रैफिक से बचने के लिए उन्हें ग्राउंड जल्दी छोड़ना पड़ा”।

इसके पहले भी पीएम मोदी की रैलियों में कुर्सियों के खाली होने की खबरें आ चुकी हैं। सूरत की रैली का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एबीपी संवाददाता ने विस्तार से कुर्सियों के खाली होने और उसके पीछे की दास्तान बतायी थी। इसका नतीजा ये रहा कि बीजेपी के कुछ छोटे नेताओं की उसे धमकियां तक मिलीं। और बहुत सारे बीजेपी समर्थकों ने उसे कांग्रेस एजेंट करार दिया।

इसी तरह की एक घटना मोरबी की रैली में हुई थी जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने पीछे कुर्सियों के खाली होने को एक दूसरे तरीके से छुपाने की कोशिश की थी। उन्होंने मंच से सभा के आयोजकों को माइक की व्यवस्था न करने के लिए डांट पिलायी थी। दरअसल ये पीएम की अपने तरह की नाटकबाजी थी जिसके जरिये वो बाहर के लोगों को ये संदेश देना चाहते थे कि भीड़ इतनी ज्यादा है कि माइक समेत व्यवस्था चरमरा गयी। आपको बता दें कि उसी दिन पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की पीएम के समानांतर रैली थी जिसमें जनसमुद्र उमड़ आया था।

रैली के बीच से उठकर जाते लोग। साभार- दिक्विंट

भीड़ की कमी बीजेपी को अंदर से परेशान कर रही है। इसके लिए कई बैठकें तक हो चुकी हैं। बताया जा रहा है कि इसको ठीक करने के लिए बाकायदा अलग से विंग और फंड तक बनाया गया है। लेकिन किसी का सही नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है। अंदर से बीजेपी नेता भले ही कितने परेशान हों लेकिन जनता के बीच इस तरह का कोई संदेश नहीं जाने देना चाहते। बुधवार को कच्छ की एक रैली में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सूबे में बीजेपी की आंधी चलने का दावा किया। साथ ही उन्होंने 150 से ज्यादा सीटें जीतने की अपनी भविष्यवाणी को फिर दोहरायी। 

बहरहाल धुंधका की रैली में तैनात स्थानीय पुलिसकर्मियों का बयान इस मामले में आखिरी है। उन लोगों ने रिपोर्टर को बताया कि उन्होंने कभी लोगों को मोदी की रैलियों से इस तरह से उठकर जाते नहीं देखा वो भी इतनी बड़ी संख्या में और मोदी के भाषण के बीच।






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